बड़ी पहल: अब गांव में ही लगेगी राजस्व शिविर अदालत, जमीन के विवादों से मिलेगी राहत!
उरई तहसील में राजस्व विवादों के त्वरित निस्तारण की पहल, हदबंदी से लेकर कुर्रा बंटवारे और खतौनी की त्रुटियों तक का होगा समाधान
दीपावली पर घर आने वाले परिजनों की सहमति से पुराने विवाद सुलझाने पर जोर, किसानों से आपसी सहमति अपनाने की अपील
जनपद जालौन की तहसील उरई में किसानों और काश्तकारों को राजस्व विवादों से राहत दिलाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।
न्यायालय उपजिलाधिकारी (न्यायिक), उरई की ओर से गांवों में राजस्व शिविर न्यायालयों का आयोजन कर आपसी सहमति और सरल प्रक्रिया के माध्यम से निर्विवाद राजस्व मामलों का निस्तारण कराने पर जोर दिया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को बार-बार तहसील और कचहरी के चक्कर लगाने से राहत दिलाना, भूमि अभिलेखों की त्रुटियों को दूर करना तथा जमीन से जुड़े विवादों को पारदर्शी तरीके से सुलझाना है।
13 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशों के अनुपालन में निर्विवाद राजस्व मामलों को 15 दिनों में निस्तारित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
आगामी दीपावली पर्व पर बाहर रहने वाले परिवार के सदस्यों के गांव लौटने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने आपसी सहमति से अधिक से अधिक मामलों के समाधान पर विशेष जोर दिया है, ताकि सभी संबंधित पक्षकार एक साथ बैठकर विवादों का हल निकाल सकें।
एक खतौनी, एक नाम—भूमि अभिलेखों को शुद्ध बनाने पर जोर
अभियान के तहत एक खतौनी—एक नाम’ के लक्ष्य को प्रमुखता दी गई है।
इसका उद्देश्य आवश्यकतानुसार संरक्षक के नाम सहित खतौनी में संशोधन कर अभिलेखों को अधिक स्पष्ट और त्रुटिरहित बनाना है।
इसके साथ ही खसरा, खतौनी और भू-नक्शे में मौजूद लिपिकीय तथा अभिलेखीय गलतियों को साक्ष्यों और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर ठीक करने पर जोर दिया जाएगा।
अक्सर भूमि अभिलेखों में नाम, रकबे या नक्शे से संबंधित गलतियों के कारण किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ऐसे मामलों में राजस्व शिविर न्यायालयों के माध्यम से पात्र मामलों का समाधान आसान बनाने का प्रयास किया जाएगा।
अब किसान समझ सकेंगे अपने खेत की नाप और सीमाएं
इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भूमि की पैमाइश और हदबंदी है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राजस्व शिविरों में गाटे की भुजाओं की लंबाई और मुस्तकिल मुकाम यानी स्थायी पहचान बिंदु से उसकी दूरी के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
भूमि की पहचान और माप के लिए खसरा-खतौनी में दर्ज रकबा, भू-नक्शे में जमीन का आकार तथा वास्तविक कब्जे जैसे पहलुओं को समझना जरूरी है। किसानों को इन जानकारियों से परिचित कराने का उद्देश्य उन्हें अपनी जमीन की सीमाओं के प्रति जागरूक बनाना है, ताकि सीमा संबंधी गलतफहमियों को कम किया जा सके और अनावश्यक विवादों से बचा जा सके।
हालांकि, वास्तविक पैमाइश और कानूनी रूप से सीमा निर्धारित करने के लिए संबंधित राजस्व नियमों तथा अधिकृत प्रक्रिया का पालन आवश्यक होगा।
कुर्रा बंटवारे में निष्पक्षता और सहमति पर रहेगा जोर
संयुक्त खातेदारी वाली भूमि के बंटवारे से जुड़े मामलों में भी यह अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कुर्रा बंटवारे के अंतर्गत सहखातेदारों के अंश के अनुसार भूमि का विभाजन और आवंटन किया जाता है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि निर्विवाद और पात्र मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत निस्तारण को सुगम बनाया जाएगा।
बंटवारे के दौरान संबंधित पक्षों को रास्ते और सिंचाई के साधनों की समतुल्यता उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया जाएगा, ताकि किसी पक्ष के साथ अनुचित स्थिति उत्पन्न न हो।
इस पहल से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके बीच पुश्तैनी जमीन या संयुक्त खेती के बंटवारे को लेकर लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। हालांकि, जिन मामलों में पक्षकारों के बीच विवाद कायम है, उनमें नियमानुसार सुनवाई और निर्णय की प्रक्रिया जारी रहेगी।
धारा 38 के तहत अभिलेखीय त्रुटियों के सुधार पर भी ध्यान
राजस्व अभिलेखों में दर्ज गलतियों और छूटी हुई प्रविष्टियों के सुधार के लिए भी शिविर न्यायालयों के माध्यम से समाधान उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
रियल टाइम खतौनी या नक्शे में पहले से चली आ रही त्रुटियों को उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ठीक कराने की व्यवस्था पर काम किया जाएगा।
ऐसे मामलों में तहसीलदार अथवा उपजिलाधिकारी (न्यायिक) स्तर पर अधिकार क्षेत्र और नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इससे किसानों को अपने अभिलेख दुरुस्त कराने के लिए सही प्रक्रिया और संबंधित न्यायालय तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
आवेदन कहां और कैसे करें?
राजस्व विवादों के समाधान के इच्छुक किसान और काश्तकार अपने मामले का संक्षिप्त विवरण तथा उपलब्ध दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं।
इसके लिए निम्न माध्यम बताए गए हैं—
1. ग्राम पंचायत सहायक के माध्यम से आवेदन देना।
2. संबंधित लेखपाल के माध्यम से प्रकरण प्रस्तुत करना।
3. न्यायालय उपजिलाधिकारी (न्यायिक), तहसील उरई में सीधे आवेदन देना।
4. उपलब्ध आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यमों से संपर्क करना।
आवेदन में आवेदक का नाम, गांव का नाम, गाटा संख्या, विवाद का प्रकार, संबंधित पक्षकारों का विवरण और विवाद का संक्षिप्त ब्यौरा देना उपयोगी होगा। मामले से संबंधित खतौनी, भू-नक्शा, बैनामा, विरासत संबंधी दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्य भी संलग्न किए जा सकते हैं।
ध्यान दें:
आवेदन स्वीकार होने, सुनवाई की तारीख और निस्तारण की समय-सीमा की पुष्टि संबंधित राजस्व कार्यालय से अवश्य करें।
किसानों और युवाओं से जागरूकता फैलाने की अपील
प्रशासन की ओर से काश्तकारों से अपील की गई है कि वे छोटे-छोटे भूमि विवादों को आपसी बातचीत और सहमति से सुलझाने का प्रयास करें। वहीं, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और गांव के युवाओं से इस पहल की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का अनुरोध किया गया है।
इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्रामीणों तक सही जानकारी पहुंचे, पात्र मामलों की पहचान हो और आवेदन प्राप्त होने के बाद नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जमीन के विवाद केवल खेत की सीमाओं तक सीमित नहीं रहते, बल्कि कई बार परिवारों और पीढ़ियों के रिश्तों को भी प्रभावित करते हैं।
ऐसे में गांव में राजस्व शिविर न्यायालयों की पहल किसानों को राहत देने और भूमि अभिलेखों को दुरुस्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
जारीकर्ता:
रिंकू सिंह राही, आईएएस — उपजिलाधिकारी (न्यायिक), तहसील उरई, जनपद जालौन।
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Kalpi, Jalaun | Oct 14, 2026