
ब्रेकिंग प्रतापगढ़।
इंदौर के चर्चित दूल्हे हत्याकांड में करीब तीन वर्ष से फरार चल रहे प्रतापगढ़ के एक परिषदीय विद्यालय के शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद अब शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। आरोपित शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद विद्यालयी अभिलेखों में उसकी उपस्थिति और वेतन आहरण से जुड़े तथ्यों की जांच की मांग तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिक्षक हत्या के मामले में लंबे समय से फरार था तो विद्यालय की उपस्थिति पंजिका में उसकी मौजूदगी कैसे दर्ज होती रही?
गिरफ्तार शिक्षक की पहचान श्रीधर पांडेय के रूप में बताई गई है। उनका घरेलू नाम गौरव पांडेय बताया जा रहा है। वह विकासखंड सांगीपुर के प्राथमिक विद्यालय दौलतपुर में शिक्षक के पद पर तैनात हैं। बताया जा रहा है कि इंदौर पुलिस के रिकॉर्ड में वह गौरव पांडेय के नाम से चिन्हित था, जबकि सरकारी सेवा संबंधी अभिलेखों में नाम श्रीधर पांडेय दर्ज है। 300 बार दबिश का दावा, फिर भी नहीं लगा हाथ
जानकारी के मुताबिक इंदौर पुलिस लंबे समय से आरोपित की तलाश कर रही थी। उसकी गिरफ्तारी के लिए घर, विद्यालय और अन्य संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार करीब 300 बार दबिश दिए जाने का दावा किया गया है। इसके बावजूद आरोपित पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। अंततः इंदौर एसटीएफ ने 8 अगस्त 2026 को घुईसरनाथ क्षेत्र में लालगंज पुलिस की मौजूदगी में उसे गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उसे लालगंज थाने लाए जाने और रिसीविंग दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई है।