#Balrampur ! बाढ़ से सुरक्षा और खेत तक पानी: बलरामपुर में जल प्रबंधन का नया अध्याय...
तटबंधों के सुदृढ़ीकरण से 63 हजार आबादी सुरक्षित, राप्ती नहर के अंतिम छोर तक पहुंची सिंचाई...
#बलरामपुर ! जनपद में बाढ़ नियंत्रण, कटान रोकने और किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए चलाए गए अभियानों के धरातल पर बेहतर परिणाम दिखने लगे हैं। जिला प्रशासन और सिंचाई व बाढ़ खंड की देखरेख में नहरों, जलाशयों और तटबंधों के कायाकल्प का काम शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी से सटे इलाकों में स्थायी सुरक्षा ढांचे बनने से 63 हजार से अधिक आबादी को राहत मिली है, वहीं 43,200 हेक्टेयर कृषि भूमि कटान के खतरे से बाहर हो गई है।
100% पुनर्वास: टेल तक पहुंचा पानी, लबालब हुए तालाब
किसानों को समय पर पानी उपलब्ध कराने के लिए चित्तौड़गढ़ जलाशय, गिरगिटही बांध और बघेलखण्ड बांध नहर प्रणाली का कायाकल्प 100 फीसदी पूरा कर लिया गया है। प्रेमपुर, हल्लौरा और भुजेहरा राजवाहा में लाइनिंग कार्य से पानी का रिसाव रुका है। इसका सीधा नतीजा खरीफ सत्र के दौरान देखने को मिला, जहां राप्ती मुख्य नहर, महादेव माइनर और बनकटवा रजवाहा के जरिए अंतिम छोर (टेल) पर स्थित खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचा। कृषि के साथ-साथ प्रेमनगर और बनकटवा कलां के ग्रामीण तालाबों को नहर के पानी से भरा गया है, जिससे भूजल संवर्धन और पशुओं के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।
₹2,500 लाख से अधिक के सुरक्षा कार्य पूरे
राप्ती व बूढ़ी राप्ती के तटवर्ती गांवों को बचाने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ:
चौकाकला एवं मधवापुर: ₹350.56 लाख की लागत से ईसी बैग, एप्रन और स्लोप पिचिंग का कार्य पूर्ण।
बलरामपुर-भड़रिया तटबंध (कोडरवा): ₹668.04 लाख से 700 मीटर में बोल्डर रिवेटमेंट।
भोजपुर-शाहपुर व अन्य तटबंध: भोजपुर-शाहपुर (₹774.80 लाख), बेलहा-चरनगहिया (₹567.05 लाख) और करमहना-भोजपुर (₹246.11 लाख) तटबंधों पर कटान निरोधक कार्य पूरे होने से चौकाकला, कोडरवा व भोजपुर समेत 60 से अधिक गांव पूरी तरह सुरक्षित हो गए हैं।
रातभर चला फ्लड फाइटिंग, टला बड़ा खतरा
अगस्त के अंतिम सप्ताह में कोड़रीघाट तटबंध पर जल दबाव बढ़ने से कटान का खतरा पैदा हो गया था। स्थिति को भांपते हुए प्रशासनिक टीमों ने मौके पर कैंप किया और फ्लड लाइट की रोशनी में जियो बैग व क्रेट्स का उपयोग कर 24 घंटे की मुस्तैदी से तटबंध को समय रहते कटने से बचा लिया।
मानसून के दौरान 24 घंटे चालू रहने वाले जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष (05263-232283, 7706881121) के जरिए संवेदनशील स्थलों पर पैनी नजर रखी जा रही है। जिला प्रशासन ने शेष कार्यों के नियमित रखरखाव और टेल तक निर्बाध जलापूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
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