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बड़ा सवाल : छिपा जवाब? 
17 जुलाई का आदेश 28 जुलाई को क्यों आया सामने, नगर पालिका उरई जांच पर उठे नए सवाल

उरई नगर पालिका जांच में बड़ा फेरबदल! रिंकू सिंह राही हटे, नई जांच टीम पर उठने लगे सवाल

नगर पालिका परिषद उरई में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। 
जांच समिति में बदलाव से जुड़ा 17 जुलाई 2026 का कार्यालय ज्ञापन अब 28 जुलाई को सार्वजनिक होने के बाद जिले में चर्चाओं का विषय बन गया है। 
खास बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब नगर पालिका से जुड़े मामले की जांच को लेकर पहले से ही लोगों की नजरें प्रशासन पर टिकी हुई थीं।

रिकॉर्ड के अनुसार, नगर पालिका उरई में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी के आदेश से 18 जून 2026 को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। 
समिति में अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचंद्र मौर्य अध्यक्ष, तत्कालीन एसडीएम जालौन रिंकू सिंह राही सदस्य तथा अधिशासी अभियंता अमित कुमार सक्सेना सदस्य बनाए गए थे।

बाद में रिंकू सिंह राही के स्थानांतरण के चलते 17 जुलाई को जारी कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से उनकी जगह वर्तमान एसडीएम जालौन राकेश कुमार सोनी को जांच समिति का सदस्य नामित कर दिया गया। 
आदेश में इसे स्थानांतरण के कारण किया गया प्रशासनिक संशोधन बताया गया है।

हालांकि, आदेश सार्वजनिक होने के समय को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि 17 जुलाई को जारी आदेश 28 जुलाई को ही व्यापक रूप से क्यों सामने आया?
 क्या यह केवल दस्तावेज़ के सार्वजनिक होने में देरी थी, या इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक कारण था? 
फिलहाल इन सवालों का आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।

इसी बीच यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नगर पालिका परिषद उरई में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर लोगों की अपेक्षाएं पहले से ही बढ़ी हुई थीं।
 ऐसे में जांच समिति में बदलाव और उसके आदेश के देर से चर्चा में आने पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच समिति अपनी रिपोर्ट कब सौंपेगी, शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच किस निष्कर्ष पर पहुंचेगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो क्या कार्रवाई होगी।

बड़ा सवाल: 17 जुलाई का आदेश 28 जुलाई को चर्चा में क्यों आया? 
क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी या केवल दस्तावेज़ के सार्वजनिक होने में देरी? 
इसका उत्तर संबंधित अधिकारी ही स्पष्ट कर सकते हैं।

आपकी क्या राय है? 
क्या इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन को विस्तृत स्पष्टीकरण देना चाहिए?
 अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

