
जिला कारागार उरई में विधिक शिविर एवं साप्ताहिक निरीक्षण, बंदियों की समस्याएं जानीं
जितेंद्र गुप्ता ✍️। बोल दो भारत
उरई (जालौन)। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन की सचिव श्रीमती मनाली चन्द्रा ने 14 सितंबर 2026 को जिला कारागार उरई का साप्ताहिक भ्रमण एवं विधिक शिविर आयोजित किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न बैरकों का निरीक्षण कर बंदियों से बातचीत की और उनकी समस्याओं की जानकारी लेते हुए जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जेल के मुख्य दरवाजे पर मरम्मत का कार्य चलता मिला। सचिव मनाली चन्द्रा ने निर्देश दिए कि ऐसे बंदियों की सूची तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय को भेजी जाए, जिनकी सक्षम न्यायालय से जमानत स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन जमानतगीर उपलब्ध न होने के कारण वे अभी तक रिहा नहीं हो सके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में प्रभावी पैरवी कर बंदियों को शीघ्र रिहाई दिलाने का प्रयास किया जाए।
उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों की जमानत राज्य की ओर से जिला अधिकार प्राप्त समिति, जालौन के माध्यम से कराए जाने के संबंध में भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके अलावा बंदियों के मुकदमों की पैरवी, विधिक सहायता एवं कानूनी सलाह की स्थिति की जानकारी ली गई।
महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों की चिकित्सा, खान-पान सहित अन्य व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी ली गई। सचिव ने निर्देशित किया कि जिन बंदियों के पास निजी अधिवक्ता नहीं हैं अथवा जिनकी न्यायालय में उचित पैरवी नहीं हो पा रही है, उन्हें नियमानुसार विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
इसके बाद मुलाकाती क्षेत्र में बंदियों के परिजनों की सहायता के लिए स्थापित लीगल एड हेल्प डेस्क का भी निरीक्षण किया गया। इस दौरान सचिव ने कई बंदियों से उनकी समस्याओं के बारे में अलग-अलग जानकारी ली, जिस पर बंदियों ने कोई समस्या नहीं बताई।
इसके उपरांत हिंदी दिवस एवं लोक अदालत के लाभ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। शिविर की अध्यक्षता सचिव श्रीमती मनाली चन्द्रा ने की। इस दौरान असिस्टेंट प्रथम एलएडीसी श्री अभिषेक पाठक ने हिंदी दिवस के इतिहास और महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को केंद्र सरकार की राजभाषा बनाने का निर्णय लिया था।
उन्होंने हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थापित कराने के प्रयासों में व्यौहार राजेन्द्र सिंह, काका कालेलकर, हजारीप्रसाद द्विवेदी और सेठ गोविंद दास सहित अन्य साहित्यकारों के योगदान की जानकारी भी दी।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक श्री प्रशान्त मौर्या, कारापाल श्री प्रदीप कुमार, उपकारापाल श्री अमर सिंह, उपकारापाल श्रीमती सुखवती तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन के लिपिक श्री शुभम् शुक्ला उपस्थित रहे।
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Orai, Jalaun | Sep 14, 2026