जिला प्रशासन और जीविका के संयुक्त तत्वावधान में 'वोकल फॉर लोकल' कार्यक्रम संपन्न, 64 संकुल संघों में दिखा आत्मनिर्भरता का जज्बा*
*छपरा (सारण)। 16 अक्टूबर 2026
* जिला प्रशासन और जीविका के संयुक्त तत्वावधान में सरकार के सेवा संकल्प अभियान के तहत आज सारण जिले के सभी 64 संकुल स्तरीय संघों में 'वोकल फॉर लोकल - मेरा उत्पाद, मेरी पहचान' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में जीविका दीदियों ने अपनी कला, हुनर और उद्यमिता का शानदार प्रदर्शन कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रभात फेरी के साथ हुई। इसके बाद 'मेरा उत्पाद, मेरी पहचान' थीम पर बनाई गई आकर्षक रंगोली और मेहंदी प्रतियोगिता ने सभी का मन मोह लिया। दीदियों की रचनात्मकता और उत्साह देखते ही बन रहा था।
*स्वाद और स्वावलंबन की प्रदर्शनी*
संकुल स्तर पर लगाई गई प्रदर्शनी आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। इसमें जीविका दीदियों द्वारा निर्मित सत्तू, अचार, पापड़, शुद्ध देशी घी, भूजा, मसाले, मोमबत्ती, स्वेटर, टोमेटो सॉस, बड़ी सहित दर्जनों शुद्ध एवं स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। आगामी छठ महापर्व को देखते हुए विशेष रूप से तैयार किए गए अर्घ्य पात, सूप और टोकरी ने भी खूब ध्यान खींचा।
इस दौरान दीदियों ने अपनी प्रेरणादायक यात्रा भी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे जीविका ने उन्हें सामाजिक पहचान, कौशल प्रशिक्षण और आर्थिक संबल देकर एक गृहिणी से सफल उद्यमी बनाया है। कई दीदियों ने जीविका सामुदायिक निधि से, तो कई ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना और बैंक लोन के सहयोग से अपने व्यवसाय को नई ऊंचाई दी है.
*दिघवारा की ललिता देवी:* ललिता देवी अब सर्फ और अगरबत्ती का निर्माण कर रही हैं और अपने परिवार के साथ-साथ अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार का जरिया बनी हैं।
*अमनौर की सुनंदा देवी:* जलालपुर की सुनंदा देवी ने जीविका से ऋण लेकर पत्तल-ग्लास निर्माण का कार्य शुरू किया। उन्होंने कहा, "जीविका के ऋण ने मुझे रोजगार दिया। आज जिला प्रशासन के सहयोग से सरकारी मेलों और बाजारों में स्टॉल मिलता है, जिससे मेरा व्यवसाय लगातार बढ़ रहा है।"
इस अवसर पर जिला परियोजना प्रबंधक, सारण ने कहा, "यह कार्यक्रम जिला प्रशासन और जीविका के सशक्त समन्वय का जीवंत उदाहरण है। हमारा उद्देश्य है कि 'वोकल फॉर लोकल' सिर्फ एक नारा न रहे, बल्कि सारण की हर जीविका दीदी की पहचान बने। जब प्रशासन का मार्गदर्शन और दीदियों का परिश्रम एक साथ आता है, तभी आत्मनिर्भर बिहार का सपना साकार होता है। सारण की दीदियां अब उत्पादक हैं, उद्यमी हैं।"
8 views | Saharsa, Bihar | Oct 16, 2026