#BreakingNews #Jalaun #Orai #NagarPalikaOrai #JalaunNews #UPNews #Investigation #Inquiry #RinkuSinghRahi #RakeshKumarSoni #RajeshKumarPandey #ADM #Transparency #Accountability #MunicipalCouncil #HindiNews #GroundReport #Exclusive #PublicInterest #Question #NewsAlert #LatestNews #LocalNews 
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बड़ा सवाल : छिपा जवाब? 17 जुलाई का आदेश 28 जुलाई को क्यों आया सामने, नगर पालिका उरई जांच पर उठे नए सवाल उरई नगर पालिका जांच में बड़ा फेरबदल! रिंकू सिंह राही हटे, नई जांच टीम पर उठने लगे सवाल नगर पालिका परिषद उरई में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। जांच समिति में बदलाव से जुड़ा 17 जुलाई 2026 का कार्यालय ज्ञापन अब 28 जुलाई को सार्वजनिक होने के बाद जिले में चर्चाओं का विषय बन गया है। खास बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब नगर पालिका से जुड़े मामले की जांच को लेकर पहले से ही लोगों की नजरें प्रशासन पर टिकी हुई थीं। रिकॉर्ड के अनुसार, नगर पालिका उरई में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी के आदेश से 18 जून 2026 को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति में अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचंद्र मौर्य अध्यक्ष, तत्कालीन एसडीएम जालौन रिंकू सिंह राही सदस्य तथा अधिशासी अभियंता अमित कुमार सक्सेना सदस्य बनाए गए थे। बाद में रिंकू सिंह राही के स्थानांतरण के चलते 17 जुलाई को जारी कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से उनकी जगह वर्तमान एसडीएम जालौन राकेश कुमार सोनी को जांच समिति का सदस्य नामित कर दिया गया। आदेश में इसे स्थानांतरण के कारण किया गया प्रशासनिक संशोधन बताया गया है। हालांकि, आदेश सार्वजनिक होने के समय को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि 17 जुलाई को जारी आदेश 28 जुलाई को ही व्यापक रूप से क्यों सामने आया? क्या यह केवल दस्तावेज़ के सार्वजनिक होने में देरी थी, या इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक कारण था? फिलहाल इन सवालों का आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। इसी बीच यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नगर पालिका परिषद उरई में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर लोगों की अपेक्षाएं पहले से ही बढ़ी हुई थीं। ऐसे में जांच समिति में बदलाव और उसके आदेश के देर से चर्चा में आने पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच समिति अपनी रिपोर्ट कब सौंपेगी, शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच किस निष्कर्ष पर पहुंचेगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो क्या कार्रवाई होगी। बड़ा सवाल: 17 जुलाई का आदेश 28 जुलाई को चर्चा में क्यों आया? क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी या केवल दस्तावेज़ के सार्वजनिक होने में देरी? इसका उत्तर संबंधित अधिकारी ही स्पष्ट कर सकते हैं। आपकी क्या राय है? क्या इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन को विस्तृत स्पष्टीकरण देना चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। #BreakingNews #Jalaun #Orai #NagarPalikaOrai #JalaunNews #UPNews #Investigation #Inquiry #RinkuSinghRahi #RakeshKumarSoni #RajeshKumarPandey #ADM #Transparency #Accountability #MunicipalCouncil #HindiNews #GroundReport #Exclusive #PublicInterest #Question #NewsAlert #LatestNews #LocalNews #Trending #ViralNews #SonuMaharaj #CrimeReporter #JalaunUpdates #FactCheck #PublicDiscussion

Kalpi, Jalaun | Jul 28, 2026

गरीब का दर्द या सिस्टम की नाकामी?

कागजों में पक्के मकान, हकीकत में त्रिपाल के नीचे जिंदगी! 
आखिर गरीब का हक कौन खा गया?

जनपद जालौन के महेवा ब्लॉक की ग्राम पंचायत अवैधेपुर से सिस्टम पर सवाल खड़े करती एक तस्वीर सामने आई है।

 यहां एक गरीब बुजुर्ग परिवार आज भी कच्ची दीवारों, खपरेल और टीन के सहारे बने जर्जर मकान में रहने को मजबूर है। 
बरसात में त्रिपाल ओढ़कर रातें काटनी पड़ती हैं, जबकि खाना आज भी मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी जलाकर बनाया जाता है।

परिवार का आरोप है कि कई बार सरकारी टीमों ने सर्वे किया, अधिकारी आए, कागज भरे गए, लेकिन आज तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला। 
इतना ही नहीं, पिछली सूची में नाम होने के बावजूद बाद में काट दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

अब सवाल यह है कि आखिर गरीब को उसका हक क्यों नहीं मिला? 
क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ फाइलों और कागजों तक सीमित हैं?
 क्या जिम्मेदारों की लापरवाही या भ्रष्टाचार गरीबों का आशियाना छीन रहा है?
 यदि पात्र परिवारों को आवास नहीं मिल रहा, तो योजनाओं का लाभ आखिर किसे मिल रहा है?

 वीडियो के आखिर तक देखिए और सुनिए गरीब परिवार की दर्दभरी कहानी।

 क्या आपके गांव में भी ऐसे गरीब परिवार हैं जिन्हें आज तक आवास नहीं मिला? 
क्या अपात्र लोगों को योजना का लाभ मिला? 
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए।

