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DEEPAK NAMDEV

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करोड़ों के सांदीपनी विद्यालय, बच्चों का सफर अब भी पैदल– तीन साल से बस सुविधा का इंतजार

डिंडोरी जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए सांदीपनी विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए आवागमन की सुविधा अब भी चुनौती बनी हुई है। कई गांवों से आने वाले बच्चे करीब पांच किलोमीटर तक पैदल सफर कर विद्यालय पहुंच रहे हैं। स्कूल बस सुविधा शुरू नहीं होने के कारण विद्यार्थियों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, दूरदराज के क्षेत्रों से स्कूल आने वाले बच्चों को रोजाना लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। उनका कहना है कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है।

वहीं, स्कूल प्रबंधन के मुताबिक विद्यार्थियों के आवागमन के लिए करीब तीन साल पहले ही बस संचालन का रूट चार्ट तैयार कराया जा चुका है। हालांकि, इसके बावजूद अब तक बस सेवा शुरू नहीं हो सकी है। इससे विद्यालय की शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ विद्यार्थियों की पहुंच और परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है। कलेक्टर के अनुसार, स्कूल बस सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में शासन को पत्र भेजा गया है। शासन स्तर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में अब ग्रामीण विद्यार्थियों को बस सुविधा शुरू होने का इंतजार है। स्कूल प्रबंधन की ओर से रूट चार्ट तैयार होने और प्रशासन द्वारा शासन को पत्र भेजे जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिवहन सुविधा कब तक शुरू होती है और दूरदराज के गांवों से आने वाले बच्चों की परेशानी कब दूर होती है।

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करोड़ों के सांदीपनी विद्यालय, बच्चों का सफर अब भी पैदल– तीन साल से बस सुविधा का इंतजार

डिंडोरी जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए सांदीपनी विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए आवागमन की सुविधा अब भी चुनौती बनी हुई है। कई गांवों से आने वाले बच्चे करीब पांच किलोमीटर तक पैदल सफर कर विद्यालय पहुंच रहे हैं। स्कूल बस सुविधा शुरू नहीं होने के कारण विद्यार्थियों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, दूरदराज के क्षेत्रों से स्कूल आने वाले बच्चों को रोजाना लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। उनका कहना है कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है।

वहीं, स्कूल प्रबंधन के मुताबिक विद्यार्थियों के आवागमन के लिए करीब तीन साल पहले ही बस संचालन का रूट चार्ट तैयार कराया जा चुका है। हालांकि, इसके बावजूद अब तक बस सेवा शुरू नहीं हो सकी है। इससे विद्यालय की शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ विद्यार्थियों की पहुंच और परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है। कलेक्टर के अनुसार, स्कूल बस सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में शासन को पत्र भेजा गया है। शासन स्तर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में अब ग्रामीण विद्यार्थियों को बस सुविधा शुरू होने का इंतजार है। स्कूल प्रबंधन की ओर से रूट चार्ट तैयार होने और प्रशासन द्वारा शासन को पत्र भेजे जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिवहन सुविधा कब तक शुरू होती है और दूरदराज के गांवों से आने वाले बच्चों की परेशानी कब दूर होती है।

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करोड़ों के सांदीपनी विद्यालय, बच्चों का सफर अब भी पैदल– तीन साल से बस सुविधा का इंतजार

डिंडोरी जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए सांदीपनी विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए आवागमन की सुविधा अब भी चुनौती बनी हुई है। कई गांवों से आने वाले बच्चे करीब पांच किलोमीटर तक पैदल सफर कर विद्यालय पहुंच रहे हैं। स्कूल बस सुविधा शुरू नहीं होने के कारण विद्यार्थियों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, दूरदराज के क्षेत्रों से स्कूल आने वाले बच्चों को रोजाना लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। उनका कहना है कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है।

वहीं, स्कूल प्रबंधन के मुताबिक विद्यार्थियों के आवागमन के लिए करीब तीन साल पहले ही बस संचालन का रूट चार्ट तैयार कराया जा चुका है। हालांकि, इसके बावजूद अब तक बस सेवा शुरू नहीं हो सकी है। इससे विद्यालय की शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ विद्यार्थियों की पहुंच और परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है। कलेक्टर के अनुसार, स्कूल बस सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में शासन को पत्र भेजा गया है। शासन स्तर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में अब ग्रामीण विद्यार्थियों को बस सुविधा शुरू होने का इंतजार है। स्कूल प्रबंधन की ओर से रूट चार्ट तैयार होने और प्रशासन द्वारा शासन को पत्र भेजे जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिवहन सुविधा कब तक शुरू होती है और दूरदराज के गांवों से आने वाले बच्चों की परेशानी कब दूर होती है।

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करोड़ों के सांदीपनी विद्यालय, बच्चों का सफर अब भी पैदल– तीन साल से बस सुविधा का इंतजार

डिंडोरी जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए सांदीपनी विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए आवागमन की सुविधा अब भी चुनौती बनी हुई है। कई गांवों से आने वाले बच्चे करीब पांच किलोमीटर तक पैदल सफर कर विद्यालय पहुंच रहे हैं। स्कूल बस सुविधा शुरू नहीं होने के कारण विद्यार्थियों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, दूरदराज के क्षेत्रों से स्कूल आने वाले बच्चों को रोजाना लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। उनका कहना है कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है।

वहीं, स्कूल प्रबंधन के मुताबिक विद्यार्थियों के आवागमन के लिए करीब तीन साल पहले ही बस संचालन का रूट चार्ट तैयार कराया जा चुका है। हालांकि, इसके बावजूद अब तक बस सेवा शुरू नहीं हो सकी है। इससे विद्यालय की शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ विद्यार्थियों की पहुंच और परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है। कलेक्टर के अनुसार, स्कूल बस सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में शासन को पत्र भेजा गया है। शासन स्तर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में अब ग्रामीण विद्यार्थियों को बस सुविधा शुरू होने का इंतजार है। स्कूल प्रबंधन की ओर से रूट चार्ट तैयार होने और प्रशासन द्वारा शासन को पत्र भेजे जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिवहन सुविधा कब तक शुरू होती है और दूरदराज के गांवों से आने वाले बच्चों की परेशानी कब दूर होती है।

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करोड़ों के सांदीपनी विद्यालय, बच्चों का सफर अब भी पैदल– तीन साल से बस सुविधा का इंतजार

