सहयोग पोर्टल के 45 लंबित मामलों को सात दिनों में निपटाने का निर्देश
डीएम ने की सहयोग, विद्यार्थी सहयोग व संकल्प पोर्टल की समीक्षा, गुणवत्तापूर्ण समाधान पर दिया जोर
जहानाबाद : आम लोगों की शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। मंगलवार को समाहरणालय में जिला पदाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया की अध्यक्षता में सहयोग पोर्टल, विद्यार्थी सहयोग पोर्टल तथा संकल्प-सप्राइज इंस्पेक्शन एंड कंप्लायंस मॉनिटरिंग सिस्टम की समीक्षा की गई। इस दौरान लंबित आवेदनों, कारण-पृच्छा नोटिस और औचक निरीक्षण के अनुपालन की स्थिति की जानकारी ली गई।
सहयोग पोर्टल की समीक्षा में सामने आया कि कुल 8,961 आवेदनों में से 8,250 का निष्पादन किया जा चुका है, जबकि 319 आवेदन अभी लंबित हैं। डीएम ने सात दिनों से अधिक समय से लंबित 45 मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निष्पादित करने का निर्देश दिया। वहीं, अब तक प्रतिनियुक्त नहीं किए गए नौ मामलों को तत्काल संबंधित पदाधिकारियों को सौंपने को कहा। शिकायतों के निष्पादन में शिथिलता को लेकर अब तक 22 पदाधिकारियों के विरुद्ध 52 कारण-पृच्छा नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
एसएलएसपी के 119 मामलों में 91 का निष्पादन हुआ है, जबकि 28 मामले लंबित हैं। डीएम ने कहा कि केवल औपचारिक प्रतिवेदन के आधार पर किसी मामले को बंद नहीं किया जाए। शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक और गुणवत्तापूर्ण समाधान धरातल पर सुनिश्चित होना चाहिए।
विद्यार्थी सहयोग पोर्टल की समीक्षा में 14 में से पांच मामलों के निष्पादन की जानकारी दी गई। शेष नौ मामले पारा मेडिकल संस्थान, रेफरल अस्पताल, घोसी के विद्यार्थियों से जुड़े हैं। डीएम ने सिविल सर्जन को शिक्षकों की व्यवस्था कर नियमित पठन-पाठन और प्रशिक्षण सुनिश्चित करने तथा लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन कराने का निर्देश दिया।
संकल्प-हर घर नल का जल योजना के तहत औचक निरीक्षण में 76 पंचायतों के 589 वार्डों की जांच की गई। इनमें 545 वार्डों में जलापूर्ति क्रियाशील, जबकि 44 वार्डों में व्यवस्था अक्रियाशील मिली। डीएम ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता को अक्रियाशील वार्डों में प्राथमिकता के आधार पर जलापूर्ति बहाल कराने तथा लंबित निरीक्षण प्रतिवेदन तत्काल उपलब्ध कराने को कहा।
डीएम ने स्पष्ट कहा कि आमजन की शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। केवल पोर्टल पर मामले को बंद कर देना पर्याप्त नहीं है। शिकायतों का वास्तविक समाधान धरातल पर दिखना चाहिए। बैठक में संबंधित विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी मौजूद थे।