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DEEPAK NAMDEV

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शासकीय राशि जमा नहीं करने पर पूर्व सरपंच को 30 दिन का कारावास, जिला पंचायत ने दिए निर्देश

ग्राम पंचायत में सीसी रोड निर्माण से जुड़ी वित्तीय अनियमितता के मामले में जिला पंचायत ने सख्त रुख अपनाया है। जनपद पंचायत डिंडौरी की ग्राम पंचायत कसईसोंढा में निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत राशि में अनियमितता पाए जाने के बाद पूर्व सरपंच नोखेलाल परस्ते से 2 लाख 65 हजार रुपये की वसूली की कार्रवाई की जा रही है।

वर्ष 2021 में आदिवासी विकास परियोजना के तहत प्राथमिक शाला भवन से अनुसुईया के घर तक नीचे टोला में सीसी रोड निर्माण के लिए 9 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। इनमें से करीब 7 लाख रुपये का आहरण किया गया, लेकिन जांच में मौके पर लगभग 1.70 लाख रुपये का ही निर्माण कार्य पाया गया। जांच के बाद करीब 5.30 लाख रुपये की राशि के नियम विरुद्ध आहरण का मामला सामने आया।

मामले में मध्यप्रदेश पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 89 के तहत देयता निर्धारित की गई। पूर्व सचिव के हिस्से की 2.65 लाख रुपये की राशि 14 फरवरी 2025 को शासन के कोष में जमा कराई जा चुकी है।

वहीं पूर्व सरपंच नोखेलाल परस्ते के हिस्से की 2.65 लाख रुपये की राशि की वसूली के लिए अधिनियम की धारा 92 के तहत कार्रवाई की गई। उन्हें 29 जनवरी 2026 को अंतिम आदेश जारी कर 15 दिनों के भीतर राशि शासन के कोष में जमा करने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समय में राशि जमा नहीं होने पर अब जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी ने संबंधित अधिकारी को पूर्व सरपंच को अभिरक्षा में लेकर पकड़े जाने की तारीख से 30 दिनों की अवधि के लिए कारावास में रखने के निर्देश दिए हैं।

इस कार्रवाई के बाद पंचायत स्तर पर शासकीय राशि के उपयोग और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन की सख्ती सामने आई है। अब संबंधित राशि की वसूली और जिला पंचायत के निर्देश के पालन की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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“चंबल में बदली विकास की तस्वीर! मालनपुर में 450 करोड़ का निवेश, 600+ लोगों को रोजगार”

मध्यप्रदेश में निवेश को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की रणनीति अब सिर्फ निवेश प्रस्तावों और एमओयू तक सीमित नहीं है, बल्कि इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है। इसका ताजा उदाहरण भिंड के मालनपुर में देखने को मिला, जहां गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की नई एकीकृत विनिर्माण इकाई का शुभारंभ हुआ है।

करीब 450 करोड़ रुपए के अतिरिक्त निवेश से तैयार हुई इस नई यूनिट से 600 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। खास बात ये है कि मालनपुर में शुरू हुई ये सुविधा अब एशिया की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड सोप मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बन गई है, जहां हर मिनट करीब 4 हजार साबुन तैयार किए जा सकेंगे।

गोदरेज का मध्यप्रदेश से रिश्ता भी करीब 35 साल पुराना है। वर्ष 1991 में मालनपुर में पहली यूनिट से शुरू हुआ ये सफर अब विस्तार के साथ एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब में बदल चुका है। कंपनी के मुताबिक मालनपुर में अब तक करीब 850 करोड़ रुपए का निवेश हो चुका है और नई यूनिट के बाद यहां कर्मचारियों की संख्या करीब 2200 से बढ़कर 2800 तक पहुंचने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मौके पर चंबल के बदलते स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहा कि जिस चंबल की पहचान कभी बीहड़ों और दस्यु समस्या से होती थी, वही चंबल अब उद्योग, निवेश और रोजगार की नई पहचान बना रहा है।

सरकार के मुताबिक जीआईएस-2025 में मिले 30 लाख 77 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों में से 30 फीसदी से ज्यादा अब जमीन पर उतर चुके हैं, जबकि करीब 10 लाख करोड़ रुपए की औद्योगिक इकाइयां मूर्त रूप ले रही हैं। मध्यप्रदेश से करीब 76 हजार करोड़ रुपए के उत्पादों का निर्यात भी अब विदेशों तक हो रहा है।

और यही तस्वीर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उस औद्योगिक नीति को सामने रखती है, जिसमें निवेशकों को मध्यप्रदेश बुलाने के साथ-साथ निवेश को फैक्ट्री, उत्पादन और रोजगार में बदलने पर जोर है। ग्वालियर-चंबल में करीब दो महीने के भीतर तीसरी बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का शुभारंभ इसी बदलते औद्योगिक मध्यप्रदेश की कहानी कह रहा है।

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रक्षाबंधन से पहले मिठाई दुकानों पर प्रशासन की छापेमारी, 54 किलो संदिग्ध मिठाई नष्ट

उमरिया में रक्षाबंधन के त्योहार से पहले खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने मिठाई दुकानों के खिलाफ जांच अभियान तेज कर दिया है। बुधवार को खाद्य सुरक्षा एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के विभिन्न प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की।

गांधी चौक के पास स्थित शिवालय होटल की जांच के दौरान टीम को करीब 54 किलो संदिग्ध सिंथेटिक मिठाई मिली। खाद्य सामग्री के निर्माण और भंडारण में अनियमितताएं पाए जाने पर विभाग ने मिठाई को जब्त कर उसका विनिष्टीकरण कराया। इसके साथ ही प्रतिष्ठान को तीन दिन के लिए सील कर दिया गया।

राजा स्वीट्स से लिए गए नमूने

शिवालय होटल के बाद जांच टीम संजय मार्केट स्थित राजा स्वीट्स पहुंची। यहां मिठाइयों और मेवों की जांच करते हुए अलग-अलग खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए। इन नमूनों को गुणवत्ता की जांच के लिए भोपाल स्थित प्रयोगशाला भेजा जाएगा। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

त्योहार तक जारी रहेगा जांच अभियान

खाद्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक रक्षाबंधन को देखते हुए शहर में मिलावटी खोवा, सिंथेटिक मिठाई, नकली मेवे और अमानक खाद्य सामग्री की बिक्री पर निगरानी बढ़ाई गई है। आने वाले दिनों में अन्य मिठाई प्रतिष्ठानों की भी जांच की जाएगी।

प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब मिठाई कारोबारियों में भी हड़कंप है। वहीं त्योहार के दौरान बाजार से मिठाई खरीदने वाले उपभोक्ताओं की नजर भी खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर बनी हुई है।

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डिंडौरी में शान-ओ-शौकत से निकला जश्ने ईद मिलादुन्नबी का जुलूस, दिया अमन और भाईचारे का संदेश

जश्ने ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर डिंडौरी में बुधवार को अकीदत और एहतराम के साथ भव्य जुलूस निकाला गया। हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिवस के मौके पर आयोजित जुलूस में बड़ी संख्या में बच्चे, युवा और समाज के लोग शामिल हुए।