डिंडोरी जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए सांदीपनी विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए आवागमन की सुविधा अब भी चुनौती बनी हुई है। कई गांवों से आने वाले बच्चे करीब पांच किलोमीटर तक पैदल सफर कर विद्यालय पहुंच रहे हैं। स्कूल बस सुविधा शुरू नहीं होने के कारण विद्यार्थियों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, दूरदराज के क्षेत्रों से स्कूल आने वाले बच्चों को रोजाना लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। उनका कहना है कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है।

वहीं, स्कूल प्रबंधन के मुताबिक विद्यार्थियों के आवागमन के लिए करीब तीन साल पहले ही बस संचालन का रूट चार्ट तैयार कराया जा चुका है। हालांकि, इसके बावजूद अब तक बस सेवा शुरू नहीं हो सकी है। इससे विद्यालय की शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ विद्यार्थियों की पहुंच और परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है। कलेक्टर के अनुसार, स्कूल बस सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में शासन को पत्र भेजा गया है। शासन स्तर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में अब ग्रामीण विद्यार्थियों को बस सुविधा शुरू होने का इंतजार है। स्कूल प्रबंधन की ओर से रूट चार्ट तैयार होने और प्रशासन द्वारा शासन को पत्र भेजे जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिवहन सुविधा कब तक शुरू होती है और दूरदराज के गांवों से आने वाले बच्चों की परेशानी कब दूर होती है।

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करोड़ों के सांदीपनी विद्यालय, बच्चों का सफर अब भी पैदल– तीन साल से बस सुविधा का इंतजार

डिंडोरी जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए सांदीपनी विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए आवागमन की सुविधा अब भी चुनौती बनी हुई है। कई गांवों से आने वाले बच्चे करीब पांच किलोमीटर तक पैदल सफर कर विद्यालय पहुंच रहे हैं। स्कूल बस सुविधा शुरू नहीं होने के कारण विद्यार्थियों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, दूरदराज के क्षेत्रों से स्कूल आने वाले बच्चों को रोजाना लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। उनका कहना है कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है।

वहीं, स्कूल प्रबंधन के मुताबिक विद्यार्थियों के आवागमन के लिए करीब तीन साल पहले ही बस संचालन का रूट चार्ट तैयार कराया जा चुका है। हालांकि, इसके बावजूद अब तक बस सेवा शुरू नहीं हो सकी है। इससे विद्यालय की शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ विद्यार्थियों की पहुंच और परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है। कलेक्टर के अनुसार, स्कूल बस सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में शासन को पत्र भेजा गया है। शासन स्तर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।

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करोड़ों के सांदीपनी विद्यालय, बच्चों का सफर अब भी पैदल– तीन साल से बस सुविधा का इंतजार

डिंडोरी जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए सांदीपनी विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए आवागमन की सुविधा अब भी चुनौती बनी हुई है। कई गांवों से आने वाले बच्चे करीब पांच किलोमीटर तक पैदल सफर कर विद्यालय पहुंच रहे हैं। स्कूल बस सुविधा शुरू नहीं होने के कारण विद्यार्थियों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, दूरदराज के क्षेत्रों से स्कूल आने वाले बच्चों को रोजाना लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। उनका कहना है कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है।

वहीं, स्कूल प्रबंधन के मुताबिक विद्यार्थियों के आवागमन के लिए करीब तीन साल पहले ही बस संचालन का रूट चार्ट तैयार कराया जा चुका है। हालांकि, इसके बावजूद अब तक बस सेवा शुरू नहीं हो सकी है। इससे विद्यालय की शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ विद्यार्थियों की पहुंच और परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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ऐसे में अब ग्रामीण विद्यार्थियों को बस सुविधा शुरू होने का इंतजार है। स्कूल प्रबंधन की ओर से रूट चार्ट तैयार होने और प्रशासन द्वारा शासन को पत्र भेजे जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिवहन सुविधा कब तक शुरू होती है और दूरदराज के गांवों से आने वाले बच्चों की परेशानी कब दूर होती है।

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करोड़ों के सांदीपनी विद्यालय, बच्चों का सफर अब भी पैदल– तीन साल से बस सुविधा का इंतजार

डिंडोरी जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए सांदीपनी विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए आवागमन की सुविधा अब भी चुनौती बनी हुई है। कई गांवों से आने वाले बच्चे करीब पांच किलोमीटर तक पैदल सफर कर विद्यालय पहुंच रहे हैं। स्कूल बस सुविधा शुरू नहीं होने के कारण विद्यार्थियों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, दूरदराज के क्षेत्रों से स्कूल आने वाले बच्चों को रोजाना लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। उनका कहना है कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है।

वहीं, स्कूल प्रबंधन के मुताबिक विद्यार्थियों के आवागमन के लिए करीब तीन साल पहले ही बस संचालन का रूट चार्ट तैयार कराया जा चुका है। हालांकि, इसके बावजूद अब तक बस सेवा शुरू नहीं हो सकी है। इससे विद्यालय की शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ विद्यार्थियों की पहुंच और परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है। कलेक्टर के अनुसार, स्कूल बस सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में शासन को पत्र भेजा गया है। शासन स्तर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में अब ग्रामीण विद्यार्थियों को बस सुविधा शुरू होने का इंतजार है। स्कूल प्रबंधन की ओर से रूट चार्ट तैयार होने और प्रशासन द्वारा शासन को पत्र भेजे जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिवहन सुविधा कब तक शुरू होती है और दूरदराज के गांवों से आने वाले बच्चों की परेशानी कब दूर होती है।

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करोड़ों के सांदीपनी विद्यालय, बच्चों का सफर अब भी पैदल– तीन साल से बस सुविधा का इंतजार

डिंडोरी जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए सांदीपनी विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए आवागमन की सुविधा अब भी चुनौती बनी हुई है। कई गांवों से आने वाले बच्चे करीब पांच किलोमीटर तक पैदल सफर कर विद्यालय पहुंच रहे हैं। स्कूल बस सुविधा शुरू नहीं होने के कारण विद्यार्थियों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, दूरदराज के क्षेत्रों से स्कूल आने वाले बच्चों को रोजाना लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। उनका कहना है कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है।

वहीं, स्कूल प्रबंधन के मुताबिक विद्यार्थियों के आवागमन के लिए करीब तीन साल पहले ही बस संचालन का रूट चार्ट तैयार कराया जा चुका है। हालांकि, इसके बावजूद अब तक बस सेवा शुरू नहीं हो सकी है। इससे विद्यालय की शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ विद्यार्थियों की पहुंच और परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है। कलेक्टर के अनुसार, स्कूल बस सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में शासन को पत्र भेजा गया है। शासन स्तर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में अब ग्रामीण विद्यार्थियों को बस सुविधा शुरू होने का इंतजार है। स्कूल प्रबंधन की ओर से रूट चार्ट तैयार होने और प्रशासन द्वारा शासन को पत्र भेजे जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिवहन सुविधा कब तक शुरू होती है और दूरदराज के गांवों से आने वाले बच्चों की परेशानी कब दूर होती है।

