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UCC पर CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान, बोले- "रामचंद्र एक शादी करता है, तो रहीम से भी एक ही शादी की अपेक्षा वर्षाकालीन विधानसभा सत्र में UCC विधेयक लाने की तैयारी "सभी नागरिकों के लिए समान कानून" लागू करने की दिशा में सरकार आगे 10 लाख से अधिक लोगों के सुझावों के आधार पर तैयार हुआ मसौदा कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर रामचंद्र एक शादी करता है, तो रहीम से भी एक ही शादी की अपेक्षा की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार वर्षाकालीन विधानसभा सत्र में UCC विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानून सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं सहित सभी महिलाओं को समान अधिकार और न्याय मिलना चाहिए। सीएम ने बताया कि सरकार ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। समिति ने प्रदेशभर में व्यापक जनसंवाद कर 10 लाख से अधिक नागरिकों के सुझाव प्राप्त किए, जिनके आधार पर विधेयक का मसौदा तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी संवेदनशील मुद्दों पर वोट बैंक की राजनीति करती रही है। उन्होंने कहा कि भोजशाला मामले में सरकार न्यायालय के निर्णय का सम्मान करेगी और UCC को लेकर प्रदेश सरकार अपने संकल्प पर आगे बढ़ रही है। अब सभी की नजरें मध्य प्रदेश विधानसभा के वर्षाकालीन सत्र पर टिकी हैं, जहां सरकार समान नागरिक संहिता विधेयक पेश कर सकती है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो मध्य प्रदेश UCC लागू करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा। #UCC #UniformCivilCode #MohanYadav #MadhyaPradesh #MPAssembly #BreakingNews #NationalNews #PoliticalNews #OneNationOneLaw #Halchal24News #TrendingNews #IndiaNews

Dindori, Dindori | Jul 15, 2026

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गांव की बहू बनी नौनिहालों की ‘मैडम’, बच्चों का भविष्य संवारनेमें जुटी पार्वती

सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है, लेकिन डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड के ग्राम पंचायत बरनर्ई के भीतर टोला में एक गांव की बहू ने शिक्षा के प्रति ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज के लिए प्रेरणादायक बन गई है। यहां सेटेलाइट प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक या शिक्षिका किसी कारणवश स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं या आने में देरी हो जाती है, तो गांव की बहू पार्वती मरावी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाल लेती हैं।

स्कूल के समीप रहने वाली पार्वती 12वीं तक पढ़ी हैं। उनका अपना बच्चा भी इसी स्कूल में अध्ययनरत है। बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसी सोच के साथ पार्वती स्कूल पहुंचती हैं और अपने बच्चे के साथ-साथ कक्षा के अन्य नौनिहालों को भी पढ़ाती हैं।

बच्चों की नींव मजबूत करना है मकसद

पार्वती का कहना है कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मजबूत होगी तो आगे की पढ़ाई में उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसी सोच के साथ वह बच्चों को समय देकर उन्हें पढ़ाने का प्रयास करती हैं। उनके लिए यह किसी नौकरी या पद का हिस्सा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी है।

पार्वती के इस जज्बे की ग्रामीण भी सराहना कर रहे हैं। खास बात यह है कि स्कूल के नन्हे बच्चे भी उन्हें प्यार से ‘मैडम’ कहकर बुलाते हैं। बच्चों का कहना है कि पार्वती मैडम उन्हें अच्छी तरह पढ़ाती हैं और उनके पढ़ाने से उन्हें पढ़ाई में खुशी मिलती है।

न पद की चाह, न वेतन की उम्मीद

पार्वती मरावी के इस प्रयास की सबसे खास बात यह है कि वह न तो स्कूल में शिक्षिका के पद पर हैं और न ही उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई वेतन मिलता है। इसके बावजूद वह जरूरत के समय बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेती हैं।

पार्वती की यह पहल बताती है कि किसी बच्चे के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए केवल सरकारी व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। गांव की एक साधारण बहू द्वारा उठाया गया यह कदम शिक्षा के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी की एक मिसाल बनकर सामने आया है।