जुलूस की शुरुआत सुबखार स्थित पंजतन पाक मस्जिद से हुई। हाथों में झंडे लिए बच्चे जुलूस में सबसे आगे नजर आए। जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट चौराहे तक पहुंचा। इस दौरान नात और मनकबत के साथ जुलूस शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ता रहा।

जगह-जगह स्थानीय लोगों ने जुलूस का स्वागत किया। इसके बाद जुलूस निर्धारित मार्ग से होते हुए जामा मस्जिद, डिंडौरी पहुंचा, जहां सलातो-सलाम पेश किया गया। इस दौरान देश में अमन, भाईचारे और एकता के लिए विशेष दुआ की गई।

जुलूस के बाद स्वच्छता का संदेश

ईद मिलादुन्नबी के आयोजन में धार्मिक सौहार्द के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की तस्वीर भी देखने को मिली। जुलूस समाप्त होने के बाद समुदाय के लोगों ने मुख्य मार्गों की सफाई कराई, ताकि सड़कों पर गंदगी न रहे और आम लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना न करना पड़े।

डिंडौरी में आयोजित जश्ने ईद मिलादुन्नबी का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ अमन, भाईचारे, एकता और स्वच्छता का संदेश देता नजर आया।

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सूचना देने वाले ही पुलिस के शक के घेरे में! ग्रामीणों ने लगाया परेशान करने का आरोप

अज्ञात कार से गांजा बरामदगी के बाद ग्रामीणों से पूछताछ, एसपी कार्यालय पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग

डिंडौरी जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम तेंदुमेर मोहत्तरा में अज्ञात कार से गांजा बरामदगी का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस संदिग्ध कार की सूचना उन्होंने पुलिस को दी थी, उसी मामले में अब पुलिस उन्हें बार-बार पूछताछ के लिए थाने बुला रही है। ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों ने दी थी संदिग्ध कार की सूचना

ग्रामीणों के मुताबिक 6 अगस्त 2026 को गांव में एक अज्ञात लग्जरी कार खड़ी दिखाई दी थी। संदिग्ध वाहन देखकर ग्रामीणों ने डायल-112 को सूचना दी। इसके बाद शाहपुर थाना प्रभारी को भी वाहन के संबंध में जानकारी दी गई।

ग्रामीणों का दावा है कि सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची और वाहन की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कार से करीब चार किलो गांजा बरामद होने की बात सामने आई।

करीब आठ ग्रामीणों से पूछताछ का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि गांजा बरामदगी के बाद गांव के करीब आठ लोगों को पूछताछ के नाम पर बार-बार थाने बुलाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें घंटों थाने में बैठना पड़ रहा है, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं।

ग्रामीणों के अनुसार पूछताछ के दौरान कार की बैटरी, स्टेपनी, गांजा और कथित तौर पर करीब ढाई लाख रुपये को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं।

ढाई लाख रुपये और सामान को लेकर उठे सवाल

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब उन्होंने पुलिस को सिर्फ अज्ञात कार खड़ी होने की सूचना दी थी, तो वाहन में कथित रूप से मौजूद ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी के संबंध में पुलिस को जानकारी किस स्रोत से मिली?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन सामानों को लेकर पुलिस के पास कोई ठोस साक्ष्य है तो जांच में उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। वहीं ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि केवल संदेह के आधार पर उन्हें परेशान नहीं किया जाए।

एसपी कार्यालय पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

पुलिस की कथित पूछताछ से परेशान ग्रामीण मंगलवार को डिंडौरी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के नाम शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किए जाने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने संदिग्ध वाहन की जानकारी देकर पुलिस की मदद की थी। ऐसे में अब उन्हीं ग्रामीणों के बार-बार पूछताछ के घेरे में आने से गांव में भय का माहौल बना हुआ है।

जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल गांजा बरामदगी के मामले में पुलिस की जांच जारी है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी को लेकर पुलिस के पास क्या जानकारी या साक्ष्य है और ग्रामीणों से पूछताछ किस आधार पर की जा रही है।

अब पूरे मामले में निगाह वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर है। क्या ग्रामीण महज सूचना देने वाले थे या पुलिस की जांच में उनकी कोई भूमिका सामने आई है? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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सूचना देने वाले ही पुलिस के शक के घेरे में! ग्रामीणों ने लगाया परेशान करने का आरोप

अज्ञात कार से गांजा बरामदगी के बाद ग्रामीणों से पूछताछ, एसपी कार्यालय पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग

डिंडौरी जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम तेंदुमेर मोहत्तरा में अज्ञात कार से गांजा बरामदगी का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस संदिग्ध कार की सूचना उन्होंने पुलिस को दी थी, उसी मामले में अब पुलिस उन्हें बार-बार पूछताछ के लिए थाने बुला रही है। ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों ने दी थी संदिग्ध कार की सूचना

ग्रामीणों के मुताबिक 6 अगस्त 2026 को गांव में एक अज्ञात लग्जरी कार खड़ी दिखाई दी थी। संदिग्ध वाहन देखकर ग्रामीणों ने डायल-112 को सूचना दी। इसके बाद शाहपुर थाना प्रभारी को भी वाहन के संबंध में जानकारी दी गई।

ग्रामीणों का दावा है कि सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची और वाहन की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कार से करीब चार किलो गांजा बरामद होने की बात सामने आई।

करीब आठ ग्रामीणों से पूछताछ का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि गांजा बरामदगी के बाद गांव के करीब आठ लोगों को पूछताछ के नाम पर बार-बार थाने बुलाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें घंटों थाने में बैठना पड़ रहा है, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं।

ग्रामीणों के अनुसार पूछताछ के दौरान कार की बैटरी, स्टेपनी, गांजा और कथित तौर पर करीब ढाई लाख रुपये को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं।

ढाई लाख रुपये और सामान को लेकर उठे सवाल

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब उन्होंने पुलिस को सिर्फ अज्ञात कार खड़ी होने की सूचना दी थी, तो वाहन में कथित रूप से मौजूद ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी के संबंध में पुलिस को जानकारी किस स्रोत से मिली?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन सामानों को लेकर पुलिस के पास कोई ठोस साक्ष्य है तो जांच में उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। वहीं ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि केवल संदेह के आधार पर उन्हें परेशान नहीं किया जाए।

एसपी कार्यालय पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

पुलिस की कथित पूछताछ से परेशान ग्रामीण मंगलवार को डिंडौरी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के नाम शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किए जाने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने संदिग्ध वाहन की जानकारी देकर पुलिस की मदद की थी। ऐसे में अब उन्हीं ग्रामीणों के बार-बार पूछताछ के घेरे में आने से गांव में भय का माहौल बना हुआ है।

जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल गांजा बरामदगी के मामले में पुलिस की जांच जारी है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी को लेकर पुलिस के पास क्या जानकारी या साक्ष्य है और ग्रामीणों से पूछताछ किस आधार पर की जा रही है।

अब पूरे मामले में निगाह वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर है। क्या ग्रामीण महज सूचना देने वाले थे या पुलिस की जांच में उनकी कोई भूमिका सामने आई है? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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सूचना देने वाले ही पुलिस के शक के घेरे में! ग्रामीणों ने लगाया परेशान करने का आरोप

