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अपने हिस्से की जमीन के लिए भटक रहा है पीड़ित।सजग बिहार / SB Live #जमीनीविवाद #जमीनीविवादबेगूसराय

Dandari, Begusarai | Mar 21, 2026

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सुल्तानगंज के प्राचीन और ऐतिहासिक नाम
संवाददाता मुकेश कुमार  सुल्तानगंज
अजगैबीनाथ धाम (Ajgaibinath Dham): यह सुल्तानगंज का सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध पौराणिक नाम है। यहाँ गंगा नदी के बीच में एक विशाल चट्टान पर बाबा अजगैबीनाथ (शिव) का अति प्राचीन मंदिर स्थित है। इसी कारण इस क्षेत्र को युगों से अजगैबीनाथ धाम कहा जाता रहा है।

जहांगीरा / जाह्नवी-गिरि (Jahangira /Jahnu-Giri): पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ जह्नु ऋषि का आश्रम था। जब गंगाजी के वेग से उनके तप में बाधा पड़ी, तो उन्होंने गंगा को पी लिया था। बाद में देवताओं के आग्रह पर उन्होंने गंगा को पुनः मुक्त किया, जिससे गंगा का नाम जाह्नवी पड़ा। जह्नु मुनि के नाम पर इस जाह्नवी-गिरि (जह्नु स्थान को जहांग ऋषि की पहाड़ ↓ कहा गयाहिरण्यपुरी (Hiranyapuri): प्राचीन ग्रंथों और स्थानीय ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, मुगल शासकों के आने से पूर्व इस क्षेत्र को हिरण्यपुरी नाम से भी जाना जाता था।

अंग प्रदेश का भागः महाभारत काल में यह क्षेत्र अंग देश का हिस्सा था, जिसके राजा दानवीर कर्ण थे।नाम 'सुल्तानगंज' कैसे पड़ा?मध्यकाल (मुगल काल) के दौरान सल्तनत और मुगल शासकों के प्रभाव में आने के बाद, यहाँ व्यापारिक गतिविधियों और सुल्तान के नाम पर इस कस्बे का नाम बदलकर 'सुल्तानगंज' कर दिया गया।

 सुल्तानगंज का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

उत्तरवाहिनी गंगाः सुल्तानगंज में पवित्रगंगा नदी उत्तर दिशा की ओर बहती है, जिसे 'उत्तरवाहिनी गंगा' कहा जाता है। सनातन परंपरा में उत्तरवाहिनी गंगा को अत्यंत पवित्र माना जाता है।

...

विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला: हर साल सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु (कांवड़िये) सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ घाट से उत्तरवाहिनी गंगा का जल भरकर 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय करके झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक करने जाते हैं।

गुप्तकालीन सुल्तानगंज बुद्ध (Sultanganj Buddha): 1861 में रेलवे

निर्माण के दौरान सुल्तानगंज से गुप्त-पाल काल (5वीं-7वीं शताब्दी) की तांबे की बनी 2.3 मीटर ऊंची और लगभग 500 किलोग्राम वजनी भगवान बुद्ध की दुर्लभप्रतिमा मिली थी। यह प्रतिमा वर्तमान में ब्रिटेन के बर्मिंघम म्यूजियम में रखी हुई है।

वर्तमान स्थितिः वर्तमान में सुल्तानगंज का नामबदलकर आधिकारिक रूप से "बाबा अजगैबीनाथ धाम" करने का प्रस्ताव बिहार सरकार और रेल मंत्रालय के विचारधीन है, तथा स्थानीय लोग व नगर परिषद इसे इसी नाम से पुकारते हैं

