अब नए अंदाज़ में दिखेगा पडरौना का कृष्णा टॉकीज, जल्द ही शुरू होगा मल्टीप्लेक्स सिनेमा का निर्माण
पडरौना का पहला सिनेमाघर कृष्णा टॉकीज 1956 में हुआ निर्माण 2026 में हुआ ध्वस्त, घाटे और सरकार की नीतियों को बताया कारण
दो वर्ष पूर्व यूपी सरकार ने प्रदेश में बंद पड़े सिंगल स्क्रीन वाले सिनेमाघरों को तोड़कर सिनेमा घर के साथ व्यावसायिक कांप्लेक्स और मल्टीप्लेक्स बनाने की बनाई थी नीति
पडरौना नगर के मनोरंजन इतिहास का गवाह रहा *कृष्णा टॉकीज* एक बार फिर से चर्चा में है। 1956 में जिसका निर्माण शुरू हुआ और 1964 में जो लोगों के मनोरंजन के लिए खुला, वह सिनेमा हॉल अब नए रूप में लौटने जा रहा है।
*बंगालियों ने की थी पहली दुर्गा पूजा, पहली फिल्म थी 'श्री गणेश'*
जानकारों के अनुसार इस सिनेमा हॉल परिसर में सबसे पहले बंगाली समाज के लोगों ने दुर्गा जी की मूर्ति की स्थापना की थी, जो बाद में श्याम जी के कटरा में चली गई। इस टॉकीज में सबसे पहली फिल्म *'श्री गणेश'* लगी थी। इसके संचालक *स्वर्गीय श्री कृष्ण प्रसाद पुत्र स्वर्गीय बिंदेश्वरी जायसवाल जी* थे।
*1992 के बाद पुत्रों ने संभाला, 2010 में बंद हुआ*
1992 में स्वर्गीय श्रीकृष्ण प्रसाद जी के निधन के बाद उनके पुत्रों ने इस सिनेमा घर की कमान संभाली और 2010 तक इसे पडरौना वासियों के लिए मनोरंजन का प्रमुख केंद्र बनाए रखा। लेकिन सरकार की उदासीनता, मल्टीप्लेक्स के दौर और व्यापार घाटे में जाने के कारण यह ऐतिहासिक टॉकीज बंद हो गया।
*अब नए अवतार में लौटेगा कृष्णा टॉकीज*
अब एक बार फिर इस विरासत को नया जीवन मिलने जा रहा है। पुराने जर्जर भवन को तोड़कर वहां नया अत्याधुनिक व्यावसायिक परिसर बनाया जाएगा, जिसमें एक बार फिर से सिनेमा हॉल की सुविधा होगी।
नए परिसर के संचालक *डॉ. सचिन पुत्र स्वर्गीय श्रीकृष्ण प्रसाद* होंगे। नए सिनेमाघर का नाम भी *कृष्ण टॉकीज* ही रखा जाएगा। नए अंदाज, आधुनिक सुविधाओं और नए स्वरूप में यह टॉकीज पडरौना में फिल्मों और मनोरंजन के क्षेत्र में एक नया आयाम साबित होगा।
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