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गरीब का दर्द या सिस्टम की नाकामी? कागजों में पक्के मकान, हकीकत में त्रिपाल के नीचे जिंदगी! आखिर गरीब का हक कौन खा गया? जनपद जालौन के महेवा ब्लॉक की ग्राम पंचायत अवैधेपुर से सिस्टम पर सवाल खड़े करती एक तस्वीर सामने आई है। यहां एक गरीब बुजुर्ग परिवार आज भी कच्ची दीवारों, खपरेल और टीन के सहारे बने जर्जर मकान में रहने को मजबूर है। बरसात में त्रिपाल ओढ़कर रातें काटनी पड़ती हैं, जबकि खाना आज भी मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी जलाकर बनाया जाता है। परिवार का आरोप है कि कई बार सरकारी टीमों ने सर्वे किया, अधिकारी आए, कागज भरे गए, लेकिन आज तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला। इतना ही नहीं, पिछली सूची में नाम होने के बावजूद बाद में काट दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है। अब सवाल यह है कि आखिर गरीब को उसका हक क्यों नहीं मिला? क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ फाइलों और कागजों तक सीमित हैं? क्या जिम्मेदारों की लापरवाही या भ्रष्टाचार गरीबों का आशियाना छीन रहा है? यदि पात्र परिवारों को आवास नहीं मिल रहा, तो योजनाओं का लाभ आखिर किसे मिल रहा है? वीडियो के आखिर तक देखिए और सुनिए गरीब परिवार की दर्दभरी कहानी। क्या आपके गांव में भी ऐसे गरीब परिवार हैं जिन्हें आज तक आवास नहीं मिला? क्या अपात्र लोगों को योजना का लाभ मिला? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए। #BreakingNews #Jalaun #Mhewa #Avaidhepur #PMAwasYojana #GraminNews #GroundReport #RuralIndia #VillageNews #UPNews #SonuMaharaj #PublicVoice #Corruption #Development #PoorPeople #HousingForAll #HindiNews #ViralNews #TrendingNews #RealityCheck #जनता_की_आवाज #गरीब_का_हक #आवास_योजना #भ्रष्टाचार #ग्राउंड_रिपोर्ट #जालौन #महेवा #अवैधेपुर #उत्तरप्रदेश #ब्रेकिंग_न्यूज

Kalpi, Jalaun | Jul 25, 2026

नमामि गंगे योजना की पाइपलाइन बनी शोपीस! दो महीने बाद भी 27 घरों तक नहीं पहुंचा पानी

सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान, ग्रामीणों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन

उरई/कालपी (जालौन) केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे पेयजल योजना ग्राम आटा में सवालों के घेरे में है। 
कालपी तहसील के कदौरा विकासखंड स्थित ग्राम आटा में करोड़ों रुपये की लागत से बिछाई गई पाइपलाइन और लगाए गए नल कनेक्शन फिलहाल ग्रामीणों के लिए केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। 
आरोप है कि करीब दो महीने पहले कनेक्शन दिए जाने के बावजूद 27 घरों में आज तक एक बूंद पानी नहीं पहुंचा, जिससे लोगों को रोजाना पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव के केवल आधे हिस्से में ही जलापूर्ति हो रही है, जबकि शेष 27 परिवार योजना का लाभ मिलने का इंतजार कर रहे हैं। 
कई बार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से शिकायत की गई, लेकिन किसी ने भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराया। 
मजबूर होकर ग्रामीणों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कुमार संजय को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल जलापूर्ति बहाल कराने की मांग की।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने इस गंभीर समस्या की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई (आईजीआरएस) पोर्टल पर भी दर्ज कराई थी, लेकिन शिकायत का समाधान आज तक धरातल पर दिखाई नहीं दिया। 
यदि शिकायत के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिलती, तो फिर जनसुनवाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

बरसात और उमस के बीच पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में योजना पूरी दिखाई जा सकती है, लेकिन हकीकत में दर्जनों परिवार अब भी पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।
 लोगों का सवाल है कि जब पाइपलाइन बिछ चुकी है और कनेक्शन भी दे दिए गए हैं, तो आखिर जलापूर्ति शुरू क्यों नहीं की जा रही? 
जिम्मेदार विभाग आखिर कब जागेगा?

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और जिन 27 घरों तक अब तक पानी नहीं पहुंचा है, वहां तत्काल नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए।

ज्ञापन देने वालों में रानी विश्वकर्मा, गौरव कुमार, अवधेश कुमार, राममोहन, लखन कुमार, नरेश कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

अब सवाल उठते हैं…

- आखिर दो महीने बाद भी 27 घरों तक पानी क्यों नहीं पहुंचा?
- क्या नमामि गंगे योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?
- सीएम पोर्टल पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी?
- क्या ग्रामीणों को उनका मूल अधिकार समय पर मिल पाएगा?

