मगध मेडिकल में कचरे का... ‘खेल’!
गया के मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल से सामने आई है मेडिकल वेस्ट के Nistaran निस्तारण में गंभीर लापरवाही की तस्वीर।
आरोप है कि अस्पताल से निकलने वाले मेडिकल कचरे को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के बजाय... अस्पताल परिसर में ही गड्ढे खोदकर जमीन के अंदर दबाया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि पिछले कई महीनों से यह सिलसिला जारी है... और परिसर में अब तक दस से अधिक जगहों पर गड्ढे खोदकर कचरा दबाए जाने की बात सामने आई है।
अगर ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे न सिर्फ़ पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है... बल्कि भूजल प्रदूषण और संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अस्पताल में सामान्य कचरे और बायोमेडिकल कचरे की अलग-अलग छंटाई और Nistaran निस्तारण की व्यवस्था का भी सही तरीके से पालन नहीं होने का आरोप है।
जानकारी के मुताबिक, सामान्य कचरे के साथ मेडिकल वेस्ट भी मिल जाता है। मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए Sinraji प्लांट मौजूद है।
लेकिन प्लांट के स्थानीय प्रतिनिधि का दावा है कि अस्पताल से वहां पहुंचने वाले कचरे में अक्सर सामान्य और मेडिकल कचरा मिला हुआ रहता है। इसकी वजह से मशीनों के संचालन में परेशानी आती है... और कई बार मशीन खराब होने की स्थिति भी सामने आती है।
वहीं, सबसे गंभीर दावा यह है कि अस्पताल से निकलने वाले कुल कचरे का बमुश्किल आधा हिस्सा ही प्लांट तक पहुंच रहा है।
बाकी कचरे को लेकर आरोप है कि उसे अस्पताल परिसर में ही अलग-अलग जगहों पर गड्ढे खोदकर जमीन में दबाया जा रहा है।
अगर ऐसा हो रहा है... तो यह अस्पताल की कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
नगर निगम के वार्ड नंबर 29 के पार्षद रणधीर कुमार गौतम ने इस मामले पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि उन्हें जानकारी मिली है कि पुराने मेडिकल सामान, इस्तेमाल की गई पट्टियां, एक्सपायरी दवाइयां और अन्य मेडिकल वेस्ट को गड्ढा खोदकर जमीन में दबाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर व्यवस्था जल्द दुरुस्त नहीं की गई... तो मोहल्लेवासियों के साथ आंदोलन किया जाएगा।
हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल कचरे को जमीन में दबाने के किसी भी आदेश से इनकार किया है। मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल ने कहा है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से मेडिकल कचरे को जमीन में दबाने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। उनके मुताबिक, अस्पताल की सफाई और कचरा Nistaran निस्तारण की पूरी जिम्मेदारी निजी एजेंसी की है।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी... और अगर जांच में प्रदूषण को बढ़ावा देने या नियमों की अनदेखी की बात सामने आती है, तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यह है कि आखिर अस्पताल परिसर में मेडिकल वेस्ट दबाए जाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है? क्या वाकई अस्पताल का पूरा मेडिकल कचरा निर्धारित प्लांट तक पहुंच रहा है? और अगर कचरा जमीन में दबाया जा रहा है... तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों का जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएगा।
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