पेड़ों और सैनिक भाइयों की कलाई पर राखी, प्रकृति और देश की रक्षा का संकल्प: गया में महिलाओं ने अनोखे अंदाज में मनाया रक्षाबंधन
गया। रक्षाबंधन का पर्व आमतौर पर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और सुरक्षा के संकल्प के लिए जाना जाता है, लेकिन बिहार के गया में महिलाओं ने इस पर्व को पर्यावरण संरक्षण और देश की रक्षा से जोड़कर एक अनोखी मिसाल पेश की। रक्षाबंधन के मौके पर शहर की सैकड़ों महिलाएं गाजे-बाजे के साथ ब्रह्मयोनि पहाड़ पहुंचीं और वहां मौजूद पेड़ों को राखी बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया। महिलाओं ने पेड़ों की पूजा-अर्चना की, आरती उतारी और उन्हें गले लगाकर प्रकृति बचाने का संदेश दिया।
सुबह होते ही बड़ी संख्या में महिलाएं राखी की थाल सजाकर अपने घरों से निकलीं। थाल में राखी के साथ मिठाई, कुमकुम, पूजा सामग्री और अन्य सामान रखा गया था। ब्रह्मयोनि पहाड़ के पास पहुंचने के बाद महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा की। नारियल फोड़कर रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत की गई। इसके बाद महिलाओं ने अलग-अलग पेड़ों को राखी बांधी और उनकी आरती उतारी। इस दौरान पूरा क्षेत्र ‘जय पर्यावरण’ के नारों से गूंज उठा।
पेड़ों को भाई मानकर बांधी राखी
महिलाओं का कहना था कि पेड़ केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन के सच्चे रक्षक हैं। पेड़ हमें ऑक्सीजन देते हैं, वातावरण को स्वच्छ रखते हैं और आने वाली पीढ़ियों के जीवन को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में जिस तरह भाई की रक्षा का संकल्प रक्षाबंधन पर लिया जाता है, उसी तरह पेड़ों की रक्षा का संकल्प लेना भी जरूरी है।
स्थानीय महिला राखी गुप्ता ने कहा कि वे पेड़ों को भाई मानकर राखी बांध रही हैं। उन्होंने बताया कि ब्रह्मयोनि पहाड़ और उसकी तलहटी में स्थानीय लोगों द्वारा सैकड़ों पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों की देखभाल का भी संकल्प लिया गया है, ताकि वे सूखें नहीं और आने वाली पीढ़ियों को हरियाली से भरपूर वातावरण मिल सके।
महिलाओं ने कहा कि यदि पेड़ सुरक्षित रहेंगे, तभी मानव जीवन सुरक्षित रहेगा। इसलिए पेड़ों को राखी बांधना केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति की रक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास है।
सैनिकों को भी बांधी राखी, खिलाई मिठाई
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के बाद महिलाओं ने गया ऑफिसर्स ट्रेनिंग सेंटर (ओटीए) में कार्यरत सेना के जवानों को भी राखी बांधी। महिलाओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें मिठाई खिलाई। जवानों के चेहरे पर भी इस मौके पर खुशी दिखाई दी।
सेना के जवान सागर सिंह ने कहा कि स्थानीय महिलाओं द्वारा राखी बांधे जाने से उन्हें बहुत अच्छा लगा। उन्होंने बताया कि वे पंजाब के रहने वाले हैं और रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर अपने परिवार से दूर हैं। लेकिन गया की महिलाओं ने जब उन्हें राखी बांधी तो उन्हें परिवार से दूर होने का एहसास नहीं हुआ। उन्होंने महिलाओं की रक्षा का वचन भी दिया।
सैनिक भाइयों को भी बांधी राखी, खिलाई मिठाई
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के बाद महिलाओं ने गया ऑफिसर्स ट्रेनिंग सेंटर (ओटीए) में कार्यरत सेना के जवानों को भी राखी बांधी। महिलाओं ने सैनिक भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें मिठाई खिलाई। जवानों के चेहरे पर भी इस मौके पर खुशी दिखाई दी। सेना के जवान सागर सिंह ने कहा कि स्थानीय महिलाओं द्वारा राखी बांधे जाने से उन्हें बहुत अच्छा लगा। उन्होंने बताया कि वे पंजाब के रहने वाले हैं और रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर अपने परिवार से दूर हैं। लेकिन गया की महिलाओं ने जब उन्हें राखी बांधी तो उन्हें परिवार से दूर होने का एहसास नहीं हुआ। उन्होंने महिलाओं और देश की रक्षा का वचन भी दिया।
पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार काम कर रहा ग्रुप
गया में पर्यावरण संरक्षण को लेकर मॉर्निंग वॉकर्स ग्रुप के सदस्य लंबे समय से काम कर रहे हैं। ब्रह्मयोनि पहाड़ पर इनके प्रयासों से हजारों पौधे लगाए गए हैं। सिर्फ पौधे लगाने तक ही सीमित नहीं रहते हुए उनके संरक्षण और देखभाल की व्यवस्था भी की गई है। समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जाता है।
महिलाओं का कहना था कि आज पर्यावरण के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। बढ़ता प्रदूषण, पेड़ों की कटाई और हरियाली में कमी का सीधा असर मानव जीवन पर पड़ता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण की रक्षा की जिम्मेदारी समझनी होगी।
‘पेड़ हमारी रक्षा करते हैं, अब हमारी बारी’
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि पेड़ हमेशा से मनुष्य की रक्षा करते आए हैं। वे गर्मी में छाया देते हैं, हवा को शुद्ध करते हैं और प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए रक्षाबंधन के अवसर पर पेड़ों को राखी बांधकर उन्होंने यह संदेश दिया कि अब पेड़ों की रक्षा करना भी समाज की जिम्मेदारी है।
गया की महिलाओं का यह अनोखा रक्षाबंधन समारोह भाई-बहन के रिश्ते से आगे बढ़कर मानव और प्रकृति के रिश्ते की मजबूत तस्वीर पेश करता नजर आया। पेड़ों की कलाई पर बंधी राखियां केवल धागे नहीं थीं, बल्कि हरियाली बचाने, पौधों की देखभाल करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के संकल्प का प्रतीक बनीं।
गया की महिलाओं का यह अनोखा रक्षाबंधन समारोह भाई-बहन के रिश्ते से आगे बढ़कर मानव, प्रकृति और देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के रिश्ते की मजबूत तस्वीर पेश करता नजर आया। पेड़ों और सैनिक भाइयों की कलाई पर बंधी राखियां केवल धागे नहीं थीं, बल्कि हरियाली बचाने, पौधों की देखभाल करने और देश की सुरक्षा के प्रति सम्मान व संकल्प का प्रतीक बनीं।
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