सुल्तानगंज के प्राचीन और ऐतिहासिक नाम संवाददाता मुकेश कुमार सुल्तानगंज अजगैबीनाथ धाम (Ajgaibinath Dham): यह सुल्तानगंज का सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध पौराणिक नाम है। यहाँ गंगा नदी के बीच में एक विशाल चट्टान पर बाबा अजगैबीनाथ (शिव) का अति प्राचीन मंदिर स्थित है। इसी कारण इस क्षेत्र को युगों से अजगैबीनाथ धाम कहा जाता रहा है। जहांगीरा / जाह्नवी-गिरि (Jahangira /Jahnu-Giri): पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ जह्नु ऋषि का आश्रम था। जब गंगाजी के वेग से उनके तप में बाधा पड़ी, तो उन्होंने गंगा को पी लिया था। बाद में देवताओं के आग्रह पर उन्होंने गंगा को पुनः मुक्त किया, जिससे गंगा का नाम जाह्नवी पड़ा। जह्नु मुनि के नाम पर इस जाह्नवी-गिरि (जह्नु स्थान को जहांग ऋषि की पहाड़ ↓ कहा गयाहिरण्यपुरी (Hiranyapuri): प्राचीन ग्रंथों और स्थानीय ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, मुगल शासकों के आने से पूर्व इस क्षेत्र को हिरण्यपुरी नाम से भी जाना जाता था। अंग प्रदेश का भागः महाभारत काल में यह क्षेत्र अंग देश का हिस्सा था, जिसके राजा दानवीर कर्ण थे।नाम 'सुल्तानगंज' कैसे पड़ा?मध्यकाल (मुगल काल) के दौरान सल्तनत और मुगल शासकों के प्रभाव में आने के बाद, यहाँ व्यापारिक गतिविधियों और सुल्तान के नाम पर इस कस्बे का नाम बदलकर 'सुल्तानगंज' कर दिया गया। सुल्तानगंज का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व उत्तरवाहिनी गंगाः सुल्तानगंज में पवित्रगंगा नदी उत्तर दिशा की ओर बहती है, जिसे 'उत्तरवाहिनी गंगा' कहा जाता है। सनातन परंपरा में उत्तरवाहिनी गंगा को अत्यंत पवित्र माना जाता है। ... विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला: हर साल सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु (कांवड़िये) सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ घाट से उत्तरवाहिनी गंगा का जल भरकर 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय करके झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक करने जाते हैं। गुप्तकालीन सुल्तानगंज बुद्ध (Sultanganj Buddha): 1861 में रेलवे निर्माण के दौरान सुल्तानगंज से गुप्त-पाल काल (5वीं-7वीं शताब्दी) की तांबे की बनी 2.3 मीटर ऊंची और लगभग 500 किलोग्राम वजनी भगवान बुद्ध की दुर्लभप्रतिमा मिली थी। यह प्रतिमा वर्तमान में ब्रिटेन के बर्मिंघम म्यूजियम में रखी हुई है। वर्तमान स्थितिः वर्तमान में सुल्तानगंज का नामबदलकर आधिकारिक रूप से "बाबा अजगैबीनाथ धाम" करने का प्रस्ताव बिहार सरकार और रेल मंत्रालय के विचारधीन है, तथा स्थानीय लोग व नगर परिषद इसे इसी नाम से पुकारते हैं

Dandari, Begusarai | Aug 6, 2026

तिलरथ ।तारुणि तारण नाट्य समिति बेगूसराय द्वारा राजकीय कृत मध्य विद्यालय अनुसूचित पोखरिया,
संवाददाता मुकेश कुमार बेगूसराय

 बेगूसराय में 12 दिवसीय नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया गया; जिसमें इसी विद्यालय के 20 छात्राओं ने अभिनय, नृत्य और गायन का बारीकी से प्रशिक्षण लिया एवं सीखा। आए हुए गणमान्य अतिथियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया एवं बच्चों को सर्टिफिकेट प्रदान की गई।  6 अगस्त 2026 को विद्यालय में ही मिथिलेश कुमार उर्फ मिथिलेश 'कान्ति' के लेखन - निर्देशन में 'भाग्योदय' नाटक की प्रस्तुति दी। विशिष्ट अतिथि बेगूसराय जिला कला - युवा एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री श्याम कुमार सहनी, वरिष्ठ रंग- निर्देशक अनिल पतंग, दिलीप सिन्हा अरविंद कुमार सिन्हा, देवेंद्र कुंवर, अब्दुल्लाह निज़ामी, सदन कुमार, प्रधानाध्यापिका उषा शर्मा और युवा रंगकर्मी मनोज कुमार की उपस्थिति गरिमामय रहीं। जिला कला पदाधिकारी श्याम कुमार सहनी ने कहा कि विद्यालय में इस तरह का नाट्य कार्यशाला बच्चों की प्रतिभा और रंगमंच के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने का एक अच्छा साधन है और समाज का दर्पण भी; तो वरिष्ठ रंग - निर्देशक अनिल पतंग ने कहा तारुणि तारण नाट्य समिति बेगूसराय द्वारा विभिन्न विद्यालयों में नाटक प्रस्तुति और कार्यशाला करके बच्चों में उज्जवल भविष्य की संभावना व्यक्त कर देता है, तो वरिष्ठ रंगकर्मी और समाजसेवी दिलीप सिन्हा ने कहा, 'बच्चों को उज्ज्वल भविष्य के लिए रंगमंच अति आवश्यक है, अरविंद कुमार सिन्हा ने कहा बच्चों की सर्वांगीण विकास के लिए नाटक कला अति आवश्यक है, विद्यालय की प्रधानाध्यापिका महोदया उषा शर्मा ने कहा, मैं बच्चों में कला सृजन करने हेतु हमेशा तत्पर हूं और जहां तक संभव होगा मैं आप लोगों को सहयोग करती रहूंगी। जन गायक देवेंद्र कुंवर ने कहा, बच्चों नाटक से जुड़कर जीने का तरीका सीख लेता है, अब्दुल्लाह निज़ामी ने कहा, नाटक जीवन में अति आवश्यक है और विशेष करके बच्चों में नाट्य कला अति आवश्यक है। नाट्य कार्यशाला निर्देशक मिथिलेश कुमार उर्फ मिथिलेश 'कान्ति' ने कहा, मेरी कोशिश है, बच्चों में नाट्य कला के प्रति जागरूक करना, ताकि वह नाटक को भी अपने जीवन में एक आधार बना सके। मौके पर वरिष्ठ रंगकर्मी सदन कुमार और युवा रंगकर्मी मनोज कुमार ने भी विभिन्न तरह से बच्चों को नाट्य कला के संबंध में बताएं। 'भाग्योदय' नाटक देखकर दर्शक काफ़ी मन मुग्ध हो गए और खूब तालियां बजाईं।

