गिद्धौर सांस्कृतिक महोत्सव में खाली रह गई कुर्सियां, तालियां भी हुई फीकी || Jamui Hunt Media
• Report: Abhishek Kumar Jha
गिद्धौर की धरती पर आयोजित दो दिवसीय गिद्धौर सांस्कृतिक महोत्सव में दर्शकों के लिए लगाई गई सैकड़ों कुर्सियां कार्यक्रम के घटते गुणवत्ता की गवाही दे गई। स्थानीय लोगों में महोत्सव के आयोजन को लेकर एक तरफ खुशी है कि उनकी ऐतिहासिक विरासत का उत्सव जीवंत है, तो दूसरी तरफ मन में एक गहरी टीस भी है। कार्यक्रम देखने आए सरसा गांव से आए एक बुजुर्ग बीते दौर को याद करते हुए बताते हैं कि इसी गिद्धौर महोत्सव के मंच पर राष्ट्रीय स्तर के नामचीन सितारे, लोकगायक और शास्त्रीय फनकार अपनी प्रस्तुति से पूरी रात को संगीतमय बना देते थे। दूर-दराज से लोग खचाखच भीड़ में रात भर बैठकर कला का रसपान करते थे,लेकिन साल दर साल तस्वीर बदली-बदली सी लगने लगी है। वो कहते हैं कि, स्थानीय कलाकारों के आवेदन को आमंत्रित करके मुख्य मंच पर दूसरे राज्य के युवा कलाकारों को उतारने से कार्यक्रम की गुणवत्ता भी बिगड़ रही है। अब न वो सुर, न वो जादू, जो कभी गिद्धौर की पहचान हुआ करती थी। स्थानीय लोगों ने गिद्धौर महोत्सव के पुराने वैभव को पुनर्स्थापित करने की बात कही है।
Jamui, Jamui | Oct 17, 2026