#सफलता_की_कहानी
‘एक बगिया मां के नाम’ से 312 महिलाओं के खेतों में समृद्धि की बगिया
तुलसीबाई ने 100 अमरूद के पौधों से दिखाई आत्मनिर्भरता की राह
नीमच, 6 सितंबर 2026। ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक कृषि के साथ उद्यानिकी से जोड़कर उनकी आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में ‘एक बगिया मां के नाम’ परियोजना प्रभावी पहल साबित हो रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा विकसित भारत गारंटी का रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) के अंतर्गत संचालित इस परियोजना के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को अपने खेतों में फलदार पौधों की बगिया विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
नीमच जिले में कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अमन वैष्णव के मार्गदर्शन में परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। गत वर्ष जिले में 312 महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों के खेतों में 100-100 फलदार पौधों का रोपण किया गया।
अमरूद की बगिया बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल
विकासखंड जावद के ग्राम पंचायत मोडी की महिला स्वयं सहायता समूह सदस्य एवं कृषि सखी श्रीमती तुलसीबाई मेघवाल ने योजना का लाभ उठाकर अपने खेत में पिंक ताइवान अमरूद के 100 पौधे लगाए। पौधों की सुरक्षा के लिए खेत के चारों ओर वायर फेंसिंग तथा सिंचाई के लिए जल कुंड की व्यवस्था की। बागवानी के साथ अंतरवर्ती फसल के रूप में सोयाबीन, मूंगफली और अलसी की खेती कर उन्होंने अतिरिक्त उत्पादन भी प्राप्त किया।
परियोजना के अंतर्गत पौधों के रोपण एवं देखभाल संबंधी कार्यों के लिए तुलसीबाई को 42 हजार रुपये की मजदूरी प्राप्त हुई है। वहीं वायर फेंसिंग,पोल, दवाई एवं पौधों से संबंधित कार्यों के लिए 54 हजार रुपये के भुगतान की प्रविष्टि वीबी-जी राम जी पोर्टल पर दर्ज की गई है।
एक महिला की पहल से जुड़ीं 14 अन्य महिलाएं
तुलसीबाई ने योजना का लाभ स्वयं लेने के साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ने की पहल की। उनके प्रयासों से ग्राम की 14 अन्य महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों के यहां भी बगिया परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। ग्राम मोदी में नींबू, अमरूद, संतरा और सीताफल की बगिया विकसित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति व्यक्त किया आभार
तुलसीबाई मेघवाल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीण महिलाओं को अपने खेत में ही रोजगार और आय के नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘एक बगिया मां के नाम’ परियोजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनकी आजीविका को स्थायी रूप से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
‘एक बगिया मां के नाम’ परियोजना के माध्यम से खेती के साथ उद्यानिकी को बढ़ावा देकर ग्रामीण महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय, स्थानीय रोजगार और दीर्घकालिक आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। तुलसीबाई मेघवाल की पहल इसका जीवंत उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और हितग्राहियों की सक्रिय भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।
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12 views | Neemuch, Madhya Pradesh | Sep 6, 2026