बच्चों के बीच ‘मैडम’ के नाम से पहचान बनाने वाली पार्वती मरावी का यह प्रयास निश्चित तौर पर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने आसपास के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में छोटी-सी भूमिका निभा सकते हैं।

#Dindori #DindoriNews #Karanzia #ParvatiMaravi #VillageTeacher #Education #EducationForAll #InspiringStory #WomenPower #NariShakti #GaonKiBahu #BachchonKaBhavishya #MPNews #MadhyaPradesh #JansamparkDigital Part 9

गांव की बहू बनी नौनिहालों की ‘मैडम’, बच्चों का भविष्य संवारनेमें जुटी पार्वती सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है, लेकिन डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड के ग्राम पंचायत बरनर्ई के भीतर टोला में एक गांव की बहू ने शिक्षा के प्रति ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज के लिए प्रेरणादायक बन गई है। यहां सेटेलाइट प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक या शिक्षिका किसी कारणवश स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं या आने में देरी हो जाती है, तो गांव की बहू पार्वती मरावी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाल लेती हैं। स्कूल के समीप रहने वाली पार्वती 12वीं तक पढ़ी हैं। उनका अपना बच्चा भी इसी स्कूल में अध्ययनरत है। बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसी सोच के साथ पार्वती स्कूल पहुंचती हैं और अपने बच्चे के साथ-साथ कक्षा के अन्य नौनिहालों को भी पढ़ाती हैं। बच्चों की नींव मजबूत करना है मकसद पार्वती का कहना है कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मजबूत होगी तो आगे की पढ़ाई में उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसी सोच के साथ वह बच्चों को समय देकर उन्हें पढ़ाने का प्रयास करती हैं। उनके लिए यह किसी नौकरी या पद का हिस्सा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी है। पार्वती के इस जज्बे की ग्रामीण भी सराहना कर रहे हैं। खास बात यह है कि स्कूल के नन्हे बच्चे भी उन्हें प्यार से ‘मैडम’ कहकर बुलाते हैं। बच्चों का कहना है कि पार्वती मैडम उन्हें अच्छी तरह पढ़ाती हैं और उनके पढ़ाने से उन्हें पढ़ाई में खुशी मिलती है। न पद की चाह, न वेतन की उम्मीद पार्वती मरावी के इस प्रयास की सबसे खास बात यह है कि वह न तो स्कूल में शिक्षिका के पद पर हैं और न ही उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई वेतन मिलता है। इसके बावजूद वह जरूरत के समय बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेती हैं। पार्वती की यह पहल बताती है कि किसी बच्चे के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए केवल सरकारी व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। गांव की एक साधारण बहू द्वारा उठाया गया यह कदम शिक्षा के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी की एक मिसाल बनकर सामने आया है। बच्चों के बीच ‘मैडम’ के नाम से पहचान बनाने वाली पार्वती मरावी का यह प्रयास निश्चित तौर पर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने आसपास के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में छोटी-सी भूमिका निभा सकते हैं। #Dindori #DindoriNews #Karanzia #ParvatiMaravi #VillageTeacher #Education #EducationForAll #InspiringStory #WomenPower #NariShakti #GaonKiBahu #BachchonKaBhavishya #MPNews #MadhyaPradesh #JansamparkDigital Part 9

Dindori, Dindori | Aug 13, 2026

गांव की बहू बनी नौनिहालों की ‘मैडम’, बच्चों का भविष्य संवारनेमें जुटी पार्वती

सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है, लेकिन डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड के ग्राम पंचायत बरनर्ई के भीतर टोला में एक गांव की बहू ने शिक्षा के प्रति ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज के लिए प्रेरणादायक बन गई है। यहां सेटेलाइट प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक या शिक्षिका किसी कारणवश स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं या आने में देरी हो जाती है, तो गांव की बहू पार्वती मरावी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाल लेती हैं।

स्कूल के समीप रहने वाली पार्वती 12वीं तक पढ़ी हैं। उनका अपना बच्चा भी इसी स्कूल में अध्ययनरत है। बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसी सोच के साथ पार्वती स्कूल पहुंचती हैं और अपने बच्चे के साथ-साथ कक्षा के अन्य नौनिहालों को भी पढ़ाती हैं।

