हरदोई: सरकारी चकमार्ग पर कब्जे का आरोप, पैमाइश और पेड़ों की नीलामी के बाद भी नहीं खुला रास्ता
हरदोई। तहसील सदर के विकासखंड अहिरोरी क्षेत्र के ग्राम सलेमपुर (मजरा डही) में सरकारी चकमार्ग को अतिक्रमणमुक्त कराने और उस पर मिट्टी पटान का कार्य कराए जाने की मांग को लेकर किसान ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राजस्व विभाग द्वारा चकमार्ग की कई बार पैमाइश और निशानदेही कराए जाने के बावजूद रास्ते को पूरी तरह कब्जामुक्त नहीं कराया गया, जिससे किसानों को खेतों तक आने-जाने में परेशानी हो रही है।
शिकायतकर्ता डॉ. जयकरन निवासी सलेमपुर के मुताबिक गाटा संख्या 1838, जिसका रकबा 0.097 हेक्टेयर है तथा लंबाई करीब 205 मीटर और चौड़ाई 4 मीटर है, राजस्व अभिलेखों में चकमार्ग दर्ज है। आरोप है कि गांव के ही श्रीकृष्ण और सीताराम ने चकमार्ग की भूमि को अपने गाटा संख्या 1837 में मिलाकर कब्जा कर रखा है।
शिकायत के अनुसार पूर्व में आईजीआरएस और समाधान दिवस के माध्यम से शिकायत किए जाने के बाद राजस्व टीम ने 29 दिसंबर 2024 तथा 25 जुलाई 2025 को मौके पर पैमाइश और निशानदेही की। शिकायतकर्ता का कहना है कि इसके बाद चकमार्ग की सुपुर्दगी ग्राम प्रधान को भी की गई, लेकिन मौके पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
पेड़ों की नीलामी के बाद भी अटका काम
चकमार्ग पर मिट्टी पटान का कार्य कराने के लिए वहां खड़े यूकेलिप्टस के पेड़ों को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। शिकायत में बताया गया है कि सामाजिक वानिकी वन प्रभाग, हरदोई द्वारा पेड़ों का मूल्यांकन 3,565 रुपये किया गया। इसके बाद 8 जनवरी 2026 को ग्राम पंचायत डही की खुली बैठक में पेड़ों की सार्वजनिक नीलामी कराई गई।
शिकायतकर्ता के मुताबिक नीलामी में सर्वाधिक बोली लगाने वाले ठेकेदार पूरन ने 4,100 रुपये ग्राम निधि के ओएसआर खाते में 19 जनवरी 2026 को जमा कर दिए। इसके बाद पेड़ों को कटवाने के लिए ठेकेदार द्वारा प्राधिकार पत्र और पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।
कोर्ट में मुकदमे का हवाला देकर अनुमति रोकने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि खंड विकास अधिकारी अहिरोरी की ओर से सिविल कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन होने का हवाला देते हुए पेड़ कटवाने की अनुमति नहीं दी गई। वहीं शिकायत में दावा किया गया है कि सिविल जज (जू.डि.) पश्चिमी, हरदोई के न्यायालय में वाद संख्या 1578/2025 विचाराधीन है, लेकिन चकमार्ग संख्या 1838 पर मिट्टी पटान अथवा सरकारी कार्य को लेकर कोई प्रभावी स्थगन आदेश नहीं है।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि गाटा संख्या 1837 से संबंधित पूर्व अंतरिम आदेश की अवधि समाप्त हो चुकी है और उसका चकमार्ग संख्या 1838 पर मिट्टी पटान के कार्य से कोई संबंध नहीं है।
किसानों के सामने आवागमन का संकट
शिकायतकर्ता का कहना है कि चकमार्ग अवरुद्ध होने के कारण किसानों को अपने खेतों तक कृषि उपकरण ले जाने और फसल को घर तक लाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर विभिन्न प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद चकमार्ग को वास्तविक रूप से कब्जामुक्त कराकर निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया जा सका है।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप करते हुए संबंधित अधिकारियों को चकमार्ग को अतिक्रमणमुक्त कराने, नीलाम किए गए पेड़ों को नियमानुसार हटवाने और मनरेगा कार्ययोजना के तहत चकमार्ग पर मिट्टी पटान का कार्य कराने के निर्देश देने की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे क्षेत्र के किसानों को आवागमन की स्थायी सुविधा मिल सकेगी।