अज्ञात कार से गांजा बरामदगी के बाद ग्रामीणों से पूछताछ, एसपी कार्यालय पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग

डिंडौरी जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम तेंदुमेर मोहत्तरा में अज्ञात कार से गांजा बरामदगी का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस संदिग्ध कार की सूचना उन्होंने पुलिस को दी थी, उसी मामले में अब पुलिस उन्हें बार-बार पूछताछ के लिए थाने बुला रही है। ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों ने दी थी संदिग्ध कार की सूचना

ग्रामीणों के मुताबिक 6 अगस्त 2026 को गांव में एक अज्ञात लग्जरी कार खड़ी दिखाई दी थी। संदिग्ध वाहन देखकर ग्रामीणों ने डायल-112 को सूचना दी। इसके बाद शाहपुर थाना प्रभारी को भी वाहन के संबंध में जानकारी दी गई।

ग्रामीणों का दावा है कि सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची और वाहन की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कार से करीब चार किलो गांजा बरामद होने की बात सामने आई।

करीब आठ ग्रामीणों से पूछताछ का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि गांजा बरामदगी के बाद गांव के करीब आठ लोगों को पूछताछ के नाम पर बार-बार थाने बुलाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें घंटों थाने में बैठना पड़ रहा है, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं।

ग्रामीणों के अनुसार पूछताछ के दौरान कार की बैटरी, स्टेपनी, गांजा और कथित तौर पर करीब ढाई लाख रुपये को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं।

ढाई लाख रुपये और सामान को लेकर उठे सवाल

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब उन्होंने पुलिस को सिर्फ अज्ञात कार खड़ी होने की सूचना दी थी, तो वाहन में कथित रूप से मौजूद ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी के संबंध में पुलिस को जानकारी किस स्रोत से मिली?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन सामानों को लेकर पुलिस के पास कोई ठोस साक्ष्य है तो जांच में उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। वहीं ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि केवल संदेह के आधार पर उन्हें परेशान नहीं किया जाए।

एसपी कार्यालय पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

पुलिस की कथित पूछताछ से परेशान ग्रामीण मंगलवार को डिंडौरी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के नाम शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किए जाने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने संदिग्ध वाहन की जानकारी देकर पुलिस की मदद की थी। ऐसे में अब उन्हीं ग्रामीणों के बार-बार पूछताछ के घेरे में आने से गांव में भय का माहौल बना हुआ है।

जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल गांजा बरामदगी के मामले में पुलिस की जांच जारी है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी को लेकर पुलिस के पास क्या जानकारी या साक्ष्य है और ग्रामीणों से पूछताछ किस आधार पर की जा रही है।

अब पूरे मामले में निगाह वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर है। क्या ग्रामीण महज सूचना देने वाले थे या पुलिस की जांच में उनकी कोई भूमिका सामने आई है? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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सूचना देने वाले ही पुलिस के शक के घेरे में! ग्रामीणों ने लगाया परेशान करने का आरोप

अज्ञात कार से गांजा बरामदगी के बाद ग्रामीणों से पूछताछ, एसपी कार्यालय पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग

डिंडौरी जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम तेंदुमेर मोहत्तरा में अज्ञात कार से गांजा बरामदगी का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस संदिग्ध कार की सूचना उन्होंने पुलिस को दी थी, उसी मामले में अब पुलिस उन्हें बार-बार पूछताछ के लिए थाने बुला रही है। ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों ने दी थी संदिग्ध कार की सूचना

ग्रामीणों के मुताबिक 6 अगस्त 2026 को गांव में एक अज्ञात लग्जरी कार खड़ी दिखाई दी थी। संदिग्ध वाहन देखकर ग्रामीणों ने डायल-112 को सूचना दी। इसके बाद शाहपुर थाना प्रभारी को भी वाहन के संबंध में जानकारी दी गई।

ग्रामीणों का दावा है कि सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची और वाहन की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कार से करीब चार किलो गांजा बरामद होने की बात सामने आई।

करीब आठ ग्रामीणों से पूछताछ का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि गांजा बरामदगी के बाद गांव के करीब आठ लोगों को पूछताछ के नाम पर बार-बार थाने बुलाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें घंटों थाने में बैठना पड़ रहा है, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं।

ग्रामीणों के अनुसार पूछताछ के दौरान कार की बैटरी, स्टेपनी, गांजा और कथित तौर पर करीब ढाई लाख रुपये को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं।

ढाई लाख रुपये और सामान को लेकर उठे सवाल

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब उन्होंने पुलिस को सिर्फ अज्ञात कार खड़ी होने की सूचना दी थी, तो वाहन में कथित रूप से मौजूद ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी के संबंध में पुलिस को जानकारी किस स्रोत से मिली?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन सामानों को लेकर पुलिस के पास कोई ठोस साक्ष्य है तो जांच में उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। वहीं ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि केवल संदेह के आधार पर उन्हें परेशान नहीं किया जाए।

एसपी कार्यालय पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

पुलिस की कथित पूछताछ से परेशान ग्रामीण मंगलवार को डिंडौरी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के नाम शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किए जाने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने संदिग्ध वाहन की जानकारी देकर पुलिस की मदद की थी। ऐसे में अब उन्हीं ग्रामीणों के बार-बार पूछताछ के घेरे में आने से गांव में भय का माहौल बना हुआ है।

जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल गांजा बरामदगी के मामले में पुलिस की जांच जारी है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी को लेकर पुलिस के पास क्या जानकारी या साक्ष्य है और ग्रामीणों से पूछताछ किस आधार पर की जा रही है।

अब पूरे मामले में निगाह वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर है। क्या ग्रामीण महज सूचना देने वाले थे या पुलिस की जांच में उनकी कोई भूमिका सामने आई है? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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सूचना देने वाले ही पुलिस के शक के घेरे में! ग्रामीणों ने लगाया परेशान करने का आरोप

अज्ञात कार से गांजा बरामदगी के बाद ग्रामीणों से पूछताछ, एसपी कार्यालय पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग

डिंडौरी जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम तेंदुमेर मोहत्तरा में अज्ञात कार से गांजा बरामदगी का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस संदिग्ध कार की सूचना उन्होंने पुलिस को दी थी, उसी मामले में अब पुलिस उन्हें बार-बार पूछताछ के लिए थाने बुला रही है। ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों ने दी थी संदिग्ध कार की सूचना

ग्रामीणों के मुताबिक 6 अगस्त 2026 को गांव में एक अज्ञात लग्जरी कार खड़ी दिखाई दी थी। संदिग्ध वाहन देखकर ग्रामीणों ने डायल-112 को सूचना दी। इसके बाद शाहपुर थाना प्रभारी को भी वाहन के संबंध में जानकारी दी गई।

ग्रामीणों का दावा है कि सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची और वाहन की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कार से करीब चार किलो गांजा बरामद होने की बात सामने आई।

करीब आठ ग्रामीणों से पूछताछ का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि गांजा बरामदगी के बाद गांव के करीब आठ लोगों को पूछताछ के नाम पर बार-बार थाने बुलाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें घंटों थाने में बैठना पड़ रहा है, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं।