आपकी क्या राय है?
 क्या सरकारी योजनाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए? 
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

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नमामि गंगे योजना की पाइपलाइन बनी शोपीस! दो महीने बाद भी 27 घरों तक नहीं पहुंचा पानी सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान, ग्रामीणों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन उरई/कालपी (जालौन) केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे पेयजल योजना ग्राम आटा में सवालों के घेरे में है। कालपी तहसील के कदौरा विकासखंड स्थित ग्राम आटा में करोड़ों रुपये की लागत से बिछाई गई पाइपलाइन और लगाए गए नल कनेक्शन फिलहाल ग्रामीणों के लिए केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। आरोप है कि करीब दो महीने पहले कनेक्शन दिए जाने के बावजूद 27 घरों में आज तक एक बूंद पानी नहीं पहुंचा, जिससे लोगों को रोजाना पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के केवल आधे हिस्से में ही जलापूर्ति हो रही है, जबकि शेष 27 परिवार योजना का लाभ मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कई बार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से शिकायत की गई, लेकिन किसी ने भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराया। मजबूर होकर ग्रामीणों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कुमार संजय को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल जलापूर्ति बहाल कराने की मांग की। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने इस गंभीर समस्या की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई (आईजीआरएस) पोर्टल पर भी दर्ज कराई थी, लेकिन शिकायत का समाधान आज तक धरातल पर दिखाई नहीं दिया। यदि शिकायत के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिलती, तो फिर जनसुनवाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। बरसात और उमस के बीच पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में योजना पूरी दिखाई जा सकती है, लेकिन हकीकत में दर्जनों परिवार अब भी पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। लोगों का सवाल है कि जब पाइपलाइन बिछ चुकी है और कनेक्शन भी दे दिए गए हैं, तो आखिर जलापूर्ति शुरू क्यों नहीं की जा रही? जिम्मेदार विभाग आखिर कब जागेगा? ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और जिन 27 घरों तक अब तक पानी नहीं पहुंचा है, वहां तत्काल नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन देने वालों में रानी विश्वकर्मा, गौरव कुमार, अवधेश कुमार, राममोहन, लखन कुमार, नरेश कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। अब सवाल उठते हैं… - आखिर दो महीने बाद भी 27 घरों तक पानी क्यों नहीं पहुंचा? - क्या नमामि गंगे योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है? - सीएम पोर्टल पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? - जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी? - क्या ग्रामीणों को उनका मूल अधिकार समय पर मिल पाएगा? आपकी क्या राय है? क्या सरकारी योजनाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। #BreakingNews #Jalaun #Kalpi #Kadaura #GramAata #NamamiGange #WaterCrisis #DrinkingWater #UPNews #CMPortal #IGRS #GraminNews #GroundReport #PublicIssue #VillageNews #Urai #SonuMaharaj #CrimeReporter #JalaunNews #UPGovernment #NalJalYojana #WaterSupply #ViralNews #HindiNews #LocalNews #Journalism #JanSamasya #PublicVoice #Bundelkhand

Kalpi, Jalaun | Jul 24, 2026

#कालपी में बेखौफ चोरों का आतंक! 

➡️ सूने मकान को निशाना बनाकर लाखों रुपये की नकदी और जेवरात चोरी।
➡️ पीड़ित परिवार ने करीब ₹6 लाख के नुकसान का दावा किया, पुलिस जांच में जुटी।

➡️ लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से नगरवासियों में दहशत और आक्रोश।
➡️ स्थानीय लोगों के अनुसार अपराधियों में पुलिस का खौफ कम होता नजर आ रहा है।

➡️ कई पुराने चोरी और लूट के मामलों के खुलासे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

➡️ पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर अज्ञात चोरों की तलाश शुरू कर दी है।
➡️ मामले की जांच जारी है, पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।

➡️ अब सबकी नजर इस बात पर है कि चोर कब गिरफ्तार होंगे और चोरी का माल कब बरामद होगा?