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किसानों की 76 मांगों को लेकर गरजा भारतीय किसान संघ, कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

धान खरीदी का लक्ष्य 22 से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने और जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग, जिलाध्यक्ष बोले—“भावान्तर नहीं, भाव चाहिए”

किसानों की ज्वलंत समस्याओं और जिले की प्रमुख मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने मोर्चा खोलते हुए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। सैकड़ों की संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और कृषि, खाद, बीज, फसल बीमा, बिजली, सिंचाई, पशु चिकित्सा, उद्यानिकी एवं राजस्व से जुड़ी 76 मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग उठाई।

संघ ने केंद्र सरकार से कृषि आदान एवं कृषि यंत्रों पर जीएसटी समाप्त करने, सभी फसलों का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य निर्धारित करने तथा किसान सम्मान निधि में वृद्धि कर 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर करने की मांग की। साथ ही कृषि उत्पादों की आयात-निर्यात नीति किसान हितैषी बनाने और जीएम फसलों को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की मांग भी रखी गई।

खाद और फसल बीमा की समस्याएं भी उठाईं

ज्ञापन में किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्ध कराने, एनपीके पर डीएपी की तरह सब्सिडी देने और फसल बीमा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई। संघ ने सैटेलाइट सर्वे के स्थान पर फसल कटाई प्रयोग को प्रभावी बनाने तथा अतिवृष्टि, कीट एवं बीमारियों से प्रभावित फसलों का उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी उठाई।

किसानों ने कृषि मंडियों में आधुनिक टेस्टिंग, तौल एवं ग्रेडिंग व्यवस्था लागू करने तथा धान, सोयाबीन, मक्का, ज्वार और बाजरा सहित प्रमुख फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की।

धान खरीदी का लक्ष्य 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने की मांग

भारतीय किसान संघ ने डिंडौरी जिले की स्थानीय समस्याओं को भी ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल किया। संघ ने धान खरीदी का लक्ष्य 22 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने, जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने और किसानों को सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ दिलाने की मांग की।

इसके अलावा मेंहदवानी तहसीलदार को हटाने, जिले में नवीन समितियों के कार्यालय खोलने तथा पशु चिकित्सा विभाग में पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।

सिंचाई के लिए स्थाई बिजली कनेक्शन की मांग

किसानों ने नदी, कुआं, तालाब एवं अन्य जलस्रोतों से लगी कृषि भूमि के लिए सिंचाई हेतु स्थाई विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने की मांग की। जले हुए ट्रांसफार्मरों को 24 घंटे में बदलने और किसानों को सिंचाई के लिए दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

उद्यानिकी विभाग की योजनाओं में पावर ट्रेलर, जैविक खाद, स्थाई ढांचा और फेंसिंग तार के लक्ष्य बढ़ाने की मांग भी संघ ने उठाई।

भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू ने किसानों की उपज के उचित मूल्य की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए कहा—“भावान्तर नहीं, भाव चाहिए।” संघ ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक मांग पर समय-सीमा तय कर अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ज्ञापन कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू, तहसील अध्यक्ष खमोद चंदेल, आशाराम यादव, तहसील उपाध्यक्ष लालसिंह, प्रचार प्रमुख कृष्ण कुमार, रामेश्वर, लखन, हीरालाल सहित संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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किसानों की 76 मांगों को लेकर गरजा भारतीय किसान संघ, कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

धान खरीदी का लक्ष्य 22 से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने और जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग, जिलाध्यक्ष बोले—“भावान्तर नहीं, भाव चाहिए”

किसानों की ज्वलंत समस्याओं और जिले की प्रमुख मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने मोर्चा खोलते हुए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। सैकड़ों की संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और कृषि, खाद, बीज, फसल बीमा, बिजली, सिंचाई, पशु चिकित्सा, उद्यानिकी एवं राजस्व से जुड़ी 76 मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग उठाई।

संघ ने केंद्र सरकार से कृषि आदान एवं कृषि यंत्रों पर जीएसटी समाप्त करने, सभी फसलों का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य निर्धारित करने तथा किसान सम्मान निधि में वृद्धि कर 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर करने की मांग की। साथ ही कृषि उत्पादों की आयात-निर्यात नीति किसान हितैषी बनाने और जीएम फसलों को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की मांग भी रखी गई।

खाद और फसल बीमा की समस्याएं भी उठाईं

ज्ञापन में किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्ध कराने, एनपीके पर डीएपी की तरह सब्सिडी देने और फसल बीमा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई। संघ ने सैटेलाइट सर्वे के स्थान पर फसल कटाई प्रयोग को प्रभावी बनाने तथा अतिवृष्टि, कीट एवं बीमारियों से प्रभावित फसलों का उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी उठाई।

किसानों ने कृषि मंडियों में आधुनिक टेस्टिंग, तौल एवं ग्रेडिंग व्यवस्था लागू करने तथा धान, सोयाबीन, मक्का, ज्वार और बाजरा सहित प्रमुख फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की।

धान खरीदी का लक्ष्य 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने की मांग

भारतीय किसान संघ ने डिंडौरी जिले की स्थानीय समस्याओं को भी ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल किया। संघ ने धान खरीदी का लक्ष्य 22 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने, जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने और किसानों को सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ दिलाने की मांग की।

इसके अलावा मेंहदवानी तहसीलदार को हटाने, जिले में नवीन समितियों के कार्यालय खोलने तथा पशु चिकित्सा विभाग में पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।

सिंचाई के लिए स्थाई बिजली कनेक्शन की मांग

किसानों ने नदी, कुआं, तालाब एवं अन्य जलस्रोतों से लगी कृषि भूमि के लिए सिंचाई हेतु स्थाई विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने की मांग की। जले हुए ट्रांसफार्मरों को 24 घंटे में बदलने और किसानों को सिंचाई के लिए दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

उद्यानिकी विभाग की योजनाओं में पावर ट्रेलर, जैविक खाद, स्थाई ढांचा और फेंसिंग तार के लक्ष्य बढ़ाने की मांग भी संघ ने उठाई।

भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू ने किसानों की उपज के उचित मूल्य की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए कहा—“भावान्तर नहीं, भाव चाहिए।” संघ ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक मांग पर समय-सीमा तय कर अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ज्ञापन कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू, तहसील अध्यक्ष खमोद चंदेल, आशाराम यादव, तहसील उपाध्यक्ष लालसिंह, प्रचार प्रमुख कृष्ण कुमार, रामेश्वर, लखन, हीरालाल सहित संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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17 सितंबर को घर-घर जलेंगे दीप, सेवा संकल्प अभियान को जनसंकल्प बनाने की अपील

कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने जिलेवासियों से की दीप प्रज्ज्वलित कर सेवा, सुशासन और जनभागीदारी का संदेश देने की अपील

सेवा संकल्प अभियान के शुभारंभ अवसर पर 17 सितंबर को जिले में दीप प्रज्ज्वलित कर सेवा, सुशासन और जनभागीदारी का संदेश जन-जन तक पहुंचाने की अपील की गई है। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने जिलेवासियों से अपने-अपने घरों में दीप प्रज्ज्वलित कर अभियान में सहभागिता करने का आग्रह किया है।

कलेक्टर ने कहा कि 17 सितंबर को सभी नागरिक अपने घरों में दीप जलाकर सेवा संकल्प अभियान के शुभारंभ में सहभागी बनें। उन्होंने जिलेवासियों से अभियान में उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए “सेवा संकल्प” को “जनसंकल्प” बनाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि दीपों की रोशनी के साथ सेवा, सुशासन और जनभागीदारी का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाया जाए। इस अवसर पर जिले को दीपों से जगमगाने के साथ सेवा के प्रति संकल्प लेने का आह्वान किया गया है।

कलेक्टर ने जिलेवासियों से अपील की कि 17 सितंबर को मिलकर डिंडौरी को दीपों से जगमगाएं और सेवा का संकल्प लें।

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किसानों की 76 मांगों को लेकर गरजा भारतीय किसान संघ, कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

धान खरीदी का लक्ष्य 22 से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने और जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग, जिलाध्यक्ष बोले—“भावान्तर नहीं, भाव चाहिए”

किसानों की ज्वलंत समस्याओं और जिले की प्रमुख मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने मोर्चा खोलते हुए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। सैकड़ों की संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और कृषि, खाद, बीज, फसल बीमा, बिजली, सिंचाई, पशु चिकित्सा, उद्यानिकी एवं राजस्व से जुड़ी 76 मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग उठाई।

संघ ने केंद्र सरकार से कृषि आदान एवं कृषि यंत्रों पर जीएसटी समाप्त करने, सभी फसलों का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य निर्धारित करने तथा किसान सम्मान निधि में वृद्धि कर 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर करने की मांग की। साथ ही कृषि उत्पादों की आयात-निर्यात नीति किसान हितैषी बनाने और जीएम फसलों को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की मांग भी रखी गई।

खाद और फसल बीमा की समस्याएं भी उठाईं

ज्ञापन में किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्ध कराने, एनपीके पर डीएपी की तरह सब्सिडी देने और फसल बीमा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई। संघ ने सैटेलाइट सर्वे के स्थान पर फसल कटाई प्रयोग को प्रभावी बनाने तथा अतिवृष्टि, कीट एवं बीमारियों से प्रभावित फसलों का उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी उठाई।

किसानों ने कृषि मंडियों में आधुनिक टेस्टिंग, तौल एवं ग्रेडिंग व्यवस्था लागू करने तथा धान, सोयाबीन, मक्का, ज्वार और बाजरा सहित प्रमुख फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की।

धान खरीदी का लक्ष्य 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने की मांग

भारतीय किसान संघ ने डिंडौरी जिले की स्थानीय समस्याओं को भी ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल किया। संघ ने धान खरीदी का लक्ष्य 22 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने, जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने और किसानों को सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ दिलाने की मांग की।

इसके अलावा मेंहदवानी तहसीलदार को हटाने, जिले में नवीन समितियों के कार्यालय खोलने तथा पशु चिकित्सा विभाग में पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।

सिंचाई के लिए स्थाई बिजली कनेक्शन की मांग

किसानों ने नदी, कुआं, तालाब एवं अन्य जलस्रोतों से लगी कृषि भूमि के लिए सिंचाई हेतु स्थाई विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने की मांग की। जले हुए ट्रांसफार्मरों को 24 घंटे में बदलने और किसानों को सिंचाई के लिए दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

उद्यानिकी विभाग की योजनाओं में पावर ट्रेलर, जैविक खाद, स्थाई ढांचा और फेंसिंग तार के लक्ष्य बढ़ाने की मांग भी संघ ने उठाई।

भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू ने किसानों की उपज के उचित मूल्य की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए कहा—“भावान्तर नहीं, भाव चाहिए।” संघ ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक मांग पर समय-सीमा तय कर अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ज्ञापन कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू, तहसील अध्यक्ष खमोद चंदेल, आशाराम यादव, तहसील उपाध्यक्ष लालसिंह, प्रचार प्रमुख कृष्ण कुमार, रामेश्वर, लखन, हीरालाल सहित संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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किसानों की 76 मांगों को लेकर गरजा भारतीय किसान संघ, कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

धान खरीदी का लक्ष्य 22 से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने और जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग, जिलाध्यक्ष बोले—“भावान्तर नहीं, भाव चाहिए”

किसानों की ज्वलंत समस्याओं और जिले की प्रमुख मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने मोर्चा खोलते हुए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। सैकड़ों की संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और कृषि, खाद, बीज, फसल बीमा, बिजली, सिंचाई, पशु चिकित्सा, उद्यानिकी एवं राजस्व से जुड़ी 76 मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग उठाई।

संघ ने केंद्र सरकार से कृषि आदान एवं कृषि यंत्रों पर जीएसटी समाप्त करने, सभी फसलों का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य निर्धारित करने तथा किसान सम्मान निधि में वृद्धि कर 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर करने की मांग की। साथ ही कृषि उत्पादों की आयात-निर्यात नीति किसान हितैषी बनाने और जीएम फसलों को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की मांग भी रखी गई।

खाद और फसल बीमा की समस्याएं भी उठाईं

ज्ञापन में किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्ध कराने, एनपीके पर डीएपी की तरह सब्सिडी देने और फसल बीमा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई। संघ ने सैटेलाइट सर्वे के स्थान पर फसल कटाई प्रयोग को प्रभावी बनाने तथा अतिवृष्टि, कीट एवं बीमारियों से प्रभावित फसलों का उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी उठाई।

