सिंगटोली में बिजली विभाग के खिलाफ ग्रामीणों का मोर्चा! SDO निखिल जिंदल और JE विनीत सिसोदिया पर गंभीर आरोप, DM से निष्पक्ष जांच की मांग
घर-घर चेकिंग, बिजली कनेक्शन काटने और कथित अभद्रता से नाराज ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को सौंपा शिकायती पत्र; गरीब उपभोक्ताओं को परेशान करने और मुकदमों में फंसाने की आशंका जताई।
जनपद जालौन के ग्राम सिंगटोली एवं आसपास के क्षेत्रों में बिजली विभाग और विजिलेंस टीम की कथित कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है।
घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के साथ चेकिंग के दौरान अमर्यादित व्यवहार, घरों में प्रवेश, बिजली कनेक्शन काटने तथा अनावश्यक दबाव बनाने के आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत रखी है।
दिनांक 14 अक्टूबर 2026 को दिए गए शिकायती पत्र में SDO निखिल जिंदल और JE विनीत सिसोदिया सहित संबंधित टीम की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
चेकिंग के नाम पर उपभोक्ताओं को परेशान करने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि सिंगटोली और आसपास के गांवों में 3 किलोवाट से कम क्षमता वाले घरेलू विद्युत कनेक्शन धारकों के यहां चेकिंग के दौरान उपभोक्ताओं के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा।
शिकायत के मुताबिक, टीम के कर्मचारी घरों के अंदर प्रवेश कर जांच करते हैं और कुछ मामलों में बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई भी की जाती है।
इससे सामान्य एवं मध्यमवर्गीय परिवारों में भय और नाराजगी का माहौल होने की बात कही गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग को नियमों के तहत जांच और कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन कार्रवाई के दौरान कानूनी प्रक्रिया, उपभोक्ताओं की गरिमा और उनके अधिकारों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
अब सवाल यह है कि जांच के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं?
ग्रामीणों ने इसी बिंदु पर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
बिजली पावर हाउस के लिए जमीन देने का भी उठाया मुद्दा
शिकायती पत्र में ग्रामीणों ने पूर्व प्रधान गौरीशंकर द्वारा बिजली विभाग को पावर हाउस के लिए निशुल्क भूमि उपलब्ध कराने तथा अन्य ग्रामीणों के योगदान का भी उल्लेख किया है।
उनका आरोप है कि इसके बावजूद स्थानीय उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले केबल जलने की घटना का जिक्र करते हुए स्थानीय कर्मचारियों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं।
उनका दावा है कि केबल और बिजली लाइन से संबंधित घटनाओं की तस्वीरों एवं वीडियो के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले में विभागीय पक्ष सामने आना बाकी है।
पुराने विवाद और प्रतिशोध की भी जताई आशंका
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि SDO निखिल जिंदल और JE विनीत सिसोदिया की कार्यशैली को लेकर पहले भी समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित हुई थीं।
ग्रामीणों का दावा है कि वर्तमान कार्रवाई के पीछे पुराने विवादों का असर हो सकता है।
उन्होंने कथित फर्जी मुकदमों की जांच कराने और यदि किसी मामले में गलत कार्रवाई हुई हो तो नियमानुसार राहत देने की मांग की है।
यह आरोप ग्रामीणों की शिकायत पर आधारित हैं। अधिकारियों की भूमिका, कार्रवाई की वैधानिकता और कथित प्रतिशोध के दावों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जिलाधिकारी से ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि—
- सिंगटोली और आसपास के क्षेत्रों में हुई बिजली चेकिंग एवं छापेमारी की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- घरेलू परिसर में प्रवेश और जांच के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाए।
- अभद्रता या अनावश्यक दबाव बनाने की शिकायतों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
- बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई लागू नियमों के अनुसार की जाए और उपभोक्ताओं को आवश्यक विवरण दिया जाए।
- 3 किलोवाट से कम क्षमता वाले घरेलू कनेक्शनों पर की जा रही कार्रवाई की वैधानिकता की जांच हो।
- कथित गलत मुकदमों और कार्रवाई की समीक्षा कर पीड़ितों को नियमानुसार राहत दी जाए।
इन ग्रामीणों ने उठाई आवाज
शिकायती पत्र में अंजनी कुमार (जिला पंचायत सदस्य/पूर्व प्रधान प्रतिनिधि), गौरीशंकर, बृजेंद्र कुमार, धीरज, सुमित, गोलू, राधेश्याम, आयुष, शशिकांत और धीरेंद्र यादव भोला पाठक सहित अन्य ग्रामीणों के नाम शामिल बताए गए हैं।
पत्र पर अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं के नाम भी दर्ज हैं।
ग्रामीणों ने कहा है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी समस्या प्रशासन के सामने रख रहे हैं और उन्हें निष्पक्ष जांच के जरिए न्याय मिलने की उम्मीद है।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या होगी निष्पक्ष जांच?
सिंगटोली के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप कर मामले की जांच कराने की मांग की है।
अब देखना होगा कि प्रशासन और बिजली विभाग इन शिकायतों पर क्या कदम उठाते हैं तथा उपभोक्ताओं के आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
नोट:
यह खबर ग्रामीणों द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों एवं बिजली विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
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Kalpi, Jalaun | Oct 14, 2026