शहपुरा में जैविक कृषि प्रशिक्षण का 10वां दिन, छात्रों ने सीखा जीवामृत और अग्नीअस्त्र बनाना
जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू ने दिया प्रशिक्षण, गाय के गोबर-गौमूत्र से जैविक उत्पाद तैयार करने की सिखाई विधि
शासकीय आदर्श महाविद्यालय शहपुरा में स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन सेल के तत्वावधान में चल रहे एक माह के जैविक कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम के दसवें दिन विद्यार्थियों को जीवामृत और अग्नीअस्त्र तैयार करने की व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान दोनों जैविक उत्पादों के निर्माण की लाइव विधि का प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य पी.एस. वरकड़े के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। मुख्य प्रशिक्षक भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष, नर्मदांचल गौ सेवा समिति के अध्यक्ष एवं जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू ने विद्यार्थियों को जैविक कृषि में उपयोग होने वाले विभिन्न उत्पादों की जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान श्री साहू ने एक एकड़ के लिए जीवामृत तैयार करने की विधि बताते हुए 10 किलो देशी गाय का गोबर, 10 लीटर गौमूत्र, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन, 200 लीटर पानी और 50 ग्राम मेड़ की मिट्टी के उपयोग की जानकारी दी। विद्यार्थियों को सामग्री मिलाने, मिश्रण को ढकने और नियमित रूप से हिलाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन भी कराया गया।
इसी तरह अग्नीअस्त्र तैयार करने की विधि भी बताई गई। इसके लिए 20 लीटर गौमूत्र, 5 किलो नीम पत्ती, 500 ग्राम तंबाकू पाउडर, 500 ग्राम तीखी हरी मिर्च और 500 ग्राम लहसुन का उपयोग करने की जानकारी दी गई। प्रशिक्षक ने इसके निर्माण, छानने और फसलों पर उपयोग की प्रक्रिया समझाई।
श्री साहू ने बताया कि अग्नीअस्त्र का उपयोग फसलों में लगने वाले तना छेदक, फल की सूंडी और इल्लियों जैसे कीटों के नियंत्रण के लिए जैविक विकल्प के रूप में किया जाता है। उन्होंने विशेष सावधानी बताते हुए कहा कि गौमूत्र को धातु के बर्तन में नहीं रखना चाहिए।
आयोजन समिति के सदस्य डॉ. ए.के. राय, डॉ. दीपक अग्रवाल, डॉ. सुषमा मरावी, डॉ. प्रीत नेगी, डॉ. ज्योति, डॉ. बसंत बैरागी, डॉ. खेमराज कन्नौजिया, आकांक्षा कुशराम एवं अभिषेक पटेल** उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण में भूमिका, पूनम, कामाक्षी, नीतू, डॉली, मूर्ति, अमर्ती सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और जैविक कृषि की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
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