ग्रामीणों के अनुसार पूछताछ के दौरान कार की बैटरी, स्टेपनी, गांजा और कथित तौर पर करीब ढाई लाख रुपये को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं।

ढाई लाख रुपये और सामान को लेकर उठे सवाल

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब उन्होंने पुलिस को सिर्फ अज्ञात कार खड़ी होने की सूचना दी थी, तो वाहन में कथित रूप से मौजूद ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी के संबंध में पुलिस को जानकारी किस स्रोत से मिली?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन सामानों को लेकर पुलिस के पास कोई ठोस साक्ष्य है तो जांच में उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। वहीं ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि केवल संदेह के आधार पर उन्हें परेशान नहीं किया जाए।

एसपी कार्यालय पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

पुलिस की कथित पूछताछ से परेशान ग्रामीण मंगलवार को डिंडौरी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के नाम शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किए जाने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने संदिग्ध वाहन की जानकारी देकर पुलिस की मदद की थी। ऐसे में अब उन्हीं ग्रामीणों के बार-बार पूछताछ के घेरे में आने से गांव में भय का माहौल बना हुआ है।

जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल गांजा बरामदगी के मामले में पुलिस की जांच जारी है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी को लेकर पुलिस के पास क्या जानकारी या साक्ष्य है और ग्रामीणों से पूछताछ किस आधार पर की जा रही है।

अब पूरे मामले में निगाह वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर है। क्या ग्रामीण महज सूचना देने वाले थे या पुलिस की जांच में उनकी कोई भूमिका सामने आई है? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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सूचना देने वाले ही पुलिस के शक के घेरे में! ग्रामीणों ने लगाया परेशान करने का आरोप

अज्ञात कार से गांजा बरामदगी के बाद ग्रामीणों से पूछताछ, एसपी कार्यालय पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग

डिंडौरी जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम तेंदुमेर मोहत्तरा में अज्ञात कार से गांजा बरामदगी का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस संदिग्ध कार की सूचना उन्होंने पुलिस को दी थी, उसी मामले में अब पुलिस उन्हें बार-बार पूछताछ के लिए थाने बुला रही है। ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों ने दी थी संदिग्ध कार की सूचना

ग्रामीणों के मुताबिक 6 अगस्त 2026 को गांव में एक अज्ञात लग्जरी कार खड़ी दिखाई दी थी। संदिग्ध वाहन देखकर ग्रामीणों ने डायल-112 को सूचना दी। इसके बाद शाहपुर थाना प्रभारी को भी वाहन के संबंध में जानकारी दी गई।

ग्रामीणों का दावा है कि सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची और वाहन की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कार से करीब चार किलो गांजा बरामद होने की बात सामने आई।

करीब आठ ग्रामीणों से पूछताछ का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि गांजा बरामदगी के बाद गांव के करीब आठ लोगों को पूछताछ के नाम पर बार-बार थाने बुलाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें घंटों थाने में बैठना पड़ रहा है, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं।

ग्रामीणों के अनुसार पूछताछ के दौरान कार की बैटरी, स्टेपनी, गांजा और कथित तौर पर करीब ढाई लाख रुपये को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं।

ढाई लाख रुपये और सामान को लेकर उठे सवाल

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब उन्होंने पुलिस को सिर्फ अज्ञात कार खड़ी होने की सूचना दी थी, तो वाहन में कथित रूप से मौजूद ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी के संबंध में पुलिस को जानकारी किस स्रोत से मिली?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन सामानों को लेकर पुलिस के पास कोई ठोस साक्ष्य है तो जांच में उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। वहीं ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि केवल संदेह के आधार पर उन्हें परेशान नहीं किया जाए।

एसपी कार्यालय पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

पुलिस की कथित पूछताछ से परेशान ग्रामीण मंगलवार को डिंडौरी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के नाम शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किए जाने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने संदिग्ध वाहन की जानकारी देकर पुलिस की मदद की थी। ऐसे में अब उन्हीं ग्रामीणों के बार-बार पूछताछ के घेरे में आने से गांव में भय का माहौल बना हुआ है।

जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल गांजा बरामदगी के मामले में पुलिस की जांच जारी है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी को लेकर पुलिस के पास क्या जानकारी या साक्ष्य है और ग्रामीणों से पूछताछ किस आधार पर की जा रही है।

अब पूरे मामले में निगाह वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर है। क्या ग्रामीण महज सूचना देने वाले थे या पुलिस की जांच में उनकी कोई भूमिका सामने आई है? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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लामटा में जश्न-ए-मिलादुन्नबी पर निकला भव्य जुलूस, उमड़ी भारी भीड़

बालाघाट पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन ईद मिलाद-उन-नबी के अवसर पर बालाघाट जिले के लामटा में बुधवार को भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस में मुस्लिम समाज के लोगों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में खासा उत्साह नजर आया।

पारंपरिक नारों और कलामों के साथ जुलूस लामटा के प्रमुख मार्गों से होते हुए मस्जिद पहुंचा। आयोजन को लेकर पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की गई।

मस्जिद पहुंचने के बाद नात-ए-पाक, तकरीर और सलातो-सलाम का आयोजन हुआ। इसके बाद लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।

इस अवसर पर स्थानीय नागरिकों ने देश में अमन-शांति, आपसी प्रेम और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक उल्लास के साथ सौहार्द का संदेश भी देखने को मिला।

रिपोर्ट @शिवम असाटी, हलचल 24 न्यूज, बालाघाट 
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सूचना देने वाले ही पुलिस के शक के घेरे में! ग्रामीणों ने लगाया परेशान करने का आरोप

अज्ञात कार से गांजा बरामदगी के बाद ग्रामीणों से पूछताछ, एसपी कार्यालय पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग

डिंडौरी जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम तेंदुमेर मोहत्तरा में अज्ञात कार से गांजा बरामदगी का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस संदिग्ध कार की सूचना उन्होंने पुलिस को दी थी, उसी मामले में अब पुलिस उन्हें बार-बार पूछताछ के लिए थाने बुला रही है। ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों ने दी थी संदिग्ध कार की सूचना

ग्रामीणों के मुताबिक 6 अगस्त 2026 को गांव में एक अज्ञात लग्जरी कार खड़ी दिखाई दी थी। संदिग्ध वाहन देखकर ग्रामीणों ने डायल-112 को सूचना दी। इसके बाद शाहपुर थाना प्रभारी को भी वाहन के संबंध में जानकारी दी गई।

ग्रामीणों का दावा है कि सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची और वाहन की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कार से करीब चार किलो गांजा बरामद होने की बात सामने आई।

करीब आठ ग्रामीणों से पूछताछ का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि गांजा बरामदगी के बाद गांव के करीब आठ लोगों को पूछताछ के नाम पर बार-बार थाने बुलाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें घंटों थाने में बैठना पड़ रहा है, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं।

ग्रामीणों के अनुसार पूछताछ के दौरान कार की बैटरी, स्टेपनी, गांजा और कथित तौर पर करीब ढाई लाख रुपये को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं।

