
विमुक्ति दिवस पर बारा तहसील में गरजी निषाद समाज की आवाज, चार सूत्रीय मांगों को लेकर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
निषाद वंश की पर्यायवाची जातियों को SC सूची में शामिल करने समेत जनगणना में अलग पहचान दर्ज कराने की उठी मांग
यूनाइटेड भारत बारा
मनोज कुमार बिन्द
बारा। विमुक्ति दिवस के अवसर पर निषाद पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को बारा तहसील परिसर पहुंचकर निषाद समाज की विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार आवाज बुलंद की। कार्यकर्ताओं ने एसडीएम बारा को चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर केंद्र और प्रदेश सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें पूरा करने की अपील की।
निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कहा कि निषाद वंश से जुड़ी विभिन्न पर्यायवाची जातियों की वास्तविक संख्या और सामाजिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए जनगणना में उनकी पहचान को सही तरीके से दर्ज किया जाना जरूरी है।
जनगणना में ‘मझवार’ और ‘तुरेहा’ के कॉलम में दर्ज हो नाम
ज्ञापन में प्रमुख मांग रखी गई कि निषाद समाज की सभी पर्यायवाची जातियों के नाम जनगणना में “मझवार” एवं “तुरेहा” के कॉलम में दर्ज किए जाएं तथा ब्रैकेट में (D.T.) विमुक्त जनजाति का उल्लेख किया जाए, ताकि समाज की वास्तविक संख्या का आंकड़ा सामने आ सके।
दूसरी मांग में उत्तर प्रदेश में निषाद वंश की सभी पर्यायवाची जातियों को अन्य राज्यों की तर्ज पर अनुसूचित जाति (SC) की सूची में शामिल करने की मांग की गई।
शिक्षा, नौकरी और राजनीति में आरक्षण की मांग
ज्ञापन में संविधान समीक्षा आयोग (2000-02) के अध्यक्ष जस्टिस वेंकटचलैया की सिफारिशों का हवाला देते हुए विमुक्त जनजातियों को महाराष्ट्र और पंजाब की तर्ज पर शिक्षा, सरकारी नौकरी और राजनीति में आरक्षण के साथ पेंशन की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।
1857 के शहीदों के गांवों को मिले ‘आदर्श शहीद गांव’ का दर्जा
निषाद पार्टी ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए निषाद वंश के लोगों को सम्मान देने की मांग करते हुए कहा कि शहीदों के गांवों को “आदर्श शहीद गांव” घोषित किया जाए और उनके परिवारों को स्वतंत्रता सेनानी परिवार का सम्मान दिया जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान रामटहल निषाद, जिला अध्यक्ष महेंद्र केवट बिंद, राकेश निषाद, विकास निषाद, चंद्रेश, संजीत निषाद इलाहाबादी, मंजित, संतोष, विद्या देवी, कविता, समर्थक महेंद्र केवट इलाहाबादी समेत बड़ी संख्या में निषाद पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि निषाद समाज की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार को इन मांगों पर ठोस पहल करनी चाहिए।इसे बड़ी, प्रभावशाली और अखबारी शैली की खबर के रूप में इस तरह तैयार किया जा सकता है:
विमुक्ति दिवस पर बारा तहसील में गरजी निषाद समाज की आवाज, चार सूत्रीय मांगों को लेकर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
निषाद वंश की पर्यायवाची जातियों को SC सूची में शामिल करने समेत जनगणना में अलग पहचान दर्ज कराने की उठी मांग
वाइस ऑफ इलाहाबाद | बारा, प्रयागराज
बारा। विमुक्ति दिवस के अवसर पर निषाद पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को बारा तहसील परिसर पहुंचकर निषाद समाज की विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार आवाज बुलंद की। कार्यकर्ताओं ने एसडीएम बारा को चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर केंद्र और प्रदेश सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें पूरा करने की अपील की।
निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कहा कि निषाद वंश से जुड़ी विभिन्न पर्यायवाची जातियों की वास्तविक संख्या और सामाजिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए जनगणना में उनकी पहचान को सही तरीके से दर्ज किया जाना जरूरी है।
जनगणना में ‘मझवार’ और ‘तुरेहा’ के कॉलम में दर्ज हो नाम
ज्ञापन में प्रमुख मांग रखी गई कि निषाद समाज की सभी पर्यायवाची जातियों के नाम जनगणना में “मझवार” एवं “तुरेहा” के कॉलम में दर्ज किए जाएं तथा ब्रैकेट में (D.T.) विमुक्त जनजाति का उल्लेख किया जाए, ताकि समाज की वास्तविक संख्या का आंकड़ा सामने आ सके।
दूसरी मांग में उत्तर प्रदेश में निषाद वंश की सभी पर्यायवाची जातियों को अन्य राज्यों की तर्ज पर अनुसूचित जाति (SC) की सूची में शामिल करने की मांग की गई।
शिक्षा, नौकरी और राजनीति में आरक्षण की मांग
ज्ञापन में संविधान समीक्षा आयोग (2000-02) के अध्यक्ष जस्टिस वेंकटचलैया की सिफारिशों का हवाला देते हुए विमुक्त जनजातियों को महाराष्ट्र और पंजाब की तर्ज पर शिक्षा, सरकारी नौकरी और राजनीति में आरक्षण के साथ पेंशन की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।
1857 के शहीदों के गांवों को मिले ‘आदर्श शहीद गांव’ का दर्जा
निषाद पार्टी ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए निषाद वंश के लोगों को सम्मान देने की मांग करते हुए कहा कि शहीदों के गांवों को “आदर्श शहीद गांव” घोषित किया जाए और उनके परिवारों को स्वतंत्रता सेनानी परिवार का सम्मान दिया जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान रामटहल निषाद, जिला अध्यक्ष महेंद्र केवट बिंद, राकेश निषाद, विकास निषाद, चंद्रेश, संजीत निषाद इलाहाबादी, मंजित, संतोष, विद्या देवी, कविता, समर्थक महेंद्र केवट इलाहाबादी समेत बड़ी संख्या में निषाद पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि निषाद समाज की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार को इन मांगों पर ठोस पहल करनी चाहिए।