बच्चों की नींव मजबूत करना है मकसद

पार्वती का कहना है कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मजबूत होगी तो आगे की पढ़ाई में उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसी सोच के साथ वह बच्चों को समय देकर उन्हें पढ़ाने का प्रयास करती हैं। उनके लिए यह किसी नौकरी या पद का हिस्सा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी है।

पार्वती के इस जज्बे की ग्रामीण भी सराहना कर रहे हैं। खास बात यह है कि स्कूल के नन्हे बच्चे भी उन्हें प्यार से ‘मैडम’ कहकर बुलाते हैं। बच्चों का कहना है कि पार्वती मैडम उन्हें अच्छी तरह पढ़ाती हैं और उनके पढ़ाने से उन्हें पढ़ाई में खुशी मिलती है।

न पद की चाह, न वेतन की उम्मीद

पार्वती मरावी के इस प्रयास की सबसे खास बात यह है कि वह न तो स्कूल में शिक्षिका के पद पर हैं और न ही उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई वेतन मिलता है। इसके बावजूद वह जरूरत के समय बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेती हैं।

पार्वती की यह पहल बताती है कि किसी बच्चे के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए केवल सरकारी व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। गांव की एक साधारण बहू द्वारा उठाया गया यह कदम शिक्षा के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी की एक मिसाल बनकर सामने आया है।

बच्चों के बीच ‘मैडम’ के नाम से पहचान बनाने वाली पार्वती मरावी का यह प्रयास निश्चित तौर पर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने आसपास के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में छोटी-सी भूमिका निभा सकते हैं।

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गांव की बहू बनी नौनिहालों की ‘मैडम’, बच्चों का भविष्य संवारनेमें जुटी पार्वती सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है, लेकिन डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड के ग्राम पंचायत बरनर्ई के भीतर टोला में एक गांव की बहू ने शिक्षा के प्रति ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज के लिए प्रेरणादायक बन गई है। यहां सेटेलाइट प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक या शिक्षिका किसी कारणवश स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं या आने में देरी हो जाती है, तो गांव की बहू पार्वती मरावी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाल लेती हैं। स्कूल के समीप रहने वाली पार्वती 12वीं तक पढ़ी हैं। उनका अपना बच्चा भी इसी स्कूल में अध्ययनरत है। बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसी सोच के साथ पार्वती स्कूल पहुंचती हैं और अपने बच्चे के साथ-साथ कक्षा के अन्य नौनिहालों को भी पढ़ाती हैं। बच्चों की नींव मजबूत करना है मकसद पार्वती का कहना है कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मजबूत होगी तो आगे की पढ़ाई में उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसी सोच के साथ वह बच्चों को समय देकर उन्हें पढ़ाने का प्रयास करती हैं। उनके लिए यह किसी नौकरी या पद का हिस्सा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी है। पार्वती के इस जज्बे की ग्रामीण भी सराहना कर रहे हैं। खास बात यह है कि स्कूल के नन्हे बच्चे भी उन्हें प्यार से ‘मैडम’ कहकर बुलाते हैं। बच्चों का कहना है कि पार्वती मैडम उन्हें अच्छी तरह पढ़ाती हैं और उनके पढ़ाने से उन्हें पढ़ाई में खुशी मिलती है। न पद की चाह, न वेतन की उम्मीद पार्वती मरावी के इस प्रयास की सबसे खास बात यह है कि वह न तो स्कूल में शिक्षिका के पद पर हैं और न ही उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई वेतन मिलता है। इसके बावजूद वह जरूरत के समय बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेती हैं। पार्वती की यह पहल बताती है कि किसी बच्चे के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए केवल सरकारी व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। गांव की एक साधारण बहू द्वारा उठाया गया यह कदम शिक्षा के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी की एक मिसाल बनकर सामने आया है। बच्चों के बीच ‘मैडम’ के नाम से पहचान बनाने वाली पार्वती मरावी का यह प्रयास निश्चित तौर पर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने आसपास के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में छोटी-सी भूमिका निभा सकते हैं। #Dindori #DindoriNews #Karanzia #ParvatiMaravi #VillageTeacher #Education #EducationForAll #InspiringStory #WomenPower #NariShakti #GaonKiBahu #BachchonKaBhavishya #MPNews #MadhyaPradesh #JansamparkDigital Part 8