किसानों ने कृषि मंडियों में आधुनिक टेस्टिंग, तौल एवं ग्रेडिंग व्यवस्था लागू करने तथा धान, सोयाबीन, मक्का, ज्वार और बाजरा सहित प्रमुख फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की।

धान खरीदी का लक्ष्य 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने की मांग

भारतीय किसान संघ ने डिंडौरी जिले की स्थानीय समस्याओं को भी ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल किया। संघ ने धान खरीदी का लक्ष्य 22 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने, जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने और किसानों को सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ दिलाने की मांग की।

इसके अलावा मेंहदवानी तहसीलदार को हटाने, जिले में नवीन समितियों के कार्यालय खोलने तथा पशु चिकित्सा विभाग में पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।

सिंचाई के लिए स्थाई बिजली कनेक्शन की मांग

किसानों ने नदी, कुआं, तालाब एवं अन्य जलस्रोतों से लगी कृषि भूमि के लिए सिंचाई हेतु स्थाई विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने की मांग की। जले हुए ट्रांसफार्मरों को 24 घंटे में बदलने और किसानों को सिंचाई के लिए दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

उद्यानिकी विभाग की योजनाओं में पावर ट्रेलर, जैविक खाद, स्थाई ढांचा और फेंसिंग तार के लक्ष्य बढ़ाने की मांग भी संघ ने उठाई।

भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू ने किसानों की उपज के उचित मूल्य की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए कहा—“भावान्तर नहीं, भाव चाहिए।” संघ ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक मांग पर समय-सीमा तय कर अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ज्ञापन कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू, तहसील अध्यक्ष खमोद चंदेल, आशाराम यादव, तहसील उपाध्यक्ष लालसिंह, प्रचार प्रमुख कृष्ण कुमार, रामेश्वर, लखन, हीरालाल सहित संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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किसानों की 76 मांगों को लेकर गरजा भारतीय किसान संघ, कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

धान खरीदी का लक्ष्य 22 से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने और जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग, जिलाध्यक्ष बोले—“भावान्तर नहीं, भाव चाहिए”

किसानों की ज्वलंत समस्याओं और जिले की प्रमुख मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने मोर्चा खोलते हुए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। सैकड़ों की संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और कृषि, खाद, बीज, फसल बीमा, बिजली, सिंचाई, पशु चिकित्सा, उद्यानिकी एवं राजस्व से जुड़ी 76 मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग उठाई।

संघ ने केंद्र सरकार से कृषि आदान एवं कृषि यंत्रों पर जीएसटी समाप्त करने, सभी फसलों का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य निर्धारित करने तथा किसान सम्मान निधि में वृद्धि कर 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर करने की मांग की। साथ ही कृषि उत्पादों की आयात-निर्यात नीति किसान हितैषी बनाने और जीएम फसलों को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की मांग भी रखी गई।

खाद और फसल बीमा की समस्याएं भी उठाईं

ज्ञापन में किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्ध कराने, एनपीके पर डीएपी की तरह सब्सिडी देने और फसल बीमा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई। संघ ने सैटेलाइट सर्वे के स्थान पर फसल कटाई प्रयोग को प्रभावी बनाने तथा अतिवृष्टि, कीट एवं बीमारियों से प्रभावित फसलों का उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी उठाई।

किसानों ने कृषि मंडियों में आधुनिक टेस्टिंग, तौल एवं ग्रेडिंग व्यवस्था लागू करने तथा धान, सोयाबीन, मक्का, ज्वार और बाजरा सहित प्रमुख फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की।

धान खरीदी का लक्ष्य 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने की मांग

भारतीय किसान संघ ने डिंडौरी जिले की स्थानीय समस्याओं को भी ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल किया। संघ ने धान खरीदी का लक्ष्य 22 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने, जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने और किसानों को सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ दिलाने की मांग की।

इसके अलावा मेंहदवानी तहसीलदार को हटाने, जिले में नवीन समितियों के कार्यालय खोलने तथा पशु चिकित्सा विभाग में पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।

सिंचाई के लिए स्थाई बिजली कनेक्शन की मांग

किसानों ने नदी, कुआं, तालाब एवं अन्य जलस्रोतों से लगी कृषि भूमि के लिए सिंचाई हेतु स्थाई विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने की मांग की। जले हुए ट्रांसफार्मरों को 24 घंटे में बदलने और किसानों को सिंचाई के लिए दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

उद्यानिकी विभाग की योजनाओं में पावर ट्रेलर, जैविक खाद, स्थाई ढांचा और फेंसिंग तार के लक्ष्य बढ़ाने की मांग भी संघ ने उठाई।

भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू ने किसानों की उपज के उचित मूल्य की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए कहा—“भावान्तर नहीं, भाव चाहिए।” संघ ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक मांग पर समय-सीमा तय कर अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ज्ञापन कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू, तहसील अध्यक्ष खमोद चंदेल, आशाराम यादव, तहसील उपाध्यक्ष लालसिंह, प्रचार प्रमुख कृष्ण कुमार, रामेश्वर, लखन, हीरालाल सहित संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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किसानों की 76 मांगों को लेकर गरजा भारतीय किसान संघ, कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

धान खरीदी का लक्ष्य 22 से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने और जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग, जिलाध्यक्ष बोले—“भावान्तर नहीं, भाव चाहिए”

किसानों की ज्वलंत समस्याओं और जिले की प्रमुख मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने मोर्चा खोलते हुए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। सैकड़ों की संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और कृषि, खाद, बीज, फसल बीमा, बिजली, सिंचाई, पशु चिकित्सा, उद्यानिकी एवं राजस्व से जुड़ी 76 मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग उठाई।

संघ ने केंद्र सरकार से कृषि आदान एवं कृषि यंत्रों पर जीएसटी समाप्त करने, सभी फसलों का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य निर्धारित करने तथा किसान सम्मान निधि में वृद्धि कर 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर करने की मांग की। साथ ही कृषि उत्पादों की आयात-निर्यात नीति किसान हितैषी बनाने और जीएम फसलों को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की मांग भी रखी गई।

खाद और फसल बीमा की समस्याएं भी उठाईं

ज्ञापन में किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्ध कराने, एनपीके पर डीएपी की तरह सब्सिडी देने और फसल बीमा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई। संघ ने सैटेलाइट सर्वे के स्थान पर फसल कटाई प्रयोग को प्रभावी बनाने तथा अतिवृष्टि, कीट एवं बीमारियों से प्रभावित फसलों का उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी उठाई।

