➡️ मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पराली प्रबंधन की समीक्षा
मुख्य सचिव श्री अशोक वर्णवाल की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी कमिश्नर एवं कलेक्टर के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पराली प्रबंधन की समीक्षा की गई। बैठक के परिपालन में कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्रीमती प्रतिभा पाल ने जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने, किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक करने तथा पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने अधिकारियों को दिए कड़े दिशा-निर्देश
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले में खरीफ फसलों जैसे मक्का, सोयाबीन आदि की कटाई के बाद पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्णतः अंकुश लगाया जाए। इसके लिए कृषि विभाग के मैदानी अमले, विशेषकर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों (RAEO/SADO) को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। कृषि विस्तार अधिकारी गांव-गांव भ्रमण कर किसानों से प्रत्यक्ष संपर्क साधेंगे और उनसे पराली (नरवाई) न जलाने तथा फसल अवशेषों का सुचारू प्रबंधन करने के संबंध में लिखित शपथ पत्र पर नरवाई ना जलाने को सहमति के रूप में किसान भाइयों से हस्ताक्षर दर्ज कराएंगे।
विशेष रूप से कृषि विभाग के अधिकारियों को उन संवेदनशील गांवों और क्षेत्रों का सघन दौरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं, जहां गत वर्ष खरीफ सीजन के दौरान पराली जलाने की सर्वाधिक घटनाएं दर्ज की गई थीं। भ्रमण के दौरान अधिकारी किसानों को खेत में नरवाई न जलाने की शपथ दिलाने के साथ-साथ फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने और भूसा बनाने हेतु आधुनिक कृषि यंत्रों जैसे रीपर बाइंडर (Reeper Binder), भूसा मशीन, हैप्पी सीडर (Happy Seeder), सुपर सीडर (Super Seeder) के उपयोग के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही, आईईसी मटेरियल वीडियो और आदि के माध्यम से किसानों को अवशेष प्रबंधन और भूमि की नमी व उर्वरता बनाए रखने के प्रति जागरूक किया जाएगा।
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