Dindori, Dindori | Aug 13, 2026

गांव की बहू बनी नौनिहालों की ‘मैडम’, बच्चों का भविष्य संवारनेमें जुटी पार्वती

सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है, लेकिन डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड के ग्राम पंचायत बरनर्ई के भीतर टोला में एक गांव की बहू ने शिक्षा के प्रति ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज के लिए प्रेरणादायक बन गई है। यहां सेटेलाइट प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक या शिक्षिका किसी कारणवश स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं या आने में देरी हो जाती है, तो गांव की बहू पार्वती मरावी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाल लेती हैं।

स्कूल के समीप रहने वाली पार्वती 12वीं तक पढ़ी हैं। उनका अपना बच्चा भी इसी स्कूल में अध्ययनरत है। बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसी सोच के साथ पार्वती स्कूल पहुंचती हैं और अपने बच्चे के साथ-साथ कक्षा के अन्य नौनिहालों को भी पढ़ाती हैं।

बच्चों की नींव मजबूत करना है मकसद

पार्वती का कहना है कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मजबूत होगी तो आगे की पढ़ाई में उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसी सोच के साथ वह बच्चों को समय देकर उन्हें पढ़ाने का प्रयास करती हैं। उनके लिए यह किसी नौकरी या पद का हिस्सा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी है।

पार्वती के इस जज्बे की ग्रामीण भी सराहना कर रहे हैं। खास बात यह है कि स्कूल के नन्हे बच्चे भी उन्हें प्यार से ‘मैडम’ कहकर बुलाते हैं। बच्चों का कहना है कि पार्वती मैडम उन्हें अच्छी तरह पढ़ाती हैं और उनके पढ़ाने से उन्हें पढ़ाई में खुशी मिलती है।

न पद की चाह, न वेतन की उम्मीद

पार्वती मरावी के इस प्रयास की सबसे खास बात यह है कि वह न तो स्कूल में शिक्षिका के पद पर हैं और न ही उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई वेतन मिलता है। इसके बावजूद वह जरूरत के समय बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेती हैं।

पार्वती की यह पहल बताती है कि किसी बच्चे के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए केवल सरकारी व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। गांव की एक साधारण बहू द्वारा उठाया गया यह कदम शिक्षा के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी की एक मिसाल बनकर सामने आया है।

बच्चों के बीच ‘मैडम’ के नाम से पहचान बनाने वाली पार्वती मरावी का यह प्रयास निश्चित तौर पर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने आसपास के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में छोटी-सी भूमिका निभा सकते हैं।

