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बालाघाट

बालाघाट: #बालाघाट

मछुआ दिवस पर किसानों का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण दल रवाना, आधुनिक कृषि तकनीकों की लेंगे जानकारी

बालाघाट: #बालाघाट मछुआ दिवस पर किसानों का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण दल रवाना, आधुनिक कृषि तकनीकों की लेंगे जानकारी

Balaghat, Balaghat | Jul 9, 2026

#बालाघाट 
पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के लिए निरंतर कार्यरत "सेवा"(Sustaining Environment and Wildlife Assemblage) संस्था ने दक्षिण एवं उत्तर वनमंडल बालाघाट, जिला पुरातत्व एवं संस्कृति परिषद तथा स्थानीय किसानों एवं सारस मित्रों के सहयोग से सारस गणना-2026 का सफल आयोजन किया।

facebook.com/share/p/1NcrGW…
     
#सारस_गणना_2026
#CMMadhyaPradesh 
#JansamparkMP 
#minforestmp

#बालाघाट पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के लिए निरंतर कार्यरत "सेवा"(Sustaining Environment and Wildlife Assemblage) संस्था ने दक्षिण एवं उत्तर वनमंडल बालाघाट, जिला पुरातत्व एवं संस्कृति परिषद तथा स्थानीय किसानों एवं सारस मित्रों के सहयोग से सारस गणना-2026 का सफल आयोजन किया। facebook.com/share/p/1NcrGW… #सारस_गणना_2026 #CMMadhyaPradesh #JansamparkMP #minforestmp

Balaghat, Madhya Pradesh | Jun 27, 2026

#बालाघाट 
बैहर के ग्राम जत्ता में सुपर सीडर से डीएसआर पद्धति द्वारा धान की सीधी बुआई, 

किसानों के लिए बनी प्रेरणा

    बालाघाट जिले में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। इसी क्रम में बैहर विकासखंड के ग्राम जत्ता में कृषक दिलीप बोपचे के 3 एकड़ खेत में 17 जून को सुपर सीडर मशीन के माध्यम से डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) पद्धति से धान की सीधी बुआई की गई। यह तकनीक क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है और जिले में डीएसआर पद्धति से धान बुवाई का रकबा लगातार बढ़ रहा है।

    कृषि विशेषज्ञों के अनुसार डीएसआर पद्धति धान उत्पादन की एक आधुनिक एवं किफायती तकनीक है, जिसमें नर्सरी तैयार करने, पौध उखाड़ने और रोपाई जैसे पारंपरिक कार्यों की आवश्यकता नहीं होती। सुपर सीडर मशीन के माध्यम से सीधे खेत में बीज की बुवाई की जाती है, जिससे समय, श्रम और लागत तीनों की बचत होती है।

    पारंपरिक धान रोपाई पद्धति में बड़ी संख्या में मजदूरों की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान समय में कृषि मजदूरों की उपलब्धता किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में सुपर सीडर मशीन से डीएसआर पद्धति किसानों की इस समस्या का प्रभावी समाधान बनकर सामने आई है। इस तकनीक से कम समय में अधिक क्षेत्र में बुवाई संभव हो रही है, जिससे खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आ रही है।

     ग्राम जत्ता में दिलीप बोपचे द्वारा अपनाई गई इस तकनीक को देखने के लिए आसपास के किसान भी खेतों का भ्रमण कर रहे हैं और इसके लाभों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। इससे क्षेत्र में आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है तथा अधिक किसान डीएसआर पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

     कृषि विभाग द्वारा भी किसानों को डीएसआर तकनीक, सुपर सीडर मशीन और वैज्ञानिक खेती के लाभों के बारे में लगातार जानकारी दी जा रही है। विभाग का मानना है कि इस तकनीक के व्यापक उपयोग से खेती की लागत घटेगी, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की आय में वृद्धि होगी।

     कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से आधुनिक कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने की अपील की है। जिले में डीएसआर पद्धति के बढ़ते उपयोग को कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। 

#CMMadhyaPradesh 
#JansamparkMP 
#minmpkrishi

#बालाघाट बैहर के ग्राम जत्ता में सुपर सीडर से डीएसआर पद्धति द्वारा धान की सीधी बुआई, किसानों के लिए बनी प्रेरणा बालाघाट जिले में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। इसी क्रम में बैहर विकासखंड के ग्राम जत्ता में कृषक दिलीप बोपचे के 3 एकड़ खेत में 17 जून को सुपर सीडर मशीन के माध्यम से डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) पद्धति से धान की सीधी बुआई की गई। यह तकनीक क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है और जिले में डीएसआर पद्धति से धान बुवाई का रकबा लगातार बढ़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार डीएसआर पद्धति धान उत्पादन की एक आधुनिक एवं किफायती तकनीक है, जिसमें नर्सरी तैयार करने, पौध उखाड़ने और रोपाई जैसे पारंपरिक कार्यों की आवश्यकता नहीं होती। सुपर सीडर मशीन के माध्यम से सीधे खेत में बीज की बुवाई की जाती है, जिससे समय, श्रम और लागत तीनों की बचत होती है। पारंपरिक धान रोपाई पद्धति में बड़ी संख्या में मजदूरों की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान समय में कृषि मजदूरों की उपलब्धता किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में सुपर सीडर मशीन से डीएसआर पद्धति किसानों की इस समस्या का प्रभावी समाधान बनकर सामने आई है। इस तकनीक से कम समय में अधिक क्षेत्र में बुवाई संभव हो रही है, जिससे खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आ रही है। ग्राम जत्ता में दिलीप बोपचे द्वारा अपनाई गई इस तकनीक को देखने के लिए आसपास के किसान भी खेतों का भ्रमण कर रहे हैं और इसके लाभों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। इससे क्षेत्र में आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है तथा अधिक किसान डीएसआर पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा भी किसानों को डीएसआर तकनीक, सुपर सीडर मशीन और वैज्ञानिक खेती के लाभों के बारे में लगातार जानकारी दी जा रही है। विभाग का मानना है कि इस तकनीक के व्यापक उपयोग से खेती की लागत घटेगी, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की आय में वृद्धि होगी। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से आधुनिक कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने की अपील की है। जिले में डीएसआर पद्धति के बढ़ते उपयोग को कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। #CMMadhyaPradesh #JansamparkMP #minmpkrishi

Balaghat, Madhya Pradesh | Jun 17, 2026

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