कान्हा हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप: इलाज या लापरवाही? तीन ऑपरेशन के बाद भी नहीं भरा घाव, डीएम से न्याय की गुहार
पीड़ित का दावा—पहले ऑपरेशन के बाद भी पथरी की शिकायत, दोबारा इलाज और फिर गांठ का ऑपरेशन; 19 सितंबर तक दर्द और घाव की समस्या
उरई, जालौन शहर के कालपी रोड स्थित कान्हा हॉस्पिटल को लेकर एक मरीज के परिजन ने ऐसा प्रार्थना पत्र जिलाधिकारी जालौन को दिया है, जिसने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों की निगरानी पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मोहल्ला उमराखेरा निवासी अमन मोहन पुत्र हरिमोहन ने आरोप लगाया है कि उनकी 55 वर्षीय माता के इलाज में गंभीर लापरवाही हुई।
परिजन के मुताबिक, 24 फरवरी 2026 को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद 26 फरवरी को ऑपरेशन किया गया, लेकिन समस्या खत्म होने के बजाय इलाज के बाद भी दर्द बना रहा।
एक ऑपरेशन के बाद भी समस्या खत्म नहीं हुई तो फिर सवाल किससे?
पीड़ित का आरोप है कि 17 मार्च को दोबारा जांच में पथरी की बात सामने आई, जिसके बाद मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाया गया।
वहां दोबारा ऑपरेशन किए जाने और पथरी के कण/टुकड़े निकलने का दावा प्रार्थना पत्र में किया गया है।
इसके बाद भी कहानी खत्म नहीं हुई।
परिजन के मुताबिक ऑपरेशन वाले स्थान पर गांठ बनी, घाव से मवाद निकलने लगा और संक्रमण की शिकायत सामने आई।
दावा है कि 14 जुलाई को गांठ का तीसरा ऑपरेशन कराया गया, लेकिन कुछ समय बाद फिर उसी स्थान पर गांठ बनने लगी।
19 सितंबर तक मरीज की परेशानी बरकरार रहने का आरोप है।
तीन ऑपरेशन के बाद भी सवाल जस के तस!
अगर पीड़ित के आरोप सही हैं तो सवाल बेहद गंभीर है—
आखिर पहले ऑपरेशन के बाद मरीज की समस्या क्यों बनी रही?
क्या ऑपरेशन से पहले और बाद की मेडिकल जांच की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा होगी?
अगर इलाज में कोई गलती नहीं हुई तो स्वतंत्र जांच में स्थिति साफ क्यों नहीं की जाए?
और अगर लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
आयुष्मान और निजी भुगतान को लेकर भी सवाल
पीड़ित ने उपचार, जांच और दवाओं के नाम पर भुगतान किए जाने का भी आरोप लगाया है।
प्रार्थना पत्र में कुछ भुगतान आयुष्मान कार्ड के माध्यम से होने की बात भी कही गई है।
अब सवाल यह भी है कि मरीज के इलाज का पूरा रिकॉर्ड, ऑपरेशन रिपोर्ट, जांच रिपोर्ट और भुगतान का हिसाब सामने आने पर क्या तस्वीर साफ होगी?
सिर्फ जांच टीम गठित करना काफी है या रिपोर्ट भी आएगी?
पीड़ित का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को पहले भी शिकायत दी गई थी।
ऐसे मामलों में अक्सर जांच की बात सामने आती है।
लेकिन बड़ा सवाल यही है—
जांच टीम कब मौके पर पहुंचेगी?
जांच कितने दिन में पूरी होगी?
रिपोर्ट सार्वजनिक होगी या फाइलों में दब जाएगी?
अगर अस्पताल नियमों के मुताबिक चल रहा है तो उसे क्लीन चिट मिले और अगर नियमों का उल्लंघन है तो कार्रवाई क्यों न हो?
जालौन की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल
उरई शहर में निजी अस्पतालों के संचालन, चिकित्सकीय मानकों, मरीजों की सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता की निगरानी को लेकर अब एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
क्या जिले का स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों की नियमित और निष्पक्ष जांच करता है?
क्या हर शिकायत की मेडिकल विशेषज्ञों से स्वतंत्र जांच होती है?
क्या मरीजों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई होती है?
और सबसे बड़ा सवाल—
मरीज की जिंदगी से जुड़ा मामला है साहब… अगर शिकायत के बाद भी निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तो आखिर पीड़ित न्याय की उम्मीद किससे करे?
पीड़ित ने जिलाधिकारी से उच्चस्तरीय जांच, कथित लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने, क्षतिपूर्ति तथा अपनी माता का सरकारी मेडिकल कॉलेज में उचित उपचार कराने की मांग की है।
फिलहाल खबर पीड़ित द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र और उसके आरोपों पर आधारित है।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कान्हा हॉस्पिटल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
सवाल
क्या इस मामले की निष्पक्ष मेडिकल जांच होनी चाहिए?
क्या जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक होनी चाहिए?
या फिर मामला भी दूसरी शिकायतों की तरह सिर्फ जांच टीम गठित होने तक सीमित रह जाएगा?
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
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Kalpi, Jalaun | Sep 19, 2026