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गांव की बहू बनी नौनिहालों की ‘मैडम’, बच्चों का भविष्य संवारनेमें जुटी पार्वती सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है, लेकिन डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड के ग्राम पंचायत बरनर्ई के भीतर टोला में एक गांव की बहू ने शिक्षा के प्रति ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज के लिए प्रेरणादायक बन गई है। यहां सेटेलाइट प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक या शिक्षिका किसी कारणवश स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं या आने में देरी हो जाती है, तो गांव की बहू पार्वती मरावी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाल लेती हैं। स्कूल के समीप रहने वाली पार्वती 12वीं तक पढ़ी हैं। उनका अपना बच्चा भी इसी स्कूल में अध्ययनरत है। बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसी सोच के साथ पार्वती स्कूल पहुंचती हैं और अपने बच्चे के साथ-साथ कक्षा के अन्य नौनिहालों को भी पढ़ाती हैं। बच्चों की नींव मजबूत करना है मकसद पार्वती का कहना है कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मजबूत होगी तो आगे की पढ़ाई में उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसी सोच के साथ वह बच्चों को समय देकर उन्हें पढ़ाने का प्रयास करती हैं। उनके लिए यह किसी नौकरी या पद का हिस्सा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी है। पार्वती के इस जज्बे की ग्रामीण भी सराहना कर रहे हैं। खास बात यह है कि स्कूल के नन्हे बच्चे भी उन्हें प्यार से ‘मैडम’ कहकर बुलाते हैं। बच्चों का कहना है कि पार्वती मैडम उन्हें अच्छी तरह पढ़ाती हैं और उनके पढ़ाने से उन्हें पढ़ाई में खुशी मिलती है। न पद की चाह, न वेतन की उम्मीद पार्वती मरावी के इस प्रयास की सबसे खास बात यह है कि वह न तो स्कूल में शिक्षिका के पद पर हैं और न ही उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई वेतन मिलता है। इसके बावजूद वह जरूरत के समय बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेती हैं। पार्वती की यह पहल बताती है कि किसी बच्चे के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए केवल सरकारी व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। गांव की एक साधारण बहू द्वारा उठाया गया यह कदम शिक्षा के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी की एक मिसाल बनकर सामने आया है। बच्चों के बीच ‘मैडम’ के नाम से पहचान बनाने वाली पार्वती मरावी का यह प्रयास निश्चित तौर पर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने आसपास के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में छोटी-सी भूमिका निभा सकते हैं। #Dindori #DindoriNews #Karanzia #ParvatiMaravi #VillageTeacher #Education #EducationForAll #InspiringStory #WomenPower #NariShakti #GaonKiBahu #BachchonKaBhavishya #MPNews #MadhyaPradesh #JansamparkDigital Part 5

Dindori, Dindori | Aug 13, 2026

गांव की बहू बनी नौनिहालों की ‘मैडम’, बच्चों का भविष्य संवारनेमें जुटी पार्वती

सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है, लेकिन डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड के ग्राम पंचायत बरनर्ई के भीतर टोला में एक गांव की बहू ने शिक्षा के प्रति ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज के लिए प्रेरणादायक बन गई है। यहां सेटेलाइट प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक या शिक्षिका किसी कारणवश स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं या आने में देरी हो जाती है, तो गांव की बहू पार्वती मरावी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाल लेती हैं।

स्कूल के समीप रहने वाली पार्वती 12वीं तक पढ़ी हैं। उनका अपना बच्चा भी इसी स्कूल में अध्ययनरत है। बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसी सोच के साथ पार्वती स्कूल पहुंचती हैं और अपने बच्चे के साथ-साथ कक्षा के अन्य नौनिहालों को भी पढ़ाती हैं।

बच्चों की नींव मजबूत करना है मकसद

पार्वती का कहना है कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मजबूत होगी तो आगे की पढ़ाई में उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसी सोच के साथ वह बच्चों को समय देकर उन्हें पढ़ाने का प्रयास करती हैं। उनके लिए यह किसी नौकरी या पद का हिस्सा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी है।

पार्वती के इस जज्बे की ग्रामीण भी सराहना कर रहे हैं। खास बात यह है कि स्कूल के नन्हे बच्चे भी उन्हें प्यार से ‘मैडम’ कहकर बुलाते हैं। बच्चों का कहना है कि पार्वती मैडम उन्हें अच्छी तरह पढ़ाती हैं और उनके पढ़ाने से उन्हें पढ़ाई में खुशी मिलती है।

न पद की चाह, न वेतन की उम्मीद

पार्वती मरावी के इस प्रयास की सबसे खास बात यह है कि वह न तो स्कूल में शिक्षिका के पद पर हैं और न ही उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई वेतन मिलता है। इसके बावजूद वह जरूरत के समय बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेती हैं।

पार्वती की यह पहल बताती है कि किसी बच्चे के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए केवल सरकारी व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। गांव की एक साधारण बहू द्वारा उठाया गया यह कदम शिक्षा के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी की एक मिसाल बनकर सामने आया है।

बच्चों के बीच ‘मैडम’ के नाम से पहचान बनाने वाली पार्वती मरावी का यह प्रयास निश्चित तौर पर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने आसपास के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में छोटी-सी भूमिका निभा सकते हैं।

