परमात्मा की प्राप्ति का एकमात्र साधन भगवन्नाम संकीर्तन : आचार्य रामानंद दास महाराज। संवाद
भागवत कथा के दूसरे दिन परीक्षित प्रसंग सुनाया, कथा श्रवण के लिए उमड़े श्रद्धालु
कोंच। बल्दाऊ धर्मशाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के दूसरे दिन मंगलवार को कथा प्रवक्ता आचार्य रामानंद दास महाराज ने भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा की प्राप्ति का एकमात्र साधन भगवन्नाम संकीर्तन है। भागवत महापुराण भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात श्रीविग्रह है। जिस प्रकार जीव के लिए भगवान की शरणागति आवश्यक है, उसी प्रकार भागवत की शरण में आना भी जरूरी है।
व्यवसायी कमलेश गिरवासिया द्वारा संयोजित कथा में व्यास पीठ से कथा प्रवक्ता ने परीक्षित प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि महाराज परीक्षित समस्त भूमंडल के एकछत्र राजा थे। ब्राह्मण के श्राप से सात दिन में तक्षक के दंश से मृत्यु होने की बात पता चलने पर उन्होंने अपना राजपाट पुत्र जन्मेजय को सौंप दिया और गंगा तट पर आसनस्थ हो गए। वहां संतों की संगति और परमात्मा के चिंतन के बीच उनके मन में यह प्रश्न उठा कि जीवन की अंतिम परिणति के समय मनुष्य को क्या करना चाहिए।आचार्य रामानंद दास ने बताया कि तभी भगवान शुकदेवजी वहां प्रकट हुए। महाराज परीक्षित ने उनसे भी यही प्रश्न किया। उन्होंने कहा कि वेद, शास्त्र और पुराणों में भगवान की प्राप्ति का मार्ग बताया गया है। प्रह्लाद ने भी अपने पिता हिरण्यकश्यपु को श्रवण, कीर्तन, विष्णु स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन को भक्ति के साधन बताए थे। अंत में परीक्षित संतोष गिरवासिया और अर्चना ने भागवत जी की आरती उतारी। श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान कमलेश गिरवासिया, संजू गिरवासिया आदि व्यवस्थाओं में लगे रहे।
Konch, Jalaun | Sep 15, 2026