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#कालपी में बेखौफ चोरों का आतंक! ➡️ सूने मकान को निशाना बनाकर लाखों रुपये की नकदी और जेवरात चोरी। ➡️ पीड़ित परिवार ने करीब ₹6 लाख के नुकसान का दावा किया, पुलिस जांच में जुटी। ➡️ लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से नगरवासियों में दहशत और आक्रोश। ➡️ स्थानीय लोगों के अनुसार अपराधियों में पुलिस का खौफ कम होता नजर आ रहा है। ➡️ कई पुराने चोरी और लूट के मामलों के खुलासे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ➡️ पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर अज्ञात चोरों की तलाश शुरू कर दी है। ➡️ मामले की जांच जारी है, पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। ➡️ अब सबकी नजर इस बात पर है कि चोर कब गिरफ्तार होंगे और चोरी का माल कब बरामद होगा? #BreakingNews #BigBreaking #Kalpi #Jalaun #कालपी #जालौन #CrimeNews #चोरी #Theft #उत्तरप्रदेश #UPPolice #Police #LawAndOrder #Crime #HindiNews #ViralNews #LocalNews #Urai #Bundelkhand #KalpiNews #JalaunNews #PoliceInvestigation #LatestNews #SonuMaharaj #क्राइम_रिपोर्टर #ब्रेकिंग_न्यूज #उत्तर_प्रदेश #अपराध

Kalpi, Jalaun | Jul 19, 2026

महेवा ब्लॉक में फूटा रोजगार सेवकों का गुस्सा!
 बीडीओ पर गंभीर आरोपों की बौछार, ब्लॉक परिसर में अनिश्चितकालीन धरना

मानदेय, उत्पीड़न, कथित रिश्वतखोरी और धमकी के आरोपों से गरमाया महेवा ब्लॉक; बीडीओ बोले—सभी आरोप पूरी तरह निराधार

जालौन जनपद के महेवा विकास खंड में शनिवार को उस समय माहौल गर्मा गया, जब दर्जनों रोजगार सेवक ब्लॉक परिसर में तिरपाल बिछाकर धरने पर बैठ गए। 
उनके समर्थन में कई ग्राम प्रधान प्रतिनिधि और ग्रामीण भी मौके पर मौजूद रहे।
 रोजगार सेवकों का कहना है कि वर्षों से उनका शोषण किया जा रहा है और बार-बार शिकायत करने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा।

धरने पर बैठे रोजगार सेवकों ने मीडिया से बातचीत में कई गंभीर आरोप लगाए। 
उनका कहना है कि पहले उनसे डोंगल लगवाकर कार्य कराया जाता है, फिर उन्हीं के खिलाफ शिकायतें कराई जाती हैं। 
इसके बाद कार्यालय बुलाकर कथित रूप से 20 हजार रुपये की मांग की जाती है। 
रोजगार सेवकों का आरोप है कि इस राशि में से 15 हजार रुपये अधिकारी स्वयं रखते हैं और 5 हजार रुपये कुछ कथित पत्रकारों को दिए जाते हैं। 
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

रोजगार सेवकों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया जाता है और डराया-धमकाया जाता है।
 उनका कहना है कि उन्हें कहा जाता है कि तुम लोगों को गड्ढा खुदवाकर उसी में खड़ा कर देंगे तथा हमसे बड़ा कोई गुंडा नहीं है।
 रोजगार सेवकों का यह भी कहना है कि कई महीनों से उनका मानदेय लंबित है, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

गौरतलब है कि एक दिन पहले सोशल मीडिया पर एक रोजगार सेवक की पोस्ट वायरल हुई थी, जिसमें न्याय न मिलने व शोषण करने पर आत्महत्या जैसा कदम उठाने की चेतावनी दी गई थी। 
इसी को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी पूरी सतर्कता के साथ मौके पर मौजूद रहा और सुरक्षा व्यवस्था संभाले रहा, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

इस पूरे मामले में जब खंड विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह से दूरभाष पर संपर्क कर उनका पक्ष लिया गया तो उन्होंने रोजगार सेवकों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि उनका इन आरोपों से कोई संबंध नहीं है।

खबर लिखे जाने तक खंड विकास अधिकारी धरनास्थल पर नहीं पहुंचे थे। 
रोजगार सेवकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।

 वीडियो के लास्ट तक बने रहिए...

