
*कल्पना मिश्रा कांड में डिप्टी सीएम का बड़ा एक्शन: डॉ. गुंजन गोस्वामी सस्पेंड, इलाज में लापरवाही बनी सस्पेंशन की वजह, डीन ने जारी किया निलंबन आदेश*
*26 अगस्त को डिलीवरी के बाद हुई थी कल्पना की मौत, सिरमौर चौराहे पर 14 दिन चला था परिवार का धरना, अब तक 6 से ज्यादा डॉक्टर-नर्स और अधिकारी नप चुके हैं*
रीवा। रीवा के चर्चित कल्पना मिश्रा मौत कांड में कार्रवाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। डिप्टी सीएम के सख्त निर्देश के बाद श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के डीन ने गायनी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गुंजन गोस्वामी को सस्पेंड कर दिया है।
*क्यों गिरी डॉ. गुंजन पर गाज?*
जांच में सामने आया है कि कल्पना मिश्रा का पूरा इलाज डॉ. गुंजन गोस्वामी के पास ही चल रहा था। परिजन लगातार जांच रिपोर्ट दिखा रहे थे, प्लेटलेट्स काफी कम थे, इसके बावजूद समय पर भर्ती नहीं किया गया। कई अन्य कॉम्प्लिकेशन को भी नजरअंदाज किया गया। डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग ओवर हो गई थी फिर भी आईसीयू में शिफ्ट करने में देरी की गई। इसी लापरवाही को मुख्य वजह मानते हुए भोपाल से आई जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में डॉ. गुंजन को जिम्मेदार ठहराया था, जिसके बाद यह एक्शन लिया गया।
*वीडियो ने मचाया था देशभर में हड़कंप*
हटवा की रहने वाली कल्पना मिश्रा की 26 अगस्त को डिलीवरी के बाद मौत हो गई थी। मौत से पहले उसका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसने पूरे देश का ध्यान संजय गांधी अस्पताल की अव्यवस्थाओं की ओर खींच दिया था। इसके बाद पिता ने सिरमौर चौराहे पर धरना दे दिया था जो 14 दिनों तक चला था। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन किया था।
*अब तक इन पर हो चुकी है कार्रवाई*
इस मामले में अब तक एक के बाद एक कई कार्रवाई हो चुकी हैं -
1. पहले दो स्टाफ नर्सों को सस्पेंड किया गया जिन पर अभद्रता का आरोप था।
2. फिर गायनी की डॉ. सोनल अग्रवाल को निलंबित किया गया।
3. हंगामा न थमने पर अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटा दिया गया।
4. बाद में डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को भी हटाया गया।
5. ड्रग इंस्पेक्टर रीवा को भोपाल से आए आदेश पर सस्पेंड किया गया और अर्थवन्ड ब्लड बैंक पर FIR के निर्देश दिए गए।
6. अब डॉ. गुंजन गोस्वामी पर गाज गिरी है।
*बड़े सवाल - बाकी विभागों के डॉक्टरों को क्यों बचाया जा रहा है?*
इस पूरे कांड में सिर्फ गायनी विभाग को ही टारगेट किया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि बच्चे की मौत के लिए शिशु रोग विभाग के डॉ. गौरव त्रिपाठी और डॉ. द्विवेदी की रात में ड्यूटी थी, दोनों नदारद थे। अगर वे होते तो शायद नवजात बच जाता।
वहीं एनेस्थीसिया और मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों ने भी लापरवाही की थी। मेडिसिन में रात में डॉ. राकेश पटेल और डॉ. केशव सिंह की ड्यूटी थी, वे नहीं आए, जूनियर पीजी को भेज दिया। एनेस्थीसिया में फर्स्ट कॉल पर डॉ. निधि ऑपरेशन में व्यस्त थीं और सेकंड कॉल पर डॉ. कुलदीप पटेल ने फोन तक नहीं उठाया। इन सभी पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे परिजनों और जनता में आक्रोश है।
Mauganj, Rewa | Oct 8, 2026