राष्ट्रीय हिंदी दिवस पर जिलाधिकारी श्री विक्रम विरकर ने कहा कि हिंदी के विकास के लिए अपनी स्थानीय बोलियों के प्रति प्रेम और सम्मान आवश्यक है। उन्होंने मैथिली, मगही एवं अंगिका का उदाहरण देते हुए कहा कि “बोलियां नदियों की तरह हैं और भाषा सागर की तरह; जब तक बोलियां समृद्ध नहीं होंगी, भाषा भी समृद्ध नहीं हो सकती।” अपनी बोली से जुड़ाव हमारी पहचान है।