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विशेष रिपोर्ट: पटना में 112 करोड़ का 'मोदी मंदिर' बनाने का प्रस्ताव, पक्ष और विपक्ष में बंटी राय
स्थान: नई दिल्ली / पटना
मुख्य समाचार:
राजधानी दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड के प्रतिनिधियों द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान श्रीराम के स्वरूप में दर्शाते हुए उनके कटआउट की पूजा-अर्चना की गई, 'श्री नरेंद्र मोदी चालीसा' का पाठ किया गया और पटना में उनका मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा गया। हालाँकि, इस कदम को लेकर समाज और राजनीति में दो अलग-अलग पहलू देखने को मिल रहे हैं।
घटना का पहला पहलू (समर्थकों और आयोजकों का पक्ष):
अधिकारों के प्रति आभार: बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड के सदस्य डॉ. राजन सिंह और आयोजकों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा 2019 में लागू किए गए ट्रांसजेंडर राइट्स एक्ट और विभिन्न सामाजिक योजनाओं से किन्नर समाज को समाज में मुख्यधारा और सम्मान मिला है।
आराध्य के रूप में सम्मान: आयोजकों के अनुसार, किन्नर समाज पीएम मोदी को अपना आराध्य मानता है। इसी कड़ी में पटना (बिहार) में 5 एकड़ ज़मीन पर लगभग ₹112 करोड़ की लागत से पीएम मोदी का भव्य मंदिर और आदमकद मूर्ति स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
घटना का दूसरा पहलू (आलोचकों और विपक्षी नेताओं का पक्ष):
व्यक्ति पूजा पर सवाल: आलोचकों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जीवित व्यक्तियों का मंदिर बनाना या उन्हें भगवान का दर्जा देना 'व्यक्ति पूजा' (Hero Worship) को बढ़ावा देता है, जो सही परंपरा नहीं है।
संसाधनों के इस्तेमाल पर बहस: विरोधी पक्षों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मंदिर निर्माण में ₹112 करोड़ जैसी बड़ी राशि खर्च करने के बजाय यदि यह फंड किन्नर समुदाय के शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और पुनर्वास योजनाओं पर खर्च किया जाए, तो इससे समुदाय का वास्तविक और दीर्घकालिक कल्याण होगा।
पीएम मोदी का रुख: पूर्व में जब भी समर्थकों द्वारा पीएम मोदी का मंदिर बनाने का प्रयास किया गया है, स्वयं प्रधानमंत्री ने इसे अपनी विचारधारा के खिलाफ बताते हुए ऐसे कदमों का विरोध किया है और लोगों से अपना ध्यान जनकल्याण कार्यों में लगाने की अपील की है।
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