ANMMCH की इमरजेंसी में मचा बवाल! अंदर जाने को लेकर गार्ड-परेजनों में भिड़ंत, हाथापाई के बाद CCTV जांच पर टिकी निगाहें
गया। अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (ANMMCH) की इमरजेंसी में सोमवार को मरीज के इलाज के दौरान गार्ड और उसके परिजनों के बीच विवाद का मामला सामने आया। इमरजेंसी वार्ड में एक साथ अधिक संख्या में परिजनों के पहुंचने और अंदर जाने को लेकर रोकने की बात पर विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते मामला कहासुनी से बढ़कर हाथापाई तक पहुंच गया। घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और गार्डों के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि इमरजेंसी वार्ड में एक मरीज का इलाज चल रहा था। इसी दौरान मरीज के काफी संख्या में परिजन एक साथ इमरजेंसी वार्ड में पहुंच गए।
वार्ड में भीड़ बढ़ने के कारण सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे गार्डों ने परिजनों से दो-दो करके अंदर जाने की बात कही। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। मरीज के परिजनों की ओर से आरोप लगाया गया कि गार्डों ने उनके साथ बदसलूकी की और रौब दिखाया। परिजनों और गार्डों के बीच बढ़ते विवाद के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और दोनों पक्षों के बीच हाथापाई होने लगी। घटना के बाद कुछ देर के लिए अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
हालांकि, पूरे मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से अलग पक्ष सामने आया है। मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आनंद कुमार प्रकाश आनंद ने बताया कि इमरजेंसी वार्ड में मरीज का इलाज चल रहा था। इसी कारण मरीज के काफी संख्या में परिजन एक साथ वहां आ गए थे। भीड़ को देखते हुए गार्डों की ओर से परिजनों को दो-दो करके अंदर जाने के लिए कहा गया था।
अधीक्षक ने बताया कि इसी दौरान परिजनों की ओर से गार्डों पर हाथ छोड़ दिया गया। इसके बाद दोनों तरफ से हल्की-फुल्की मारपीट हुई। उन्होंने कहा कि फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से कोई लिखित आवेदन अस्पताल प्रशासन को नहीं दिया गया है।
अधीक्षक डॉ. आनंद कुमार प्रकाश आनंद ने स्पष्ट किया कि यदि किसी पक्ष की ओर से लिखित आवेदन प्राप्त होता है तो पूरे मामले की जांच की जाएगी। अस्पताल में लगे CCTV कैमरों के फुटेज की जांच कर घटना की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाएगा। जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इमरजेंसी जैसे संवेदनशील वार्ड में मरीजों के इलाज के दौरान भीड़ को नियंत्रित करना अस्पताल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है। गंभीर मरीज के परिजन स्वाभाविक रूप से इलाज की जानकारी लेने और मरीज के पास रहने की कोशिश करते हैं। दूसरी ओर, अत्यधिक भीड़ होने से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के काम में बाधा उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में सुरक्षा कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
लेकिन इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि भीड़ नियंत्रण के दौरान सुरक्षा कर्मियों और मरीजों के परिजनों के बीच संवाद किस तरह किया जा रहा है। अस्पताल परिसर में विवाद की स्थिति बनने से न केवल सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि वहां इलाज करा रहे दूसरे मरीजों और उनके परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लोगों का कहना है कि अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होना जरूरी है, लेकिन मरीजों और उनके परिजनों के साथ संवेदनशील एवं संयमित व्यवहार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वहीं, अस्पताल प्रशासन का पक्ष है कि इमरजेंसी में व्यवस्था बनाए रखने के लिए भीड़ को नियंत्रित करना आवश्यक है।
अब पूरे मामले में CCTV फुटेज अहम साबित हो सकता है। यदि शिकायत दर्ज होती है तो फुटेज के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि विवाद की शुरुआत किस बात को लेकर हुई और हाथापाई की स्थिति कैसे बनी। इससे दोनों पक्षों के दावों की वास्तविकता सामने आने की उम्मीद है।
फिलहाल मामले में किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत नहीं दिए जाने की बात अस्पताल अधीक्षक ने कही है। ऐसे में आगे की कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद ही होने की संभावना है। घटना ने एक बार फिर अस्पतालों में मरीजों के परिजनों की भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत को सामने ला दिया है।
अब देखना होगा कि यदि लिखित आवेदन दिया जाता है तो अस्पताल प्रशासन CCTV फुटेज के आधार पर किस तरह की कार्रवाई करता है। फिलहाल घटना को लेकर अस्पताल परिसर में चर्चा बनी हुई है और लोगों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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