भारतमाला एक्सप्रेसवे से उजड़ रहे गरीबों का फूटा गुस्सा, टिकारी एसडीओ कार्यालय पर धरना; पुनर्वास नहीं तो आंदोलन होगा तेज
लक्ष्मण मांझी बोले- छह महीने बाद भी नहीं मिला न्याय, भूमिहीन परिवारों को पांच डिसमिल जमीन और पुनर्वास की मांग
गया: गया जिले के टिकारी अनुमंडल कार्यालय के समक्ष गुरुवार को भारतमाला एक्सप्रेसवे परियोजना से प्रभावित भूमिहीन एवं गरीब परिवारों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। धरने का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता एवं बोधगया विधानसभा से पूर्व प्रत्याशी लक्ष्मण मांझी ने किया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए पुनर्वास, आवासीय भूमि और आजीविका की व्यवस्था करने की मांग उठाई।
धरना को संबोधित करते हुए लक्ष्मण मांझी ने कहा कि भारतमाला एक्सप्रेसवे परियोजना के कारण कई गरीब परिवार बेघर होने की कगार पर पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि टिकारी प्रखंड के घनेटू गांव में एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान मांझी टोला के कई घर टूटने वाले हैं। यहां रहने वाले अधिकांश परिवार भूमिहीन हैं और वर्षों से सरकारी भूमि पर बसे हुए हैं। ऐसे में उनके सामने रहने और आजीविका दोनों का संकट खड़ा हो गया है।
उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर करीब छह महीने पहले जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर से मुलाकात की गई थी। जिला पदाधिकारी ने आवेदन पर कार्रवाई करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी टिकारी को आवश्यक निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद आज तक प्रभावित परिवारों को न तो पांच डिसमिल आवासीय भूमि उपलब्ध कराई गई और न ही पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था की गई। प्रशासन के चक्कर काटते-काटते लोग परेशान हो चुके हैं।
लक्ष्मण मांझी ने आरोप लगाया कि सरकार के नियमों के अनुसार भूमिहीन परिवारों को पांच डिसमिल आवासीय जमीन तथा आजीविका के लिए कृषि भूमि देने का प्रावधान है, लेकिन इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार प्रभावित परिवारों को बसाने के लिए जमीन, आवास, चापाकल और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दे तो लोग स्वेच्छा से स्थान खाली करने को तैयार हैं। लेकिन फिलहाल बिना पुनर्वास के ही बुलडोजर चलाकर गरीबों को उजाड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दलित और गरीब परिवारों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। "क्या गरीब होना और दलित समाज से आना ही हमारी सबसे बड़ी गलती है?" उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन गरीबों की सुनने के बजाय उन्हें बेघर करने में जुटा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मांझी समाज के जो लोग थोड़ी-बहुत खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं, उन्हें भी वहां से हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
लक्ष्मण मांझी ने बिहार सरकार और प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी लगातार यह दावा करते हैं कि किसी भी आवेदन का एक महीने के भीतर निष्पादन किया जाएगा, अन्यथा संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी। लेकिन यहां जिलाधिकारी के आदेश के छह महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सवाल किया कि जब अधिकारी जिला पदाधिकारी के निर्देशों की भी अनदेखी कर रहे हैं तो आखिर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन जल्द पुनर्वास की व्यवस्था नहीं करता है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। गरीबों को सड़क पर लाकर विकास नहीं किया जा सकता। विकास के साथ न्याय भी होना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर लक्ष्मण मांझी का कटाक्ष, बोले- "समाज नहीं, सिर्फ परिवार को आगे बढ़ाने की राजनीति"
धरना के दौरान लक्ष्मण मांझी ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वे भूईयां-मुसहर समाज के नाम पर केवल परिवारवाद की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज के उत्थान की सच्ची चिंता होती तो गरीब परिवारों के बेटे-बेटियों को भी राजनीतिक अवसर दिए जाते, लेकिन टिकट और पद केवल परिवार तक ही सीमित हैं।
लक्ष्मण मांझी ने कहा कि समाज के लोग कई बार अपनी समस्याएं लेकर केंद्रीय मंत्री के पास गए, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि भूईयां-मुसहर समाज के नाम पर राजनीति तो की जाती है, लेकिन जब समाज के गरीबों पर संकट आता है तो उनकी आवाज उठाने वाला कोई नहीं होता।
धरना में शामिल लोगों ने चेतावनी दी कि यदि प्रभावित परिवारों को जल्द पुनर्वास, पांच डिसमिल आवासीय भूमि और अन्य सरकारी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तो आंदोलन को जिला स्तर से राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा।
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