कलाम को सलाम
यमुनानगर, 15 अक्तूबर-भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की सबसे बड़ी विरासत कोई भौतिक धन-संपत्ति नहीं, बल्कि उनका ज्ञान, सादगी और शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण है। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया एपीजे अब्दुल कलाम आजाद सिर्फ मिसाइल मैन ही नहीं थे एक बेहतरीन शिक्षक, कवि और बच्चों के प्रेरणा स्त्रोत भी थे।
उन्होंने बताया कि 9 अप्रैल 2003 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने यमुनानगर के प्रतापनगर में स्थित हर्बल नेचर पार्क का उद्घाटन किया था इस दौरान डॉ. कलाम ने अपने हाथों से इस हर्बल पार्क में रुद्राक्ष का एक पौधा रोपा था, जो अब एक बड़े पेड़ का रूप ले चुका है और उस पर रुद्राक्ष भी लगते हैं।
उन्होंने बताया कि जिस कुर्सी पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर अब्दुल कलाम बैठे थे वह उसी दिन से विभाग द्वारा रिजर्व कर दी गई थी। जो कि आज भी हर्बल पार्क के रेस्ट हाउस भी सुरक्षित रखी हुई है। कुर्सी पर डॉक्टर अब्दुल कलाम के नाम की प्लेट भी लगी हुई है। कुर्सी को उनकी याद में रखा हुआ है। इस कुर्सी पर किसी को भी बैठने की अनुमति नहीं है।
उन्होंने टांगों में लगाए जाने वाले हल्के कैलिपर का विकास करने में निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, हैदराबाद के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एल. नरेंद्र नाथ और डॉ. बी. एन. प्रसाद ने मुख्य रूप से सहयोग किया था। इस हल्के वजन के कैलिपर के कारण पोलियो से प्रभावित बच्चों और मरीजों को चलने-फिरने, दौड़ने और साइकिल चलाने में बहुत आसानी हुई। उन्हें भारी-भरकम लोहे और चमड़े के जूतों से मुक्ति मिल गई।
सदस्य शालिनी शर्मा मोनिका रानी, पूनम अग्रवाल ने बताया महिला एवं बाल विकास के मिशन वात्सल्य के तहत बाल देखरेख संस्थान में बच्चों को महापुरुषों की जीवन यात्रा से परिचय कराया जाता है देश भर के स्कूलों और कॉलेजों का दौरा करते थे, बच्चों से संवाद करते थे और उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते थे एक व्याख्यान देते हुए ही उनका निधन हुआ था, वे अंतिम सांस तक एक शिक्षक की भूमिका में रहे हर बच्चे को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।