ढाई लाख रुपये और सामान को लेकर उठे सवाल

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब उन्होंने पुलिस को सिर्फ अज्ञात कार खड़ी होने की सूचना दी थी, तो वाहन में कथित रूप से मौजूद ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी के संबंध में पुलिस को जानकारी किस स्रोत से मिली?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन सामानों को लेकर पुलिस के पास कोई ठोस साक्ष्य है तो जांच में उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। वहीं ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि केवल संदेह के आधार पर उन्हें परेशान नहीं किया जाए।

एसपी कार्यालय पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

पुलिस की कथित पूछताछ से परेशान ग्रामीण मंगलवार को डिंडौरी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के नाम शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किए जाने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने संदिग्ध वाहन की जानकारी देकर पुलिस की मदद की थी। ऐसे में अब उन्हीं ग्रामीणों के बार-बार पूछताछ के घेरे में आने से गांव में भय का माहौल बना हुआ है।

जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल गांजा बरामदगी के मामले में पुलिस की जांच जारी है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी को लेकर पुलिस के पास क्या जानकारी या साक्ष्य है और ग्रामीणों से पूछताछ किस आधार पर की जा रही है।

अब पूरे मामले में निगाह वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर है। क्या ग्रामीण महज सूचना देने वाले थे या पुलिस की जांच में उनकी कोई भूमिका सामने आई है? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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अब आपके पास है मौका अपने क्षेत्र की समस्या उठाने का ...तो देर किस बात की ...
दिशा बैठक में सांसद कुलस्ते सख्त, PMGSY अधिकारियों की अनुपस्थिति पर जताई नाराजगी

डब्ल्यूआरडी की विलंबित योजनाओं पर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश, राघवपुर की योजनाएं जल्द पूरी कराने पर जोर

डिंडौरी जिला विकास समन्वय एवं मूल्यांकन समिति (दिशा) की बैठक में क्षेत्रीय सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने विकास कार्यों की धीमी गति और अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर नाराजगी जताई। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में सांसद ने विभागवार योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को विकास एवं जनहित से जुड़े कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

बैठक में डिंडौरी विधायक ओमकार सिंह मरकाम, जिला पंचायत अध्यक्ष रूद्रेश परस्ते, कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया, पुलिस अधीक्षक आशीष खरे, जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी, डीएफओ अशोक सोलंकी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

PMGSY अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर सांसद नाराज

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के वरिष्ठ अधिकारियों के बैठक में उपस्थित नहीं होने पर सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण समीक्षा बैठकों में संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी है, ताकि योजनाओं की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की जा सके।

सांसद ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश देते हुए भविष्य की बैठकों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा।

विलंबित WRD योजनाओं पर मांगी जवाबदेही

जल संसाधन विभाग की योजनाओं के समय पर पूरा नहीं होने पर भी सांसद ने चिंता जताई। उन्होंने लंबित योजनाओं की वर्तमान प्रगति और देरी के कारणों की समीक्षा करने के निर्देश दिए।

संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर कार्य पूरा कराने, देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने और शासन को तत्काल अवगत कराने के निर्देश दिए गए। शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर नियमित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा गया।

राघवपुर क्षेत्र की योजनाओं में तेजी के निर्देश

सांसद ने राघवपुर क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं का क्रियान्वयन जल्द शुरू कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आमजन से जुड़ी योजनाओं में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और आवश्यक प्रक्रियाएं शीघ्र पूरी कर निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण कराया जाए।

NH-45 निर्माण में गुणवत्ता पर विशेष जोर

बैठक में जबलपुर-अमरकंटक राष्ट्रीय राजमार्ग-45 के कार्य की भी समीक्षा की गई। सांसद ने डीपीआर के अनुसार निर्धारित समय-सीमा में निर्माण कार्य पूरा करने और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।

साथ ही विद्यालय, महाविद्यालय और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंच मार्ग की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं की भी हुई समीक्षा

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान सांसद ने सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्रों का वरिष्ठ अधिकारियों से नियमित निरीक्षण कराने और आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने को कहा।

सांसद ने आयुष्मान योजना के तहत सभी पात्र हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड बनाने के निर्देश भी दिए।

बैठक में लोक निर्माण विभाग के वित्तीय वर्ष 2026-27 के मेंटेनेंस एवं निर्माण कार्यों की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके अलावा नगर निकाय, विद्युत, जल संसाधन, स्वास्थ्य और जिला पंचायत सहित विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई।

सांसद कुलस्ते ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

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उचित मूल्य दुकान में अव्यवस्था के आरोप, राशन के लिए कई दिनों तक कतार में लगने को मजबूर ग्रामीण

पड़रिया कला की सरकारी राशन दुकान में मनमानी का आरोप, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की

डिंडौरी जिला मुख्यालय से महज 16 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत पड़रिया कला की शासकीय उचित मूल्य दुकान में अव्यवस्थाओं और कथित मनमानी का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने दुकान के सेल्समैन और वहां मौजूद कर्मचारियों पर हितग्राहियों को परेशान करने के आरोप लगाए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि राशन लेने के लिए उचित मूल्य दुकान पहुंचने वाले हितग्राहियों को कई बार घंटों ही नहीं, बल्कि कई-कई दिनों तक इंतजार और कतार में लगना पड़ता है। इससे खासकर दूरदराज से आने वाले ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

पहचान वालों को समय पर राशन देने का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि दुकान पर सेल्समैन द्वारा अपने परिचित और पहचान वाले लोगों को प्राथमिकता देते हुए समय पर राशन उपलब्ध कराया जाता है, जबकि अन्य हितग्राहियों को राशन लेने के लिए परेशान होना पड़ता है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय उचित मूल्य दुकान का उद्देश्य पात्र हितग्राहियों को समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि दुकान संचालन में किसी प्रकार की अनियमितता या भेदभाव सामने आता है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से दुकान की व्यवस्थाओं की जांच कराने, हितग्राहियों को समय पर राशन उपलब्ध कराने और शिकायत सही पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अब देखना होगा कि ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन कब तक जांच शुरू करता है और उचित मूल्य दुकान की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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जनसुनवाई में जिला सीईओ ने सुनीं आमजन की समस्याएं, अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण के निर्देश

भू-अधिग्रहण भुगतान, ग्रामसभा, सिंचाई नहर, सड़क और निर्माण राशि से जुड़ी शिकायतें पहुंचीं जनसुनवाई में

डिंडौरी कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के निर्देशन में मंगलवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में साप्ताहिक जनसुनवाई आयोजित की गई। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों की समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को मामलों की जांच कर समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण एवं संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जनसुनवाई में संयुक्त कलेक्टर सुश्री भारती मेरावी, डिप्टी कलेक्टर सुश्री प्रियांशी जैन, एसडीएम डिंडौरी श्री रामबाबू देवांगन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

भू-अधिग्रहण भुगतान से लेकर ग्रामसभा तक की शिकायतें

डिंडौरी विकासखंड के ग्राम जुनवानी निवासी दूलचंद सिंह ने भू-अधिग्रहण के भुगतान पर रोक लगाए जाने की शिकायत करते हुए समस्या के समाधान की मांग की। मामले में जिला सीईओ ने एसडीएम डिंडौरी को प्रकरण का निरीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।

