धारकुंडी में झरने ने लिया रौद्र रूप, तपस्थली आश्रम में उमड़ा पानी
सतना। लगातार बारिश के बीच विंध्याचल की पहाड़ियों से उतरने वाली प्राकृतिक जलधाराएं उफान पर हैं। धारकुंडी स्थित परमहंस आश्रम में पिछले एक सप्ताह में तीसरी बार झरने ने रौद्र रूप दिखाया। पहाड़ियों की दो पर्वत-संधियों से प्रस्फुटित होकर बहने वाली निर्मल जलधारा यहां प्राकृतिक जलकुंड का निर्माण करती है। तेज बारिश के बाद यही जलधारा उफान पर आई और आश्रम परिसर पानी से लबालब हो गया।
धारकुंडी केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि अध्यात्म और कठिन साधना की तपस्थली के रूप में भी विशेष महत्व रखता है। आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज (धारकुंडी महाराज) ने यहां लंबे समय तक साधना की। यह स्थान अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र के रूप में श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था रखता है। फरवरी 2026 में 102 वर्ष की आयु में महाराज जी के ब्रह्मलीन होने के बाद उनकी �