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गांव की बहू बनी नौनिहालों की ‘मैडम’, बच्चों का भविष्य संवारनेमें जुटी पार्वती सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है, लेकिन डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड के ग्राम पंचायत बरनर्ई के भीतर टोला में एक गांव की बहू ने शिक्षा के प्रति ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज के लिए प्रेरणादायक बन गई है। यहां सेटेलाइट प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक या शिक्षिका किसी कारणवश स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं या आने में देरी हो जाती है, तो गांव की बहू पार्वती मरावी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाल लेती हैं। स्कूल के समीप रहने वाली पार्वती 12वीं तक पढ़ी हैं। उनका अपना बच्चा भी इसी स्कूल में अध्ययनरत है। बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसी सोच के साथ पार्वती स्कूल पहुंचती हैं और अपने बच्चे के साथ-साथ कक्षा के अन्य नौनिहालों को भी पढ़ाती हैं। बच्चों की नींव मजबूत करना है मकसद पार्वती का कहना है कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मजबूत होगी तो आगे की पढ़ाई में उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसी सोच के साथ वह बच्चों को समय देकर उन्हें पढ़ाने का प्रयास करती हैं। उनके लिए यह किसी नौकरी या पद का हिस्सा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी है। पार्वती के इस जज्बे की ग्रामीण भी सराहना कर रहे हैं। खास बात यह है कि स्कूल के नन्हे बच्चे भी उन्हें प्यार से ‘मैडम’ कहकर बुलाते हैं। बच्चों का कहना है कि पार्वती मैडम उन्हें अच्छी तरह पढ़ाती हैं और उनके पढ़ाने से उन्हें पढ़ाई में खुशी मिलती है। न पद की चाह, न वेतन की उम्मीद पार्वती मरावी के इस प्रयास की सबसे खास बात यह है कि वह न तो स्कूल में शिक्षिका के पद पर हैं और न ही उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई वेतन मिलता है। इसके बावजूद वह जरूरत के समय बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेती हैं। पार्वती की यह पहल बताती है कि किसी बच्चे के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए केवल सरकारी व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। गांव की एक साधारण बहू द्वारा उठाया गया यह कदम शिक्षा के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी की एक मिसाल बनकर सामने आया है। बच्चों के बीच ‘मैडम’ के नाम से पहचान बनाने वाली पार्वती मरावी का यह प्रयास निश्चित तौर पर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने आसपास के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में छोटी-सी भूमिका निभा सकते हैं। #Dindori #DindoriNews #Karanzia #ParvatiMaravi #VillageTeacher #Education #EducationForAll #InspiringStory #WomenPower #NariShakti #GaonKiBahu #BachchonKaBhavishya #MPNews #MadhyaPradesh #JansamparkDigital Part 4

Dindori, Dindori | Aug 13, 2026

गांव की बहू बनी नौनिहालों की ‘मैडम’, बच्चों का भविष्य संवारनेमें जुटी पार्वती

सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है, लेकिन डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड के ग्राम पंचायत बरनर्ई के भीतर टोला में एक गांव की बहू ने शिक्षा के प्रति ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज के लिए प्रेरणादायक बन गई है। यहां सेटेलाइट प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक या शिक्षिका किसी कारणवश स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं या आने में देरी हो जाती है, तो गांव की बहू पार्वती मरावी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाल लेती हैं।

स्कूल के समीप रहने वाली पार्वती 12वीं तक पढ़ी हैं। उनका अपना बच्चा भी इसी स्कूल में अध्ययनरत है। बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसी सोच के साथ पार्वती स्कूल पहुंचती हैं और अपने बच्चे के साथ-साथ कक्षा के अन्य नौनिहालों को भी पढ़ाती हैं।

बच्चों की नींव मजबूत करना है मकसद

पार्वती का कहना है कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मजबूत होगी तो आगे की पढ़ाई में उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसी सोच के साथ वह बच्चों को समय देकर उन्हें पढ़ाने का प्रयास करती हैं। उनके लिए यह किसी नौकरी या पद का हिस्सा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी है।