वहीं ग्राम पंचायत सिमरिया के ग्रामीणों ने 15 अगस्त को ग्रामसभा आयोजित नहीं किए जाने की शिकायत प्रस्तुत की। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के लिए जनपद पंचायत डिंडौरी के सीईओ को निर्देशित किया गया।

सिंचाई नहर और पुल की समस्या भी पहुंची जनसुनवाई में

ग्राम रयपुरा के ग्रामीणों ने सिंचाई नहर की मरम्मत, बांध के गेट और पुल बदलने की मांग रखी। जिला सीईओ ने जल संसाधन विभाग को मामले की जांच कर आवश्यक निराकरण करने के निर्देश दिए।

इसी तरह विकासखंड समनापुर के ग्राम पंचायत धनुवासागर में सचिव और सरपंच द्वारा कब्रिस्तान एवं श्मशान घाट की राशि आहरण किए जाने की शिकायत सामने आई। जिला सीईओ ने संबंधित दस्तावेजों की जांच कर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए।

बरगई में सड़क निर्माण की मांग

ग्राम बरगई के ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर आवेदन दिया। जिला सीईओ ने जनपद पंचायत डिंडौरी के सीईओ को प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

अधिकारियों को निर्देश देते हुए जिला सीईओ ने कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य आमजन की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करना है। प्राप्त आवेदनों का गंभीरता से परीक्षण कर निर्धारित समय-सीमा में निराकरण किया जाए और आवेदकों को राहत प्रदान की जाए।

जनसुनवाई में हुआ स्वास्थ्य परीक्षण

जनसुनवाई के दौरान जिला पंचायत सभाकक्ष में स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किया गया। यहां जनसुनवाई में पहुंचे आवेदकों का ब्लड प्रेशर, मधुमेह सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच के साथ लोगों को आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराई।

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लामता थाना परिसर में शांति समिति की बैठक, आगामी त्योहारों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा

ईद, रक्षाबंधन और जन्माष्टमी को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाने की अपील

बालाघाट जिले के लामता में आगामी त्योहारों को शांतिपूर्ण, सौहार्द और आपसी भाईचारे के साथ मनाने के उद्देश्य से लामता थाना परिसर में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशासन, पुलिस के अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए।

बैठक लामता थाना प्रभारी जितेंद्र चौहान और तहसीलदार मयंक मिश्रा की मौजूदगी में हुई। इस दौरान आगामी त्योहारों ईद, रक्षाबंधन और जन्माष्टमी को लेकर क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई।

शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील

बैठक में अधिकारियों ने सभी समुदायों के लोगों से त्योहारों को पारंपरिक उल्लास के साथ शांतिपूर्ण तरीके से मनाने की अपील की। साथ ही किसी भी तरह की अफवाह या विवाद की स्थिति में तत्काल पुलिस-प्रशासन को सूचना देने की बात कही गई।

सुरक्षा व्यवस्था रहेगी मजबूत

थाना प्रभारी जितेंद्र चौहान और तहसीलदार मयंक मिश्रा ने कहा कि त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे। प्रशासन की कोशिश रहेगी कि पर्वों के दौरान आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

बैठक के जरिए प्रशासन और नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि आपसी भाईचारा और सद्भाव बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

रिपोर्ट @शिवम असाटी HALCHAL24NEWS बालाघाट मध्यप्रदेश 

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जंगल बचाने की जिद ने बदली गांव की तस्वीर, बैगा महिला उजियारो बाई बनीं जल-जंगल संरक्षण की मिसाल

दो दशक पहले पेड़ों की कटाई के खिलाफ शुरू की मुहिम, आज देश-विदेश में साझा कर रहीं संरक्षण का अनुभव

डिंडौरी जिले के समनापुर विकासखंड के पोंडी गांव की बैगा जनजाति की महिला उजियारो बाई ने जंगल और जल संरक्षण के क्षेत्र में सामुदायिक भागीदारी की अनूठी मिसाल पेश की है। करीब दो दशक पहले जब गांव के आसपास पेड़ों की लगातार कटाई हो रही थी, तब उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक करने की मुहिम शुरू की।

उजियारो बाई का संदेश था—जंगल रहेगा, तभी पानी बचेगा। इसी सोच के साथ उन्होंने ग्रामीणों को साथ लेकर जंगल की निगरानी की व्यवस्था तैयार की। पेड़ों की कटाई रोकने के लिए समुदाय स्तर पर नियम बनाए गए और ग्रामीणों ने जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली।

जंगल बचा तो जलस्रोतों में आया सुधार

ग्रामीणों के अनुसार जंगल संरक्षण का असर धीरे-धीरे जलस्रोतों पर भी दिखाई देने लगा। जलस्तर में सुधार हुआ और पेयजल संकट कम हुआ। पानी की उपलब्धता बढ़ने से खेती के साथ-साथ सब्जी उत्पादन को भी बढ़ावा मिला।

इस तरह उजियारो बाई की पहल केवल जंगल बचाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर पानी, खेती और ग्रामीण आजीविका पर भी देखने को मिला।

तीसरी कक्षा तक पढ़ीं, फिर भी बनीं देश-दुनिया की आवाज

उजियारो बाई ने भले ही केवल तीसरी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की हो, लेकिन जंगल और जल संरक्षण के उनके अनुभव ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। वह दक्षिण अफ्रीका और फिनलैंड में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

वर्ष 2024 में भारत जल सप्ताह के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि सामुदायिक प्रयासों से जंगल और जलस्रोतों को किस तरह संरक्षित किया जा सकता है।

उजियारो बाई की कहानी बनी प्रेरणा

आज उजियारो बाई उन ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने गांव और पर्यावरण के लिए बदलाव ला सकती हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि प्रकृति का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

जंगलों को बचाने से लेकर जलस्रोतों के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने तक उजियारो बाई की पहल ने साबित किया है कि स्थानीय समुदाय यदि एकजुट होकर काम करे तो बड़े बदलाव की नींव रखी जा सकती है।

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जंगल बचाने की जिद ने बदली गांव की तस्वीर, बैगा महिला उजियारो बाई बनीं जल-जंगल संरक्षण की मिसाल

दो दशक पहले पेड़ों की कटाई के खिलाफ शुरू की मुहिम, आज देश-विदेश में साझा कर रहीं संरक्षण का अनुभव

डिंडौरी जिले के समनापुर विकासखंड के पोंडी गांव की बैगा जनजाति की महिला उजियारो बाई ने जंगल और जल संरक्षण के क्षेत्र में सामुदायिक भागीदारी की अनूठी मिसाल पेश की है। करीब दो दशक पहले जब गांव के आसपास पेड़ों की लगातार कटाई हो रही थी, तब उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक करने की मुहिम शुरू की।

उजियारो बाई का संदेश था—जंगल रहेगा, तभी पानी बचेगा। इसी सोच के साथ उन्होंने ग्रामीणों को साथ लेकर जंगल की निगरानी की व्यवस्था तैयार की। पेड़ों की कटाई रोकने के लिए समुदाय स्तर पर नियम बनाए गए और ग्रामीणों ने जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली।