तिलरथ ।तारुणि तारण नाट्य समिति बेगूसराय द्वारा राजकीय कृत मध्य विद्यालय अनुसूचित पोखरिया, संवाददाता मुकेश कुमार बेगूसराय बेगूसराय में 12 दिवसीय नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया गया; जिसमें इसी विद्यालय के 20 छात्राओं ने अभिनय, नृत्य और गायन का बारीकी से प्रशिक्षण लिया एवं सीखा। आए हुए गणमान्य अतिथियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया एवं बच्चों को सर्टिफिकेट प्रदान की गई। 6 अगस्त 2026 को विद्यालय में ही मिथिलेश कुमार उर्फ मिथिलेश 'कान्ति' के लेखन - निर्देशन में 'भाग्योदय' नाटक की प्रस्तुति दी। विशिष्ट अतिथि बेगूसराय जिला कला - युवा एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री श्याम कुमार सहनी, वरिष्ठ रंग- निर्देशक अनिल पतंग, दिलीप सिन्हा अरविंद कुमार सिन्हा, देवेंद्र कुंवर, अब्दुल्लाह निज़ामी, सदन कुमार, प्रधानाध्यापिका उषा शर्मा और युवा रंगकर्मी मनोज कुमार की उपस्थिति गरिमामय रहीं। जिला कला पदाधिकारी श्याम कुमार सहनी ने कहा कि विद्यालय में इस तरह का नाट्य कार्यशाला बच्चों की प्रतिभा और रंगमंच के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने का एक अच्छा साधन है और समाज का दर्पण भी; तो वरिष्ठ रंग - निर्देशक अनिल पतंग ने कहा तारुणि तारण नाट्य समिति बेगूसराय द्वारा विभिन्न विद्यालयों में नाटक प्रस्तुति और कार्यशाला करके बच्चों में उज्जवल भविष्य की संभावना व्यक्त कर देता है, तो वरिष्ठ रंगकर्मी और समाजसेवी दिलीप सिन्हा ने कहा, 'बच्चों को उज्ज्वल भविष्य के लिए रंगमंच अति आवश्यक है, अरविंद कुमार सिन्हा ने कहा बच्चों की सर्वांगीण विकास के लिए नाटक कला अति आवश्यक है, विद्यालय की प्रधानाध्यापिका महोदया उषा शर्मा ने कहा, मैं बच्चों में कला सृजन करने हेतु हमेशा तत्पर हूं और जहां तक संभव होगा मैं आप लोगों को सहयोग करती रहूंगी। जन गायक देवेंद्र कुंवर ने कहा, बच्चों नाटक से जुड़कर जीने का तरीका सीख लेता है, अब्दुल्लाह निज़ामी ने कहा, नाटक जीवन में अति आवश्यक है और विशेष करके बच्चों में नाट्य कला अति आवश्यक है। नाट्य कार्यशाला निर्देशक मिथिलेश कुमार उर्फ मिथिलेश 'कान्ति' ने कहा, मेरी कोशिश है, बच्चों में नाट्य कला के प्रति जागरूक करना, ताकि वह नाटक को भी अपने जीवन में एक आधार बना सके। मौके पर वरिष्ठ रंगकर्मी सदन कुमार और युवा रंगकर्मी मनोज कुमार ने भी विभिन्न तरह से बच्चों को नाट्य कला के संबंध में बताएं। 'भाग्योदय' नाटक देखकर दर्शक काफ़ी मन मुग्ध हो गए और खूब तालियां बजाईं।