पार्वती के इस जज्बे की ग्रामीण भी सराहना कर रहे हैं। खास बात यह है कि स्कूल के नन्हे बच्चे भी उन्हें प्यार से ‘मैडम’ कहकर बुलाते हैं। बच्चों का कहना है कि पार्वती मैडम उन्हें अच्छी तरह पढ़ाती हैं और उनके पढ़ाने से उन्हें पढ़ाई में खुशी मिलती है।

न पद की चाह, न वेतन की उम्मीद

पार्वती मरावी के इस प्रयास की सबसे खास बात यह है कि वह न तो स्कूल में शिक्षिका के पद पर हैं और न ही उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई वेतन मिलता है। इसके बावजूद वह जरूरत के समय बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेती हैं।

पार्वती की यह पहल बताती है कि किसी बच्चे के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए केवल सरकारी व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। गांव की एक साधारण बहू द्वारा उठाया गया यह कदम शिक्षा के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी की एक मिसाल बनकर सामने आया है।

बच्चों के बीच ‘मैडम’ के नाम से पहचान बनाने वाली पार्वती मरावी का यह प्रयास निश्चित तौर पर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने आसपास के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में छोटी-सी भूमिका निभा सकते हैं।

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गांव की बहू बनी नौनिहालों की ‘मैडम’, बच्चों का भविष्य संवारनेमें जुटी पार्वती सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है, लेकिन डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड के ग्राम पंचायत बरनर्ई के भीतर टोला में एक गांव की बहू ने शिक्षा के प्रति ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज के लिए प्रेरणादायक बन गई है। यहां सेटेलाइट प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक या शिक्षिका किसी कारणवश स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं या आने में देरी हो जाती है, तो गांव की बहू पार्वती मरावी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाल लेती हैं। स्कूल के समीप रहने वाली पार्वती 12वीं तक पढ़ी हैं। उनका अपना बच्चा भी इसी स्कूल में अध्ययनरत है। बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसी सोच के साथ पार्वती स्कूल पहुंचती हैं और अपने बच्चे के साथ-साथ कक्षा के अन्य नौनिहालों को भी पढ़ाती हैं। बच्चों की नींव मजबूत करना है मकसद पार्वती का कहना है कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मजबूत होगी तो आगे की पढ़ाई में उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसी सोच के साथ वह बच्चों को समय देकर उन्हें पढ़ाने का प्रयास करती हैं। उनके लिए यह किसी नौकरी या पद का हिस्सा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी है। पार्वती के इस जज्बे की ग्रामीण भी सराहना कर रहे हैं। खास बात यह है कि स्कूल के नन्हे बच्चे भी उन्हें प्यार से ‘मैडम’ कहकर बुलाते हैं। बच्चों का कहना है कि पार्वती मैडम उन्हें अच्छी तरह पढ़ाती हैं और उनके पढ़ाने से उन्हें पढ़ाई में खुशी मिलती है। न पद की चाह, न वेतन की उम्मीद पार्वती मरावी के इस प्रयास की सबसे खास बात यह है कि वह न तो स्कूल में शिक्षिका के पद पर हैं और न ही उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई वेतन मिलता है। इसके बावजूद वह जरूरत के समय बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेती हैं। पार्वती की यह पहल बताती है कि किसी बच्चे के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए केवल सरकारी व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। गांव की एक साधारण बहू द्वारा उठाया गया यह कदम शिक्षा के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी की एक मिसाल बनकर सामने आया है। बच्चों के बीच ‘मैडम’ के नाम से पहचान बनाने वाली पार्वती मरावी का यह प्रयास निश्चित तौर पर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने आसपास के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में छोटी-सी भूमिका निभा सकते हैं। #Dindori #DindoriNews #Karanzia #ParvatiMaravi #VillageTeacher #Education #EducationForAll #InspiringStory #WomenPower #NariShakti #GaonKiBahu #BachchonKaBhavishya #MPNews #MadhyaPradesh #JansamparkDigital Part 3

Dindori, Dindori | Aug 13, 2026