जंगल बचा तो जलस्रोतों में आया सुधार

ग्रामीणों के अनुसार जंगल संरक्षण का असर धीरे-धीरे जलस्रोतों पर भी दिखाई देने लगा। जलस्तर में सुधार हुआ और पेयजल संकट कम हुआ। पानी की उपलब्धता बढ़ने से खेती के साथ-साथ सब्जी उत्पादन को भी बढ़ावा मिला।

इस तरह उजियारो बाई की पहल केवल जंगल बचाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर पानी, खेती और ग्रामीण आजीविका पर भी देखने को मिला।

तीसरी कक्षा तक पढ़ीं, फिर भी बनीं देश-दुनिया की आवाज

उजियारो बाई ने भले ही केवल तीसरी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की हो, लेकिन जंगल और जल संरक्षण के उनके अनुभव ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। वह दक्षिण अफ्रीका और फिनलैंड में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

वर्ष 2024 में भारत जल सप्ताह के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि सामुदायिक प्रयासों से जंगल और जलस्रोतों को किस तरह संरक्षित किया जा सकता है।

उजियारो बाई की कहानी बनी प्रेरणा

आज उजियारो बाई उन ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने गांव और पर्यावरण के लिए बदलाव ला सकती हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि प्रकृति का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

जंगलों को बचाने से लेकर जलस्रोतों के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने तक उजियारो बाई की पहल ने साबित किया है कि स्थानीय समुदाय यदि एकजुट होकर काम करे तो बड़े बदलाव की नींव रखी जा सकती है।

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मंडला से मां नर्मदा का जल लेकर लामता पहुंचे कांवड़िए, बोल बम के जयकारों से गूंजा क्षेत्र

सावन में निकली भव्य कांवड़ यात्रा में महिलाएं, युवा, बच्चे और बुजुर्ग हुए शामिल; शिवालयों में किया जलाभिषेक

सावन मास के पावन अवसर पर लामता क्षेत्र में आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। मंडला से मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर निकले कांवड़ियों का जत्था डिंडौरी और नैनपुर होते हुए लामता पहुंचा। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हुए। इस दौरान हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

मंडला से शुरू हुई यात्रा, डिंडौरी-नैनपुर होते हुए लामता पहुंचा जत्था

श्रद्धालुओं ने मंडला से मां नर्मदा का पावन जल कांवड़ में लेकर पैदल यात्रा शुरू की। कांवड़िए डिंडौरी और नैनपुर के रास्ते विभिन्न गांवों से होते हुए लामता पहुंचे। रास्तेभर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के जयकारे लगाए और धार्मिक वातावरण बना रहा।

स्थानीय लोगों और प्रशासन का मिला सहयोग

लंबी यात्रा के दौरान कई स्थानों पर स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की ओर से कांवड़ियों के ठहरने, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग किया गया। हालांकि, मार्ग में कुछ स्थानों पर संकरे पुल-पुलियों और नालों में पानी भरने के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना भी करना पड़ा। कांवड़ियों ने आपसी सहयोग से मुश्किलों को पार करते हुए यात्रा जारी रखी।

लामता पहुंचकर भगवान आशुतोष का किया जलाभिषेक

लामता पहुंचने के बाद कांवड़ियों और श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान आशुतोष का जलाभिषेक किया। इस दौरान क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की गई।

मंडला से लामता तक निकली यह कांवड़ यात्रा आस्था, भक्ति और सामाजिक सहभागिता का संदेश देती नजर आई। सावन के पावन अवसर पर कांवड़ियों के पहुंचने से लामता क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा।

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जंगल बचाने की जिद ने बदली गांव की तस्वीर, बैगा महिला उजियारो बाई बनीं जल-जंगल संरक्षण की मिसाल

दो दशक पहले पेड़ों की कटाई के खिलाफ शुरू की मुहिम, आज देश-विदेश में साझा कर रहीं संरक्षण का अनुभव

डिंडौरी जिले के समनापुर विकासखंड के पोंडी गांव की बैगा जनजाति की महिला उजियारो बाई ने जंगल और जल संरक्षण के क्षेत्र में सामुदायिक भागीदारी की अनूठी मिसाल पेश की है। करीब दो दशक पहले जब गांव के आसपास पेड़ों की लगातार कटाई हो रही थी, तब उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक करने की मुहिम शुरू की।

उजियारो बाई का संदेश था—जंगल रहेगा, तभी पानी बचेगा। इसी सोच के साथ उन्होंने ग्रामीणों को साथ लेकर जंगल की निगरानी की व्यवस्था तैयार की। पेड़ों की कटाई रोकने के लिए समुदाय स्तर पर नियम बनाए गए और ग्रामीणों ने जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली।

जंगल बचा तो जलस्रोतों में आया सुधार

ग्रामीणों के अनुसार जंगल संरक्षण का असर धीरे-धीरे जलस्रोतों पर भी दिखाई देने लगा। जलस्तर में सुधार हुआ और पेयजल संकट कम हुआ। पानी की उपलब्धता बढ़ने से खेती के साथ-साथ सब्जी उत्पादन को भी बढ़ावा मिला।

इस तरह उजियारो बाई की पहल केवल जंगल बचाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर पानी, खेती और ग्रामीण आजीविका पर भी देखने को मिला।

तीसरी कक्षा तक पढ़ीं, फिर भी बनीं देश-दुनिया की आवाज

उजियारो बाई ने भले ही केवल तीसरी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की हो, लेकिन जंगल और जल संरक्षण के उनके अनुभव ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। वह दक्षिण अफ्रीका और फिनलैंड में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

वर्ष 2024 में भारत जल सप्ताह के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि सामुदायिक प्रयासों से जंगल और जलस्रोतों को किस तरह संरक्षित किया जा सकता है।

उजियारो बाई की कहानी बनी प्रेरणा

आज उजियारो बाई उन ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने गांव और पर्यावरण के लिए बदलाव ला सकती हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि प्रकृति का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

जंगलों को बचाने से लेकर जलस्रोतों के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने तक उजियारो बाई की पहल ने साबित किया है कि स्थानीय समुदाय यदि एकजुट होकर काम करे तो बड़े बदलाव की नींव रखी जा सकती है।

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जंगल बचाने की जिद ने बदली गांव की तस्वीर, बैगा महिला उजियारो बाई बनीं जल-जंगल संरक्षण की मिसाल

दो दशक पहले पेड़ों की कटाई के खिलाफ शुरू की मुहिम, आज देश-विदेश में साझा कर रहीं संरक्षण का अनुभव

डिंडौरी जिले के समनापुर विकासखंड के पोंडी गांव की बैगा जनजाति की महिला उजियारो बाई ने जंगल और जल संरक्षण के क्षेत्र में सामुदायिक भागीदारी की अनूठी मिसाल पेश की है। करीब दो दशक पहले जब गांव के आसपास पेड़ों की लगातार कटाई हो रही थी, तब उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक करने की मुहिम शुरू की।

उजियारो बाई का संदेश था—जंगल रहेगा, तभी पानी बचेगा। इसी सोच के साथ उन्होंने ग्रामीणों को साथ लेकर जंगल की निगरानी की व्यवस्था तैयार की। पेड़ों की कटाई रोकने के लिए समुदाय स्तर पर नियम बनाए गए और ग्रामीणों ने जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली।

