जमुई के जतहर गांव से सामने आई यह तस्वीर सिर्फ 200 फीट लंबे बांस के पुल की कहानी नहीं, बल्कि गांव, गरीब और महादलित परिवारों के विकास के दावों पर बड़ा सवाल है।
करीब 300 महादलित परिवार वर्षों से नदी पर पक्के पुल की मांग कर रहे हैं। आश्वासन मिलते रहे, इंतजार होता रहा, लेकिन जब स्थायी समाधान नहीं मिला तो ग्रामीणों ने सरकारी व्यवस्था का इंतजार छोड़कर श्रमदान से खुद बांस का पुल तैयार कर दिया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिकंदरा विधायक प्रफुल्ल मांझी और जमुई सांसद अरुण भारती, दोनों दलित समाज से आते हैं, फिर भी जतहर के महादलित परिवारों को नदी पार करने के लिए आज भी बांस का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है?
इस मुश्किल घड़ी में डॉ. नीरज साह ने ग्रामीणों का साथ दिया। उनके सहयोग और ग्रामीणों की मेहनत से तैयार हुए इस पुल का रविवार को डॉ. नीरज साह, गरही थाना प्रभारी बिपिन चंद्र पालटा, हरनी पंचायत के मुखिया प्रकाश तांती और अरुणाबांक पंचायत के मुखिया अनिल यादव ने संयुक्त रूप से उद्घाटन किया।
ग्रामीणों ने पुल बनाकर सिर्फ रास्ता नहीं बनाया, बल्कि व्यवस्था और विकास के दावों के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है।
सवाल अब भी वही है—पक्का पुल कब बनेगा?
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Jamui, Jamui | Sep 6, 2026