स्कूल वाहन विवाद में आया नया मोड़, प्रबंधक ने वायरल वीडियो पर उठाए सवाल!
बच्चों को क्षमता से अधिक बैठाने के आरोप पर स्कूल प्रबंधन का पलटवार, बोले—स्कूल को बदनाम करने की कोशिश, निष्पक्ष जांच की मांग
कदौरा, जालौन
बागी रोड स्थित सेठ मनोहरी लाल पब्लिक स्कूल के बच्चों के आवागमन को लेकर उठे सवालों के बीच अब मामले में नया मोड़ आ गया है।
स्कूल वाहन में कथित तौर पर क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाने के वायरल वीडियो को लेकर स्कूल प्रबंधन सामने आया है।
प्रबंधक अमित गुप्ता ने वीडियो पर आपत्ति जताते हुए इसे गलत तरीके से प्रस्तुत किए जाने का आरोप लगाया है।
प्रबंधक अमित गुप्ता का कहना है कि वीडियो के जरिए स्कूल को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला वाहन स्कूल के बच्चों को लाने-ले जाने के लिए नहीं, बल्कि स्कूल स्टाफ के उपयोग में था। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
आरोपों से लेकर प्रबंधक के जवाब तक, अब जांच पर टिकी निगाहें
इससे पहले स्थानीय लोगों की ओर से आरोप लगाया गया था कि एक बोलेरो वाहन में करीब 30 से अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा है।
इस आरोप के सामने आने के बाद स्कूली बच्चों की सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे।
हालांकि, अब स्कूल प्रबंधन के बयान के बाद मामले में दोनों पक्षों की बात सामने आ गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला वाहन किसके उपयोग में था और उसमें बैठे लोग कौन थे?
क्या वीडियो वास्तव में स्कूल के बच्चों के परिवहन से जुड़ा है या प्रबंधन का दावा सही है?
इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि, जांच से खुलेगा सच
स्कूली बच्चों की सुरक्षा एक गंभीर विषय है।
ऐसे मामलों में वाहन की निर्धारित क्षमता, फिटनेस, परमिट और लागू सुरक्षा मानकों की जांच महत्वपूर्ण है।
प्रशासन को चाहिए कि आरोपों और स्कूल प्रबंधन के दावे, दोनों को ध्यान में रखते हुए तथ्यों की निष्पक्ष जांच करे।
फिलहाल, वायरल वीडियो के आधार पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही जांच के निष्कर्ष सामने आए हैं।
अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर जांच कराते हैं या नहीं।
FM News Jalaun की नजर इस मामले पर बनी रहेगी।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो की वास्तविकता क्या है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।
आपकी राय क्या है?
बच्चों की सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामलों में प्रशासन को तत्काल जांच करानी चाहिए या नहीं?
कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें।
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Kalpi, Jalaun | Oct 9, 2026