सीजेएम चेल्सी के विद्यार्थियों की मेहनत और प्रतिभा सराहनीय : विक्रमादित्य सिंह
भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद हिमाचल ने हर क्षेत्र में हासिल की प्रगति
शिमला। लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने अपनी भौगोलिक और स्थलाकृतिक चुनौतियों के बावजूद निरंतर प्रगति की है। प्रदेश ने साबित किया है कि कठिन परिस्थितियां कभी भी मानवीय महत्वाकांक्षाओं और उपलब्धियों की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। वह शिमला स्थित कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी (सीजेएम), चेल्सी में आयोजित वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों की प्रतिभा, मेहनत, अनुशासन और पूरे वर्ष विभिन्न गतिविधियों में किए गए उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों ने शिक्षा, खेलकूद और पाठ्येतर गतिविधियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और दृढ़ संकल्प के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि भले ही विद्यालय प्रबंधन प्रत्येक विद्यार्थी को पुरस्कार देकर सम्मानित न कर सके, लेकिन हर विद्यार्थी अपनी मेहनत और उपलब्धियों के लिए सराहना का हकदार है।
मंत्री ने विद्यार्थियों की सफलता में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक पूरे वर्ष विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करते हैं। वे केवल शिक्षा देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि परिवार के सदस्यों और अभिभावकों की तरह उनका मार्गदर्शन भी करते हैं। उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकों और प्रबंधन के प्रयासों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों से उनके योगदान का सम्मान करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी, चेल्सी का गौरवशाली इतिहास रहा है। देवदार के विशाल वृक्षों के बीच स्थित यह प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान कई पीढ़ियों से शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि विद्यालय भविष्य में भी अपनी इस गौरवशाली विरासत को कायम रखेगा। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक संस्थान के वार्षिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना उनके लिए सम्मान की बात है। इससे पहले भी उन्हें विभिन्न अवसरों पर विद्यालय आने का मौका मिला है।
विक्रमादित्य सिंह ने हिमाचल प्रदेश के गठन के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री एवं हिमाचल प्रदेश के संस्थापक डॉ. यशवंत सिंह परमार ने राज्य की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि उस समय हिमाचल प्रदेश को अलग राज्य के रूप में स्थापित करने की राह आसान नहीं थी। स्वतंत्रता के बाद प्रदेश पंजाब प्रांत का हिस्सा था, लेकिन नेताओं के समर्पण, मेहनत और स्पष्ट दृष्टिकोण के कारण हिमाचल प्रदेश एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित हुआ।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां और दुर्गम क्षेत्र हमेशा चुनौतीपूर्ण रहे हैं, लेकिन प्रदेश ने समय के साथ इन चुनौतियों का सामना करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति की है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि वे मेहनत, अनुशासन, दृढ़ संकल्प और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाएं। विद्यार्थियों की उपलब्धियां न केवल उनके परिवार और विद्यालय, बल्कि हिमाचल प्रदेश और पूरे देश का गौरव बढ़ाती हैं।