#बालाघाट
पशुपालन और मशरूम उत्पादन से बदली जिंदगी: खुमेश्वरी पटले बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
कहते हैं कि यदि अवसर, मार्गदर्शन और मेहनत एक साथ मिल जाएं तो सफलता की नई कहानी लिखी जा सकती है। बालाघाट जिले के खैरलांजी विकासखंड के ग्राम मोहगांव (बड़ा) की निवासी श्रीमती खुमेश्वरी पटले ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। कभी सीमित आय और आर्थिक चुनौतियों से जूझने वाली खुमेश्वरी आज पशुपालन और मशरूम उत्पादन के माध्यम से न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर चुकी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
खुमेश्वरी पटले का जीवन भी सामान्य ग्रामीण परिवारों की तरह संघर्षों से भरा था। परिवार की आय सीमित थी और घरेलू जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं था। वर्ष 2017 में उन्होंने आरडीजीआई जय दुर्गावती स्वयं सहायता समूह की सदस्यता ग्रहण की। यही वह मोड़ था जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी। समूह से जुड़ने के बाद खुमेश्वरी को नियमित बचत, बैंकिंग प्रणाली, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न आजीविका गतिविधियों का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। आजीविका मिशन के मार्गदर्शन और समूह की सहयोगी व्यवस्था ने उनमें आत्मविश्वास पैदा किया। उन्होंने पशुपालन और मशरूम उत्पादन को आजीविका का माध्यम बनाने का निर्णय लिया और पूरे समर्पण के साथ इस दिशा में कार्य शुरू किया।
समूह से जुड़ने से पहले खुमेश्वरी पटले के परिवार की मासिक आय लगभग 10 हजार 500 रुपये थी, जबकि स्वयं उनकी आय मात्र 04 हजार रुपये प्रतिमाह थी। लेकिन मेहनत, प्रशिक्षण और समूह के सहयोग से उन्होंने धीरे-धीरे अपने व्यवसाय का विस्तार किया। सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) तथा अन्य वित्तीय सुविधाओं का लाभ लेकर उन्होंने अपने उद्यम को मजबूत बनाया। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। वर्तमान में खुमेश्वरी पटले की स्वयं की मासिक आय 10 हजार रुपये तक पहुंच गई है, जबकि उनके परिवार की कुल मासिक आय लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह हो गई है। पशुपालन और मशरूम उत्पादन से होने वाली आय ने उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना भी पहले की अपेक्षा अधिक आसान हो गया है।
खुमेश्वरी बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह केवल बचत और ऋण का माध्यम नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त मंच है। समूह से जुड़ने के बाद उनमें निर्णय लेने की क्षमता विकसित हुई और आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिला। आज वे अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और स्वरोजगार गतिविधियां अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। खुमेश्वरी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग मिले तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की वाहक भी बन सकती हैं। खुमेश्वरी की यह प्रेरक यात्रा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की सफलता की जीवंत कहानी है। उनका संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास आज ग्रामीण महिलाओं के लिए उम्मीद और आत्मनिर्भरता का संदेश बन गया है।
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12 views | Balaghat, Madhya Pradesh | Jun 22, 2026