किसानों ने कृषि मंडियों में आधुनिक टेस्टिंग, तौल एवं ग्रेडिंग व्यवस्था लागू करने तथा धान, सोयाबीन, मक्का, ज्वार और बाजरा सहित प्रमुख फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की।

धान खरीदी का लक्ष्य 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने की मांग

भारतीय किसान संघ ने डिंडौरी जिले की स्थानीय समस्याओं को भी ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल किया। संघ ने धान खरीदी का लक्ष्य 22 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने, जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने और किसानों को सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ दिलाने की मांग की।

इसके अलावा मेंहदवानी तहसीलदार को हटाने, जिले में नवीन समितियों के कार्यालय खोलने तथा पशु चिकित्सा विभाग में पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।

सिंचाई के लिए स्थाई बिजली कनेक्शन की मांग

किसानों ने नदी, कुआं, तालाब एवं अन्य जलस्रोतों से लगी कृषि भूमि के लिए सिंचाई हेतु स्थाई विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने की मांग की। जले हुए ट्रांसफार्मरों को 24 घंटे में बदलने और किसानों को सिंचाई के लिए दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

उद्यानिकी विभाग की योजनाओं में पावर ट्रेलर, जैविक खाद, स्थाई ढांचा और फेंसिंग तार के लक्ष्य बढ़ाने की मांग भी संघ ने उठाई।

भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू ने किसानों की उपज के उचित मूल्य की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए कहा—“भावान्तर नहीं, भाव चाहिए।” संघ ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक मांग पर समय-सीमा तय कर अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ज्ञापन कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू, तहसील अध्यक्ष खमोद चंदेल, आशाराम यादव, तहसील उपाध्यक्ष लालसिंह, प्रचार प्रमुख कृष्ण कुमार, रामेश्वर, लखन, हीरालाल सहित संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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धान की फसल में फुदका कीट का प्रकोप, किसान चिंतित

भारतीय किसान संघ ने प्रभारी मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, फसल सर्वे और क्षति के आकलन के साथ मुआवजा व बीमा लाभ दिलाने की मांग

डिंडौरी जिले में इन दिनों धान की फसल पर फुदका कीट के प्रकोप से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों के अनुसार कई क्षेत्रों में खड़ी धान की फसल पीली होकर सूखने लगी है, जिससे फसल को नुकसान होने की आशंका है। समस्या को लेकर भारतीय किसान संघ, तहसील डिंडौरी की ओर से प्रभारी मंत्री, जिला डिंडौरी के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में बताया गया कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में धान की फसल पर फुदका कीट का प्रकोप देखने को मिल रहा है। कीट के कारण पौधों के पीले पड़ने और सूखने की शिकायत सामने आ रही है। किसानों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए तो फसल प्रभावित हो सकती है।

संयुक्त सर्वे और फसल क्षति का आकलन कराने की मांग

भारतीय किसान संघ ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में कृषि एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम तथा फसल बीमा प्रतिनिधियों के माध्यम से खेतों का सर्वेक्षण कराया जाए। साथ ही फसल क्षति का आकलन कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की गई है।

संघ ने किसानों को फुदका कीट के नियंत्रण के लिए आवश्यक दवाओं और उनके उपयोग की जानकारी व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने तथा प्रभावित क्षेत्रों में समुचित कीट प्रबंधन व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी रखी।

मुआवजा और फसल बीमा का लाभ दिलाने की मांग

ज्ञापन में कहा गया है कि सर्वेक्षण के आधार पर फसल क्षति सामने आने पर पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा एवं फसल बीमा की राशि का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।

भारतीय किसान संघ ने प्रशासन से धान की फसल को बचाने के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाने की मांग की है, ताकि किसानों को संभावित आर्थिक नुकसान से राहत मिल सके।

ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला विपणन प्रमुख खिलपत गौतम, किसान संघ तहसील अध्यक्ष डिंडौरी खमोद चंदेल सहित जिले के किसान उपस्थित रहे।

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किसानों की 76 मांगों को लेकर गरजा भारतीय किसान संघ, कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

धान खरीदी का लक्ष्य 22 से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने और जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग, जिलाध्यक्ष बोले—“भावान्तर नहीं, भाव चाहिए”

किसानों की ज्वलंत समस्याओं और जिले की प्रमुख मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने मोर्चा खोलते हुए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। सैकड़ों की संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और कृषि, खाद, बीज, फसल बीमा, बिजली, सिंचाई, पशु चिकित्सा, उद्यानिकी एवं राजस्व से जुड़ी 76 मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग उठाई।

संघ ने केंद्र सरकार से कृषि आदान एवं कृषि यंत्रों पर जीएसटी समाप्त करने, सभी फसलों का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य निर्धारित करने तथा किसान सम्मान निधि में वृद्धि कर 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर करने की मांग की। साथ ही कृषि उत्पादों की आयात-निर्यात नीति किसान हितैषी बनाने और जीएम फसलों को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की मांग भी रखी गई।

खाद और फसल बीमा की समस्याएं भी उठाईं

ज्ञापन में किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्ध कराने, एनपीके पर डीएपी की तरह सब्सिडी देने और फसल बीमा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई। संघ ने सैटेलाइट सर्वे के स्थान पर फसल कटाई प्रयोग को प्रभावी बनाने तथा अतिवृष्टि, कीट एवं बीमारियों से प्रभावित फसलों का उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी उठाई।

किसानों ने कृषि मंडियों में आधुनिक टेस्टिंग, तौल एवं ग्रेडिंग व्यवस्था लागू करने तथा धान, सोयाबीन, मक्का, ज्वार और बाजरा सहित प्रमुख फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की।

धान खरीदी का लक्ष्य 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने की मांग

भारतीय किसान संघ ने डिंडौरी जिले की स्थानीय समस्याओं को भी ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल किया। संघ ने धान खरीदी का लक्ष्य 22 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने, जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने और किसानों को सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ दिलाने की मांग की।

इसके अलावा मेंहदवानी तहसीलदार को हटाने, जिले में नवीन समितियों के कार्यालय खोलने तथा पशु चिकित्सा विभाग में पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।