वीडियो के आखिर तक बने रहिए और सुनिए कि रोजगार सेवकों ने मीडिया के सामने क्या-क्या गंभीर आरोप लगाए, उन्होंने अपने साथ हो रहे कथित उत्पीड़न को लेकर क्या कहा।

इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? 
क्या वास्तव में रोजगार सेवकों के साथ शोषण हो रहा है या फिर मामला कुछ और है?
 अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए।

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महेवा ब्लॉक में फूटा रोजगार सेवकों का गुस्सा! बीडीओ पर गंभीर आरोपों की बौछार, ब्लॉक परिसर में अनिश्चितकालीन धरना मानदेय, उत्पीड़न, कथित रिश्वतखोरी और धमकी के आरोपों से गरमाया महेवा ब्लॉक; बीडीओ बोले—सभी आरोप पूरी तरह निराधार जालौन जनपद के महेवा विकास खंड में शनिवार को उस समय माहौल गर्मा गया, जब दर्जनों रोजगार सेवक ब्लॉक परिसर में तिरपाल बिछाकर धरने पर बैठ गए। उनके समर्थन में कई ग्राम प्रधान प्रतिनिधि और ग्रामीण भी मौके पर मौजूद रहे। रोजगार सेवकों का कहना है कि वर्षों से उनका शोषण किया जा रहा है और बार-बार शिकायत करने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा। धरने पर बैठे रोजगार सेवकों ने मीडिया से बातचीत में कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि पहले उनसे डोंगल लगवाकर कार्य कराया जाता है, फिर उन्हीं के खिलाफ शिकायतें कराई जाती हैं। इसके बाद कार्यालय बुलाकर कथित रूप से 20 हजार रुपये की मांग की जाती है। रोजगार सेवकों का आरोप है कि इस राशि में से 15 हजार रुपये अधिकारी स्वयं रखते हैं और 5 हजार रुपये कुछ कथित पत्रकारों को दिए जाते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रोजगार सेवकों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया जाता है और डराया-धमकाया जाता है। उनका कहना है कि उन्हें कहा जाता है कि तुम लोगों को गड्ढा खुदवाकर उसी में खड़ा कर देंगे तथा हमसे बड़ा कोई गुंडा नहीं है। रोजगार सेवकों का यह भी कहना है कि कई महीनों से उनका मानदेय लंबित है, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। गौरतलब है कि एक दिन पहले सोशल मीडिया पर एक रोजगार सेवक की पोस्ट वायरल हुई थी, जिसमें न्याय न मिलने व शोषण करने पर आत्महत्या जैसा कदम उठाने की चेतावनी दी गई थी। इसी को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी पूरी सतर्कता के साथ मौके पर मौजूद रहा और सुरक्षा व्यवस्था संभाले रहा, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। इस पूरे मामले में जब खंड विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह से दूरभाष पर संपर्क कर उनका पक्ष लिया गया तो उन्होंने रोजगार सेवकों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि उनका इन आरोपों से कोई संबंध नहीं है। खबर लिखे जाने तक खंड विकास अधिकारी धरनास्थल पर नहीं पहुंचे थे। रोजगार सेवकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। वीडियो के लास्ट तक बने रहिए... वीडियो के आखिर तक बने रहिए और सुनिए कि रोजगार सेवकों ने मीडिया के सामने क्या-क्या गंभीर आरोप लगाए, उन्होंने अपने साथ हो रहे कथित उत्पीड़न को लेकर क्या कहा। इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? क्या वास्तव में रोजगार सेवकों के साथ शोषण हो रहा है या फिर मामला कुछ और है? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए। #BreakingNews #MegaBreaking #BigBreaking #Jalaun #JalaunNews #Kalpi #Maheba #MahebaBlock #BlockOffice #BDO #ArunKumarSingh #RozgarSevak #MGNREGA #NREGA #Dharna #Protest #ViralVideo #GroundReport #Exclusive #LiveUpdate #HindiNews #UPNews #UttarPradesh #SonuMaharaj #Journalism #PublicVoice #Justice #CorruptionAllegation #Accountability #VillageDevelopment

Kalpi, Jalaun | Jul 18, 2026

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