चार साल बाद खत्म हुआ इंतजार: मां की आंखों का खोया सितारा फिर लौटा घर
10 साल की उम्र में घर से निकला था मासूम, गोंडा में बदली पहचान... तुलसीपुर पुलिस की मेहनत से फिर मिला परिवार
बलरामपुर। चार साल पहले मां की डांट से नाराज होकर घर से निकला 10 वर्षीय मासूम फिर कभी वापस नहीं लौटा। पति को पहले ही खो चुकी मां रहीमा के लिए बेटे की तलाश जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन गई। दिन गुजरते गए, साल बदलते गए, लेकिन मां की आंखें बेटे की राह देखती रहीं।
फिर 10 अगस्त 2026 को चार साल से चली आ रही इस कहानी का सुखद अंत हुआ। तुलसीपुर पुलिस ने गोंडा के सुभागपुर रेलवे स्टेशन के निकट दत्तनगर पत्थरकट्टा कॉलोनी से बच्चे को बरामद कर लिया। पहचान होने के बाद जब मां को उसका बेटा मिला तो वर्षों से आंखों में ठहरा इंतजार जैसे आंसुओं में बह निकला।
मां की डांट के बाद निकला था घर से
मामला वर्ष 2022 का है। तुलसीपुर थाना क्षेत्र के नई बाजार बैरागीपुरवा निवासी रहीमा का 10 वर्षीय बेटा घर के पास खेलते समय अचानक लापता हो गया। बाद में पुलिस जांच में सामने आया कि मां की डांट के बाद बच्चा घर से निकल गया था और तुलसीपुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़कर गोंडा पहुंच गया।
गोंडा रेलवे स्टेशन के पास सड़क किनारे ओवरब्रिज के नीचे एक दुकान पर वह रोता हुआ मिला। वहां रहने वाली एक विधवा महिला ने बच्चे को अपने बच्चे की तरह पाल लिया और उसका नाम आशीष रख दिया।
नाम बदला, पहचान बदली... लेकिन पुलिस ने तलाश नहीं छोड़ी
इधर बलरामपुर में मां अपने बेटे की तलाश में दर-दर भटकती रही। पुलिस ने गुमशुदगी के संबंध में समाचार पत्रों में प्रकाशन कराया। इसके अलावा गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, बहराइच और गोंडा सहित कई जिलों में बच्चे की तलाश के लिए टीमें लगाई गईं।
डीसीआरबी से संपर्क करने के साथ ही महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन, लखनऊ को भी बच्चे की तलाश के संबंध में पत्राचार किया गया।
चार साल बाद तस्वीर साफ हुई
लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार पुलिस को सुराग मिला। 10 अगस्त को प्रभारी निरीक्षक तुलसीपुर सुधीर कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सुभागपुर रेलवे स्टेशन के निकट दत्तनगर पत्थरकट्टा कॉलोनी से बच्चे को बरामद कर लिया।
पुलिस ने बच्चे की पहचान मुकदमे से संबंधित गुमशुदा बालक के रूप में की। परिजनों ने भी उसकी पहचान कर ली।
चार साल बाद मां-बेटे का हुआ मिलन
पति की मृत्यु के बाद बेटे की तलाश में जुटी रहीमा के लिए यह पल किसी फिल्म के भावुक क्लाइमेक्स से कम नहीं था। जिस बेटे के लौटने की उम्मीद में चार साल बीत गए, वह आखिरकार उसकी आंखों के सामने था।
चार साल का इंतजार, अनगिनत तलाश और पुलिस की लगातार कोशिशों के बाद मां को उसका बेटा वापस मिल गया।
बरामद बालक को अग्रिम विधिक कार्रवाई के लिए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।
बरामदगी में इन पुलिसकर्मियों की रही भूमिका
प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार सिंह के नेतृत्व में कांस्टेबल रत्नेश कुमार, अजय सिंह, उमेश कुमार, अवधेश तथा महिला कांस्टेबल अदिति पटेल की टीम ने बच्चे की बरामदगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।