सिंचाई के लिए स्थाई बिजली कनेक्शन की मांग

किसानों ने नदी, कुआं, तालाब एवं अन्य जलस्रोतों से लगी कृषि भूमि के लिए सिंचाई हेतु स्थाई विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने की मांग की। जले हुए ट्रांसफार्मरों को 24 घंटे में बदलने और किसानों को सिंचाई के लिए दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

उद्यानिकी विभाग की योजनाओं में पावर ट्रेलर, जैविक खाद, स्थाई ढांचा और फेंसिंग तार के लक्ष्य बढ़ाने की मांग भी संघ ने उठाई।

भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू ने किसानों की उपज के उचित मूल्य की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए कहा—“भावान्तर नहीं, भाव चाहिए।” संघ ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक मांग पर समय-सीमा तय कर अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ज्ञापन कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू, तहसील अध्यक्ष खमोद चंदेल, आशाराम यादव, तहसील उपाध्यक्ष लालसिंह, प्रचार प्रमुख कृष्ण कुमार, रामेश्वर, लखन, हीरालाल सहित संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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धान में पीलापन और झुलसने से किसान चिंतित, चूसक कीटों का बढ़ा प्रकोप

कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को किया सतर्क, एक एकड़ में 12 स्प्रे पंप के हिसाब से दवा छिड़काव की सलाह

डिंडौरी जिले में इन दिनों धान की फसल में पीलापन आने और पौधों के झुलसने की समस्या से किसान चिंतित हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार खेतों में रस चूसक कीटों, विशेषकर भूरे एवं सफेद फुदके का प्रकोप देखने को मिल रहा है। ये कीट पौधों के निचले हिस्से से रस चूसकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे पौधे कमजोर होकर पीले पड़ सकते हैं।

किसानों की समस्या को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र डिंडौरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पी.एल. अंबूलकर ने किसानों को धान की फसल की नियमित निगरानी करने और कीटों का प्रकोप दिखाई देने पर समय रहते नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है।

दो दवाओं में से किसी एक का ही करें उपयोग

वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार चूसक कीटों के नियंत्रण के लिए एक एकड़ क्षेत्र में 12 स्प्रे पंप के हिसाब से निम्न में से किसी एक दवा का अनुशंसित मात्रा में उपयोग किया जा सकता है—

थायमेथोक्सम 25 WG — 80 ग्राम प्रति एकड़

इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL — लगभग 60 मिलीलीटर प्रति एकड़

किसानों को विशेष रूप से सलाह दी गई है कि दोनों दवाओं का एक साथ उपयोग न करें। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों में से किसी एक दवा का ही अनुशंसित मात्रा में छिड़काव किया जाना चाहिए।

कृषि वैज्ञानिकों ने बिना विशेषज्ञ की सलाह के अलग-अलग रसायनों को मिलाकर छिड़काव नहीं करने तथा दवा के लेबल पर दिए गए सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।

अधिक प्रकोप पर 10 से 15 दिन बाद दोबारा छिड़काव की सलाह

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गीता सिंह ने बताया कि यदि फसल में कीटों का प्रकोप अधिक बना रहता है तो मौसम की स्थिति को देखते हुए 10 से 15 दिन बाद दोबारा छिड़काव किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने अनावश्यक रूप से बिना परामर्श रसायनों का उपयोग करने से बचने की सलाह दी है।

नीमास्त्र और जीवामृत के उपयोग पर भी जोर

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक उपाय अपनाने की भी सलाह दी है। किसानों से नीमास्त्र तैयार कर उपयोग करने तथा खाद के रूप में जीवामृत का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। इससे फसल प्रबंधन में रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

लगातार फसल की निगरानी जरूरी

विशेषज्ञों ने किसानों से धान के खेतों की लगातार निगरानी करने की अपील की है। पौधों में अचानक पीलापन, झुलसने के लक्षण या चूसक कीटों की संख्या बढ़ती दिखाई देने पर तत्काल कृषि विशेषज्ञ अथवा कृषि विभाग से सलाह लेकर नियंत्रण उपाय अपनाने को कहा गया है। समय पर कीट नियंत्रण नहीं होने पर धान की पैदावार प्रभावित हो सकती है।

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स्वामित्व योजना को लेकर कलेक्टर की अपील, ग्रामीण समय पर कराएं संपत्ति का पंजीयन

वैध स्वामित्व दस्तावेज मिलने से संपत्ति संबंधी विवादों में आएगी कमी, ग्रामीण परिवारों को मिलेगा सुरक्षित अधिकार

डिंडौरी में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का वैध स्वामित्व दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे अपनी संपत्ति संबंधी अधिकारों का अभिलेख एवं पंजीयन अवश्य कराएं।

कलेक्टर ने नागरिकों से कहा कि निर्धारित प्रक्रिया में सहयोग करते हुए आवश्यक दस्तावेजों के साथ पंजीयन की कार्रवाई समय पर पूर्ण करें, ताकि उन्हें अपनी संपत्ति के स्वामित्व का वैध दस्तावेज प्राप्त हो सके।

स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अधिकारों को अभिलेखित कर संबंधित परिवारों को सुरक्षित और वैध स्वामित्व उपलब्ध कराना है। कलेक्टर के अनुसार, संपत्ति का स्वामित्व अधिकार मिलने से भविष्य में संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आने की उम्मीद है।

उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि पात्र ग्रामीण योजना के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर अपने संपत्ति अधिकारों को सुरक्षित एवं वैध बनाएं।

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करोड़ों के सांदीपनी विद्यालय भवन में पहली बारिश में सीपेज और दरारें

पुलिस हाउसिंग बोर्ड के निर्माण पर उठे सवाल, प्रशासन ने जांच और दोषी मिलने पर कार्रवाई का दिया भरोसा

डिंडोरी में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए सांदीपनी विद्यालय भवनों की निर्माण गुणवत्ता पर पहली ही बारिश में सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस हाउसिंग बोर्ड द्वारा निर्मित भवन में जगह-जगह सीपेज और दीवारों में दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है। भवन की स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

बारिश के बाद भवन की दीवारों और छत में सीपेज के निशान दिखाई देने के साथ कई स्थानों पर दरारें भी नजर आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस भवन को लंबे समय तक विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और उपयोगी रहना था, उसकी स्थिति पहली बारिश के बाद ही ऐसी क्यों दिखाई दे रही है।

स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता संबंधी मानकों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। अब सवाल यह भी है कि यदि पहली बारिश में ही भवन में सीपेज और दरारें सामने आ गई हैं, तो आने वाले वर्षों में इसकी स्थिति क्या होगी।

मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने भी संज्ञान लिया है। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने मामले की जांच कराने तथा जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही या खामी सामने आने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है।