जंगल बचा तो जलस्रोतों में आया सुधार

ग्रामीणों के अनुसार जंगल संरक्षण का असर धीरे-धीरे जलस्रोतों पर भी दिखाई देने लगा। जलस्तर में सुधार हुआ और पेयजल संकट कम हुआ। पानी की उपलब्धता बढ़ने से खेती के साथ-साथ सब्जी उत्पादन को भी बढ़ावा मिला।

इस तरह उजियारो बाई की पहल केवल जंगल बचाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर पानी, खेती और ग्रामीण आजीविका पर भी देखने को मिला।

तीसरी कक्षा तक पढ़ीं, फिर भी बनीं देश-दुनिया की आवाज

उजियारो बाई ने भले ही केवल तीसरी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की हो, लेकिन जंगल और जल संरक्षण के उनके अनुभव ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। वह दक्षिण अफ्रीका और फिनलैंड में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

वर्ष 2024 में भारत जल सप्ताह के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि सामुदायिक प्रयासों से जंगल और जलस्रोतों को किस तरह संरक्षित किया जा सकता है।

उजियारो बाई की कहानी बनी प्रेरणा

आज उजियारो बाई उन ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने गांव और पर्यावरण के लिए बदलाव ला सकती हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि प्रकृति का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

जंगलों को बचाने से लेकर जलस्रोतों के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने तक उजियारो बाई की पहल ने साबित किया है कि स्थानीय समुदाय यदि एकजुट होकर काम करे तो बड़े बदलाव की नींव रखी जा सकती है।

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दो दशक पहले पेड़ों की कटाई के खिलाफ शुरू की मुहिम, आज देश-विदेश में साझा कर रहीं संरक्षण का अनुभव

डिंडौरी जिले के समनापुर विकासखंड के पोंडी गांव की बैगा जनजाति की महिला उजियारो बाई ने जंगल और जल संरक्षण के क्षेत्र में सामुदायिक भागीदारी की अनूठी मिसाल पेश की है। करीब दो दशक पहले जब गांव के आसपास पेड़ों की लगातार कटाई हो रही थी, तब उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक करने की मुहिम शुरू की।

उजियारो बाई का संदेश था—जंगल रहेगा, तभी पानी बचेगा। इसी सोच के साथ उन्होंने ग्रामीणों को साथ लेकर जंगल की निगरानी की व्यवस्था तैयार की। पेड़ों की कटाई रोकने के लिए समुदाय स्तर पर नियम बनाए गए और ग्रामीणों ने जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली।

जंगल बचा तो जलस्रोतों में आया सुधार

ग्रामीणों के अनुसार जंगल संरक्षण का असर धीरे-धीरे जलस्रोतों पर भी दिखाई देने लगा। जलस्तर में सुधार हुआ और पेयजल संकट कम हुआ। पानी की उपलब्धता बढ़ने से खेती के साथ-साथ सब्जी उत्पादन को भी बढ़ावा मिला।

इस तरह उजियारो बाई की पहल केवल जंगल बचाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर पानी, खेती और ग्रामीण आजीविका पर भी देखने को मिला।

तीसरी कक्षा तक पढ़ीं, फिर भी बनीं देश-दुनिया की आवाज

उजियारो बाई ने भले ही केवल तीसरी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की हो, लेकिन जंगल और जल संरक्षण के उनके अनुभव ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। वह दक्षिण अफ्रीका और फिनलैंड में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

वर्ष 2024 में भारत जल सप्ताह के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि सामुदायिक प्रयासों से जंगल और जलस्रोतों को किस तरह संरक्षित किया जा सकता है।

उजियारो बाई की कहानी बनी प्रेरणा

आज उजियारो बाई उन ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने गांव और पर्यावरण के लिए बदलाव ला सकती हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि प्रकृति का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

जंगलों को बचाने से लेकर जलस्रोतों के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने तक उजियारो बाई की पहल ने साबित किया है कि स्थानीय समुदाय यदि एकजुट होकर काम करे तो बड़े बदलाव की नींव रखी जा सकती है।

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🔴 पुरानी डिंडौरी के झुरकी टोला में घर में घुसा स्पेक्टिकल कोबरा

🔴 सर्प मित्र रविराज तुर्केल ने किया कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू

🔴 रेस्क्यू के बाद कोबरा को सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया

🔴 सर्प मित्र की अपील—सांप दिखे तो घबराएं नहीं, मारने का प्रयास न करें

🔴 सांप की सूचना मिलते ही प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को बुलाने की अपील
जंगल बचाने की जिद ने बदली गांव की तस्वीर, बैगा महिला उजियारो बाई बनीं जल-जंगल संरक्षण की मिसाल

दो दशक पहले पेड़ों की कटाई के खिलाफ शुरू की मुहिम, आज देश-विदेश में साझा कर रहीं संरक्षण का अनुभव

डिंडौरी जिले के समनापुर विकासखंड के पोंडी गांव की बैगा जनजाति की महिला उजियारो बाई ने जंगल और जल संरक्षण के क्षेत्र में सामुदायिक भागीदारी की अनूठी मिसाल पेश की है। करीब दो दशक पहले जब गांव के आसपास पेड़ों की लगातार कटाई हो रही थी, तब उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक करने की मुहिम शुरू की।

उजियारो बाई का संदेश था—जंगल रहेगा, तभी पानी बचेगा। इसी सोच के साथ उन्होंने ग्रामीणों को साथ लेकर जंगल की निगरानी की व्यवस्था तैयार की। पेड़ों की कटाई रोकने के लिए समुदाय स्तर पर नियम बनाए गए और ग्रामीणों ने जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली।

जंगल बचा तो जलस्रोतों में आया सुधार

ग्रामीणों के अनुसार जंगल संरक्षण का असर धीरे-धीरे जलस्रोतों पर भी दिखाई देने लगा। जलस्तर में सुधार हुआ और पेयजल संकट कम हुआ। पानी की उपलब्धता बढ़ने से खेती के साथ-साथ सब्जी उत्पादन को भी बढ़ावा मिला।

इस तरह उजियारो बाई की पहल केवल जंगल बचाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर पानी, खेती और ग्रामीण आजीविका पर भी देखने को मिला।

तीसरी कक्षा तक पढ़ीं, फिर भी बनीं देश-दुनिया की आवाज

उजियारो बाई ने भले ही केवल तीसरी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की हो, लेकिन जंगल और जल संरक्षण के उनके अनुभव ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। वह दक्षिण अफ्रीका और फिनलैंड में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

वर्ष 2024 में भारत जल सप्ताह के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि सामुदायिक प्रयासों से जंगल और जलस्रोतों को किस तरह संरक्षित किया जा सकता है।

उजियारो बाई की कहानी बनी प्रेरणा

आज उजियारो बाई उन ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने गांव और पर्यावरण के लिए बदलाव ला सकती हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि प्रकृति का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

जंगलों को बचाने से लेकर जलस्रोतों के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने तक उजियारो बाई की पहल ने साबित किया है कि स्थानीय समुदाय यदि एकजुट होकर काम करे तो बड़े बदलाव की नींव रखी जा सकती है।

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