
*बकुलाही नदी पर जर्जर पुल से बढ़ा खतरा, पानी के बीच से गुजरी शव यात्रा*
*सामाजिक कार्यकर्ता की अगुवाई में ग्रामीणों ने उठाई नए पुल के निर्माण की मांग*
प्रतापगढ़ के विकासखंड मान्धाता की ग्राम पंचायत हैंसी परजी और शिवरा गांव की सीमा पर बकुलाही नदी पर बना वर्षों पुराना पुल अब ग्रामीणों के लिए गंभीर खतरे का कारण बन गया है। मुख्य सड़क से करीब 15 फीट नीचे स्थित यह पुल लंबे समय से जर्जर हालत में है। बारिश के दिनों में पुल के ऊपर पानी भर जाने से आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है।
पुल की बदहाली का सबसे भयावह उदाहरण हाल ही में सामने आया, जब 18 अगस्त को शिवरा गांव निवासी युवा अमित कुमार मौर्य के निधन के बाद उनकी शव यात्रा को इसी जर्जर पुल से होकर गुजरना पड़ा। पुल पर पानी अधिक होने के कारण परिजन और ग्रामीण काफी देर तक जलस्तर कम होने का इंतजार करते रहे। स्थिति सामान्य नहीं हुई तो मजबूरी में लोगों को पानी के बीच से ही शव यात्रा निकालनी पड़ी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी रास्ते से आसपास के गांवों के लोग विद्यालय, अस्पताल और मुख्य बाजार तक पहुंचते हैं। करीब 8 से 10 हजार की आबादी इस मार्ग से प्रभावित होती है। बारिश के समय पुल जलमग्न होने से बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और राहगीरों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रवि प्रकाश सिंह चंदन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी प्रतापगढ़ को प्रार्थना पत्र देकर जर्जर पुल को ध्वस्त कर उसके स्थान पर नए पुल के निर्माण की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से मौके का स्थलीय निरीक्षण कराकर जनहित में शीघ्र निर्माण की स्वीकृति प्रदान करने की अपील की है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल की स्थिति को देखते हुए किसी बड़े हादसे का इंतजार करना उचित नहीं होगा। अगर समय रहते पुल का निर्माण नहीं कराया गया तो बारिश के दिनों में यह रास्ता कभी भी किसी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से तत्काल कार्रवाई की उम्मीद जताई है।