अब सभी की नजर प्रशासन की जांच पर है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि भवन में सामने आई सीपेज और दरारें किस कारण से हुईं और निर्माण कार्य में किसी स्तर पर लापरवाही हुई है या नहीं। यदि जांच में खामियां सामने आती हैं, तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है।

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डिंडौरी कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया जी ने जिलेवासियों को गणेश चतुर्थी के पावन पर्व की शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कामना की भगवान श्री गणेश सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आएं।

आइए, श्रद्धा, उल्लास और आपसी सौहार्द के साथ गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाएं।

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पौंडी माल में विकास कार्यों की सौगात, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने किया भूमिपूजन एवं लोकार्पण

सीसी रोड निर्माण का हुआ भूमिपूजन, आंगनवाड़ी भवन की बाउंड्रीवाल का लोकार्पण; सांसद बोले—गांवों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकता

विकासखंड डिंडौरी की ग्राम पंचायत पौंडी माल में विभिन्न विकास कार्यों के भूमिपूजन एवं लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान हनुमान मंदिर के पास स्थित आंगनवाड़ी भवन की बाउंड्रीवाल निर्माण कार्य का लोकार्पण किया गया। वहीं, श्री चन्द्रिका प्रसाद गोसांई के घर से श्री भूपत कासिया के घर तक सीसी रोड निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया गया। विकास कार्यों की शुरुआत से ग्रामीणों में उत्साह देखने को मिला।

इस अवसर पर सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि गांवों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकता है। सड़क, आंगनवाड़ी भवन, पेयजल, बिजली सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास से ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।

उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में स्वीकृत विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को योजनाओं और निर्माण कार्यों का लाभ जल्द मिल सके। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगातार कार्य किए जा रहे हैं।

सांसद ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सहभागिता से गांवों को और अधिक सशक्त एवं विकसित बनाया जा सकता है। उन्होंने विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री रूद्रेश परस्ते, रेडक्रॉस समिति के अध्यक्ष श्री नरेन्द्र राजपूत सहित सरपंच, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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शासकीय आदर्श महाविद्यालय शहपुरा में हिंदी दिवस पर विशेष व्याख्यान, हिंदी पखवाड़े का आगाज

“निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल” के संकल्प के साथ मनाया हिंदी दिवस; वक्ताओं ने हिंदी को रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाओं से जोड़ा

शासकीय आदर्श महाविद्यालय शहपुरा में स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ एवं भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण माहौल में मनाया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य श्री पी.एस. वरकड़े के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम के साथ ही हिंदी पखवाड़े की शुरुआत हुई।

कार्यक्रम की शुरुआत भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध पंक्तियों “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल” के स्मरण के साथ हुई। मुख्य वक्ता एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नरेंद्र सिंह ठाकुर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी हिंदुस्तान के माथे की गौरवमयी बिंदी है। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि वर्तमान समय में रोजगारपरक भाषा के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

डॉ. ठाकुर ने विद्यार्थियों को हिंदी के क्षेत्र में पत्रकारिता, अनुवाद, कंटेंट राइटिंग, डिजिटल मीडिया और शासकीय सेवाओं सहित रोजगार एवं स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी भाषा की संभावनाओं को समझते हुए इसके व्यावहारिक उपयोग को बढ़ाने का आह्वान किया।

विशिष्ट वक्ता डॉ. बसंती चौहान ने हिंदी के ऐतिहासिक गौरव एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी हमारी पहचान और संस्कार से जुड़ी भाषा है। वहीं डॉ. ज्योति त्रिपाठी ने हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित होने वाली विभिन्न साहित्यिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों से सक्रिय सहभागिता की अपील की।

हिंदी के प्राध्यापक श्री अभिषेक पटेल ने अपने व्याख्यान में हिंदी साहित्य एवं व्याकरण की बारीकियों को सरल एवं सहज तरीके से विद्यार्थियों के सामने रखा।

कार्यक्रम में जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू, प्रकाश झारिया, सचिन कुमार धुर्वे एवं विशाल राजपूत सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। विद्यार्थियों में कामाक्षी भवेदी, श्लोक बर्मन, द्वारका प्रसाद परस्ते, पुष्पेंद्र यादव, भूमिका भवेदी, पूनम कछवाहा एवं कृष राय ने सक्रिय सहभागिता की।

कार्यक्रम का समापन हिंदी भाषा के संवर्धन तथा दैनिक जीवन में इसके अधिकाधिक उपयोग का संकल्प लेकर किया गया।

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डिंडौरी भाजपा कार्यालय में PHE मंत्री संपतिया उइके की प्रेसवार्ता

17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान, स्वच्छता एवं सेवा गतिविधियों के जरिए आमजन तक पहुंचेंगे कार्यकर्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान आयोजित किया जा रहा है। इसी सिलसिले में डिंडौरी स्थित भाजपा जिला कार्यालय में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की मंत्री संपतिया उइके ने प्रेसवार्ता कर अभियान की रूपरेखा की जानकारी दी।

मंत्री ने बताया कि सेवा संकल्प अभियान के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा स्वच्छता अभियान सहित विभिन्न सेवा एवं जनभागीदारी आधारित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से आमजन तक सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं की जानकारी पहुंचाने तथा लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

जल जीवन मिशन को लेकर उठे सवाल

प्रेसवार्ता के दौरान मंत्री से जिले में जल जीवन मिशन और जल मिशन की योजनाओं का लाभ कई स्थानों पर सुचारू रूप से नहीं पहुंचने को लेकर सवाल किया गया। इस पर मंत्री संपतिया उइके ने कहा कि जिले में कई स्थानों पर बांध निर्माण प्रस्तावित है, लेकिन आमजन के विरोध के चलते कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है।

उन्होंने बताया कि जिले में कई स्थानों पर बांध निर्माण कार्य स्वीकृत हैं। इन्हीं परियोजनाओं से जल निगम के माध्यम से लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने का प्रस्ताव रखा गया है। मंत्री के अनुसार, बांध निर्माण और जल निगम की योजनाओं के माध्यम से पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जाना प्रस्तावित है।

अब देखना होगा कि जिन क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की व्यवस्था वर्तमान में सुचारू नहीं है, वहां लोगों को नियमित पेयजल सुविधा कब तक उपलब्ध हो पाती है। वहीं, प्रस्तावित बांधों को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध की स्थिति के बीच सरकार के सामने विकास और जनसहमति के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी बनी हुई है।

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