Dandari, Begusarai | Aug 6, 2026

नए एमडी के आते ही बदला सुधा डेरी का माहौल
 संवाददाता मुकेश कुमार
सुधा डेरी के नए प्रबंध निदेशक (MD) रविंद्र कुमार सिंह के पदभार संभालने के बाद से ही संस्थान की कार्यप्रणाली और डेरी परिसर की व्यवस्था में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है।

सुचारू एवं सुंदर व्यवस्थाः नए एमडी के नेतृत्व में सुधा डेरी की व्यवस्था को बेहद सुंदर और अनुशासित ढंग से चलाया जा रहा है।

सूक्ष्म निगरानीः प्रबंधन द्वारा डेरी के हर एक बिंदु पर पैनी नजर रखी जा रही है। चाहे काम छोटा हो या बड़ा, किसी भी स्तर की कमी को तुरंत दुरुस्त किया जा रहा है।

सफाई और सौंदर्याकरणः पूर्व में अवध-तिरहुत रोड के किनारे उगे घनघोर जंगल और झाड़ियों की सफाई करवाकर उस क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित और स्वच्छबनाया गया है।

पार्क और झूलों का विशेष विवरण

नगर परिषद के सहयोग और डेरी प्रबंधन की पहल से निर्मित यह नया स्थल अब आकर्षण का केंद्र बन चुका है:

मुख्य आकर्षणः

...

बच्चों के लिए झूले: छोटे-छोटे बच्चों के मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए तरह-तरह के झूले लगाए गए हैं, जहाँ शाम के समय बच्चे खेल-कूद सकते हैं।

जिससे अवध-तिरहुत रोड की सुंदरता में चार चांद लग गए हैं।

पर्यावरण सुरक्षाः झाड़ियों के सफाए और पार्क के निर्माण से आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता का संदेश गया है।स्थानीय लोगों में उत्साह

डेरी के पूर्व प्रबंधक रविंद्र प्रसाद सिंह के समय से चल रहे प्रयासों और नए एमडी रविंद्र कुमार सिंह की मुस्तैदी के परिणामस्वरूप आज यह क्षेत्र पूरी तरह से बदल चुका है। स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद और डेरी प्रशासन के इस जनहितैषी कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की है

नए एमडी के आते ही बदला सुधा डेरी का माहौल संवाददाता मुकेश कुमार सुधा डेरी के नए प्रबंध निदेशक (MD) रविंद्र कुमार सिंह के पदभार संभालने के बाद से ही संस्थान की कार्यप्रणाली और डेरी परिसर की व्यवस्था में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है। सुचारू एवं सुंदर व्यवस्थाः नए एमडी के नेतृत्व में सुधा डेरी की व्यवस्था को बेहद सुंदर और अनुशासित ढंग से चलाया जा रहा है। सूक्ष्म निगरानीः प्रबंधन द्वारा डेरी के हर एक बिंदु पर पैनी नजर रखी जा रही है। चाहे काम छोटा हो या बड़ा, किसी भी स्तर की कमी को तुरंत दुरुस्त किया जा रहा है। सफाई और सौंदर्याकरणः पूर्व में अवध-तिरहुत रोड के किनारे उगे घनघोर जंगल और झाड़ियों की सफाई करवाकर उस क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित और स्वच्छबनाया गया है। पार्क और झूलों का विशेष विवरण नगर परिषद के सहयोग और डेरी प्रबंधन की पहल से निर्मित यह नया स्थल अब आकर्षण का केंद्र बन चुका है: मुख्य आकर्षणः ... बच्चों के लिए झूले: छोटे-छोटे बच्चों के मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए तरह-तरह के झूले लगाए गए हैं, जहाँ शाम के समय बच्चे खेल-कूद सकते हैं। जिससे अवध-तिरहुत रोड की सुंदरता में चार चांद लग गए हैं। पर्यावरण सुरक्षाः झाड़ियों के सफाए और पार्क के निर्माण से आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता का संदेश गया है।स्थानीय लोगों में उत्साह डेरी के पूर्व प्रबंधक रविंद्र प्रसाद सिंह के समय से चल रहे प्रयासों और नए एमडी रविंद्र कुमार सिंह की मुस्तैदी के परिणामस्वरूप आज यह क्षेत्र पूरी तरह से बदल चुका है। स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद और डेरी प्रशासन के इस जनहितैषी कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की है

Dandari, Begusarai | Aug 6, 2026