किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संचालक श्री भार्गव ने किया ग्राम टेमनी खुर्द में बायो रिसोर्स सेंटर का निरीक्षण
किसानों को प्राकृतिक कृषि उत्पादों का उचित बाजार एवं मूल्य उपलब्ध कराने पर दिया जोर
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जिले के विकासखंड मोहखेड़ के ग्राम टेमनी खुर्द में कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के माध्यम से नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना के अंतर्गत संचालित गव्या एग्रो नेचुरल्स बायो रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) का आज किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संचालक श्री उमाशंकर भार्गव ने निरीक्षण किया।
ग्राम टेमनी खुर्द में कृषक श्री राजेश धारे द्वारा विगत छह माह से बायो रिसोर्स सेंटर का संचालन किया जा रहा है। केंद्र के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण एवं प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। साथ ही प्राकृतिक कृषि में उपयोग होने वाले विभिन्न कृषि आदानों का निर्माण भी किया जा रहा है। बायो रिसोर्स सेंटर पर ऊर्जा जल, जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, पंचगव्य, ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र, दशपर्णी अर्क, पांच पत्ती काढ़ा, जैव रसायन, छाछ द्रव्य रसायन, अन्न द्रव्य रसायन एवं सजीव जल सहित विभिन्न प्राकृतिक कृषि आदानों का निर्माण किया जाता है।
कृषि आदानों के निर्माण एवं प्रशिक्षण की ली जानकारी - निरीक्षण के दौरान विकासखंड के चार क्लस्टरों से आई कृषि सखियों एवं प्रमुख किसानों द्वारा प्राकृतिक एवं जैविक कृषि उत्पादों के स्टॉल लगाए गए थे। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संचालक श्री भार्गव ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया तथा किसानों से उनके उत्पादों, उत्पादन प्रक्रिया एवं विपणन की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बायो रिसोर्स सेंटर के संचालक श्री राजेश धारे से प्राकृतिक कृषि आदानों के निर्माण, गुणवत्ता, विक्रय एवं किसानों को दिए जा रहे प्रशिक्षण के संबंध में विस्तृत जानकारी ली।
बीटीएम मोहखेड़ श्रीमती प्रिया कराड़े ने बताया कि आत्मा परियोजना किसानों तक नवीन कृषि तकनीकों के प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वर्तमान में नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना के अंतर्गत किसानों को प्राकृतिक कृषि की ओर अग्रसर करने के लिए प्रशिक्षण एवं जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
किसानों को उत्पाद का उचित मूल्य मिले — कृषि संचालक श्री भार्गव - प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों के स्टॉलों के निरीक्षण के दौरान कृषि संचालक श्री भार्गव ने कृषि अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि किसान कड़ी मेहनत से प्राकृतिक कृषि उत्पाद तैयार कर रहे हैं। यदि उन्हें उचित बाजार और उचित मूल्य नहीं मिला, तो वे लंबे समय तक प्राकृतिक कृषि को सफलतापूर्वक जारी नहीं रख पाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। नजदीकी बड़े शहर नागपुर की कंपनियों एवं संभावित खरीदारों से संपर्क कर किसानों के उत्पादों के विपणन की व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके और अन्य किसान भी प्राकृतिक कृषि अपनाने के लिए प्रेरित हों।
आत्मा परियोजना संचालक श्री धीरज ठाकुर ने बताया कि जिले के सभी विकासखंडों में प्राकृतिक कृषि के लिए पंजीकृत किसानों के प्रथम वर्ष के पीजीएस प्रमाणन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। इसमें मोहखेड़ विकासखंड के लगभग 500 किसान भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि प्रमाणन प्रक्रिया से किसानों के प्राकृतिक कृषि उत्पादों को बाजार में विश्वसनीय पहचान दिलाने और बेहतर विपणन की दिशा में सहायता मिलेगी।
महिला कृषक से कृषि संचालक ने खरीदी राजमा एवं हल्दी - निरीक्षण के दौरान कृषि संचालक श्री भार्गव ने ग्राम राजेगांव से आई महिला कृषक श्रीमती गीता पवार से प्राकृतिक/जैविक रूप से उत्पादित राजमा एवं हल्दी की खरीदी की। इस दौरान उन्होंने महिला कृषक से राजमा के उत्पादन, गुणवत्ता, लागत एवं विक्रय की संभावनाओं पर चर्चा की।
इस अवसर पर उप संचालक कृषि श्री मोरिस नाथ, परियोजना संचालक आत्मा श्री धीरज ठाकुर, एसडीओ श्री एन.के. पटवारी, एसएडीओ श्री शैलेन्द्र धुर्वे, बीटीएम श्रीमती प्रिया कराड़े, एईओ श्रीमती तन्वी अयूब, श्रीमती भाग्यश्री कड़वे, श्री शैरभ उइके, श्री के.डी. गोनेकर, श्रीमती शारदा उइके, श्रीमती सेवनती चौकसे, श्रीमती मधु बेन, जैव विविधता विशेषज्ञ श्री कैलाश सोनेवार, प्रगतिशील कृषक श्री मदन चौधरी, प्राकृतिक खेती कृषक श्री रघुवर भादे, श्री आशाराम घाघरे एवं श्री मुरारीलाल पंद्रे सहित कृषि सखियां एवं क्षेत्र के किसान उपस्थित थे।