एलपीजी वितरकों ने सरकार और तेल कंपनियों के खिलाफ खोला मोर्चा, सात सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन तेज, कमीशन बढ़ाने से लेकर ई-केवाईसी के 236 रुपये भुगतान और अतिरिक्त सिलेंडर भेजने पर रोक की मांग, 26 अक्टूबर को दिल्ली में धरने की चेतावनी
गया। गया शहर के बिसार तालाब स्थित एक निजी होटल में सोमवार को एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (इंडिया) की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें एसोसिएशन के गया जिला अध्यक्ष अनिल कुमार प्रसाद ने एलपीजी वितरकों की समस्याओं और सरकार व तेल कंपनियों से जुड़ी सात सूत्री मांगों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि देशभर में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) से जुड़े एलपीजी वितरक एक सितंबर 2026 से चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि आंदोलन के पहले चरण में वितरक काली पट्टी बांधकर और काले बैनर के माध्यम से विरोध जता रहे हैं। इसके बाद 21 सितंबर से देशभर में जिला प्रशासन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने का अभियान शुरू किया गया। गया में भी जिला अध्यक्ष अनिल कुमार प्रसाद के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर वितरकों की समस्याओं से अवगत कराया गया। जिला अध्यक्ष अनिल कुमार प्रसाद ने कहा कि एलपीजी वितरक सरकार और उपभोक्ताओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने के साथ-साथ अब वितरकों से ई-केवाईसी सहित कई अतिरिक्त कार्य भी कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद बढ़ती महंगाई और संचालन खर्च के अनुरूप वितरकों का कमीशन नहीं बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि वितरकों के सामने कर्मचारियों का वेतन, वाहन खर्च, गोदाम संचालन, बिजली और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं।
कमीशन में 75 रुपये की अंतरिम बढ़ोतरी की मांग
एसोसिएशन की प्रमुख मांगों में एलपीजी वितरकों के प्रशासनिक शुल्क एवं होम डिलीवरी प्रभार में तत्काल 75 रुपये की अंतरिम वृद्धि शामिल है। वितरकों का कहना है कि वर्तमान दरों में बढ़ते खर्च का वहन करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए कमीशन की समीक्षा कर तत्काल राहत दी जानी चाहिए।
ई-केवाईसी के लिए प्रति उपभोक्ता 236 रुपये भुगतान की मांग
एलपीजी वितरकों ने ई-केवाईसी को लेकर भी स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। एसोसिएशन के अनुसार, वितरकों से उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी कराने का काम लिया जा रहा है। इसमें आधार सहित विभिन्न दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करने में समय और संसाधन खर्च होते हैं। ऐसे में प्रत्येक ई-केवाईसी के लिए 236 रुपये का भुगतान सार्वजनिक तेल कंपनियों द्वारा वितरकों को किए जाने की मांग की गई है।
गोदाम की क्षमता से अधिक सिलेंडर भेजने का विरोध
वितरकों ने तेल कंपनियों द्वारा कथित रूप से उनकी क्षमता से अधिक सिलेंडर भेजे जाने पर भी आपत्ति जताई। अनिल कुमार प्रसाद ने कहा कि प्रत्येक गैस एजेंसी के गोदाम की निर्धारित क्षमता होती है। यदि क्षमता से अधिक सिलेंडर भेजे जाते हैं तो उन्हें सुरक्षित तरीके से रखना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को वितरकों की वास्तविक आवश्यकता और गोदाम की क्षमता के अनुसार ही सिलेंडर उपलब्ध कराने चाहिए। साथ ही वितरकों पर गैर-घरेलू एवं अन्य श्रेणी के सिलेंडर बेचने के लिए अनावश्यक दबाव और लक्ष्य नहीं थोपा जाना चाहिए।
PNG को लेकर भी वितरकों ने जताई चिंता
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने की नीति पर भी सवाल उठाए गए। एसोसिएशन ने कहा कि वह PNG के विस्तार का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए एलपीजी वितरकों के मौजूदा घरेलू ग्राहकों को ही पाइपलाइन कनेक्शन की ओर स्थानांतरित करने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। वितरकों का कहना है कि यदि उपभोक्ताओं को PNG कनेक्शन देना है तो सरकार और संबंधित कंपनियां इसके लिए अलग व्यवस्था करें। मौजूदा एलपीजी उपभोक्ताओं को वितरकों के माध्यम से PNG में स्थानांतरित करने से वितरकों के कारोबार पर सीधा असर पड़ता है। एसोसिएशन ने बंद किए गए नए घरेलू एलपीजी कनेक्शनों को भी फिर से शुरू करने की मांग की है।
कंपनी अधिकारियों पर दबाव और भारी जुर्माने का आरोप
एसोसिएशन ने तेल कंपनियों के कुछ बिक्री अधिकारियों पर वितरकों को दबाव में लेने का आरोप लगाया। जिला अध्यक्ष ने कहा कि कई बार अधिकारियों द्वारा कार्रवाई, जुर्माना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है। उन्होंने दावा किया कि अप्रैल के बाद कई वितरकों पर लाखों रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है। उन्होंने कहा कि एलपीजी वितरक कंपनियों के व्यवसायिक साझेदार हैं। इसलिए उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए और अनावश्यक दबाव की कार्रवाई पर रोक लगनी चाहिए। एसोसिएशन ने विक्रय अधिकारियों द्वारा कथित ब्लैकमेलिंग की शिकायतों की जांच कर ऐसी प्रथा पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
26 अक्टूबर को दिल्ली में धरना, हड़ताल की चेतावनी
एसोसिएशन की ओर से बताया गया कि आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। 5 अक्टूबर से ‘नो मनी-नो इंडेंट’ अभियान चलाने की घोषणा की गई है। इसके तहत भुगतान से संबंधित मुद्दों के समाधान तक इंडेंट नहीं देने की नीति अपनाने की बात कही गई है। इसके बाद 26 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन प्रस्तावित है।
एसोसिएशन ने कहा कि यदि इसके बाद भी सरकार और तेल कंपनियों की ओर से उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा तथा अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया जा सकता है। जिला अध्यक्ष अनिल कुमार प्रसाद ने कहा कि एलपीजी वितरक उपभोक्ताओं को निर्बाध गैस आपूर्ति देने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों को वितरकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर सात सूत्री मांगों का शीघ्र समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि वितरकों की जायज समस्याओं का समाधान कराना है।
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