
बुजुर्गों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जैन अलर्ट ग्रुप की पहल, ‘रामाश्रय कैंप’ में हुआ निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण
चिकित्सकों ने संतुलित आहार, नियमित व्यायाम एवं समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को बताया स्वस्थ वृद्धावस्था का आधार
हिण्डौन सिटी।
राष्ट्रीय वृद्धजन स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जैन अलर्ट ग्रुप ऑफ इण्डिया, हिण्डौन सिटी की ओर से मोहन नगर स्थित श्री भुवनभानु नवीन जैन उपाश्रय में वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य संरक्षण एवं बेहतर जीवनशैली के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से ‘रामाश्रय कैंप’ का आयोजन किया गया। शिविर में वृद्धजनों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया गया। इस दौरान हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर एवं ब्लड प्रेशर की जांच सहित सामान्य मेडिकल चेकअप किया गया तथा आवश्यकता के अनुसार बीमार व्यक्तियों को दवाइयां भी उपलब्ध करवाई गईं।
शिविर में फिजिशियन डॉ. आशीष शर्मा, नर्सिंग अधिकारी धनराज अवस्थी एवं लैब टेक्नीशियन मयंक उपाध्याय ने अपनी सेवाएं प्रदान करते हुए वृद्धजनों के स्वास्थ्य की जांच की तथा उन्हें स्वस्थ दिनचर्या, संतुलित आहार और बीमारियों से बचाव के संबंध में उपयोगी जानकारी दी। शिविर का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, उम्र के साथ होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को समझाना तथा समय रहते बीमारियों की पहचान एवं उचित उपचार के प्रति प्रेरित करना रहा।
वृद्धावस्था में बढ़ जाता है कई बीमारियों का जोखिम
जैन अलर्ट ग्रुप ऑफ इण्डिया के सचिव एडवोकेट विवेक जैन ने बताया कि शिविर में वरिष्ठ नागरिकों की विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जांच एवं परामर्श की व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण है, जिसमें नियमित स्वास्थ्य देखभाल, समय पर जांच और उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। जागरूकता एवं समयबद्ध उपचार के माध्यम से अनेक स्वास्थ्य समस्याओं को नियंत्रित करने और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
चिकित्सक डॉ. आशीष शर्मा ने वृद्धावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता, मांसपेशियों की ताकत, दृष्टि, सुनने की क्षमता तथा विभिन्न अंगों की कार्यक्षमता में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। ऐसे में बुजुर्गों को अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष सजग रहने और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि इस आयु वर्ग में उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी रोग, कोरोनरी आर्टरी डिजीज तथा हार्ट फेल्योर जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसी प्रकार मधुमेह लंबे समय तक रहने पर आंखों, गुर्दों एवं नसों को प्रभावित कर सकता है। हड्डियों एवं जोड़ों से संबंधित ऑस्टियोआर्थराइटिस और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों के कारण चलने-फिरने में परेशानी तथा फ्रैक्चर का खतरा भी बढ़ जाता है।
इसके अतिरिक्त स्ट्रोक, पार्किंसन रोग, डिमेंशिया एवं अल्जाइमर जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा एवं उम्र से संबंधित दृष्टि में कमी, सुनने की क्षमता में गिरावट, श्वसन संबंधी रोग तथा क्रॉनिक किडनी डिजीज जैसी समस्याओं के प्रति भी सतर्क रहना आवश्यक है। पुरुषों में प्रोस्टेट बढ़ने से संबंधित परेशानी, विभिन्न प्रकार के कैंसर तथा अवसाद, अकेलापन, नींद में कठिनाई और याददाश्त में कमी जैसी समस्याएं भी वृद्धावस्था में स्वास्थ्य एवं जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
संतुलित आहार और सक्रिय दिनचर्या से बेहतर हो सकता है जीवन
स्वस्थ वृद्धावस्था के संबंध में चिकित्सकों ने बताया कि बुजुर्गों के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार अत्यंत आवश्यक है। भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज, कैल्शियम एवं आवश्यक विटामिन शामिल होने चाहिए। नमक, चीनी, तले-भुने खाद्य पदार्थों तथा अत्यधिक वसा वाले भोजन का सेवन सीमित रखना चाहिए। शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना भी जरूरी है, हालांकि हृदय या गुर्दे के रोगियों को तरल पदार्थ की मात्रा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार निर्धारित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने का अर्थ शारीरिक गतिविधियों से दूरी बनाना नहीं है। अपनी शारीरिक क्षमता एवं चिकित्सकीय स्थिति के अनुरूप नियमित पैदल चलना, हल्का व्यायाम, योग, स्ट्रेचिंग तथा संतुलन बेहतर करने वाले अभ्यास लाभकारी हो सकते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधियों से मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने, जोड़ों की गतिशीलता में सहायता करने तथा गिरने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार जरूरी
चिकित्सकों ने वरिष्ठ नागरिकों को नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करवाने, ब्लड प्रेशर एवं ब्लड शुगर पर नजर रखने तथा चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाओं का सेवन सही समय पर करने की सलाह दी। बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवाओं को बंद करने अथवा उनकी खुराक में बदलाव करने से बचने पर भी जोर दिया गया। पर्याप्त नींद, व्यक्तिगत स्वच्छता, आवश्यक टीकाकरण, आंखों एवं दांतों की नियमित जांच तथा घर में फिसलन रहित फर्श और पर्याप्त रोशनी जैसी सावधानियों को भी वृद्धजनों के सुरक्षित जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
उन्होंने धूम्रपान एवं शराब से दूरी बनाए रखने के साथ-साथ परिवार और समाज के बीच सक्रिय भागीदारी, सकारात्मक सोच तथा मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल को भी स्वस्थ जीवन का अभिन्न हिस्सा बताया। बुजुर्गों को अकेलेपन से बचाने, उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुनने और परिवार में उन्हें सम्मान एवं भावनात्मक सहयोग देने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
सेवा, संवेदना और स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में सार्थक पहल
डॉ. मनोज जैन ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज और परिवार की अमूल्य धरोहर हैं। उनके स्वस्थ जीवन, सम्मान और बेहतर देखभाल की जिम्मेदारी हम सभी की है। वृद्धावस्था में छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है, इसलिए समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण करवाना और चिकित्सकीय परामर्श का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को बीमारियों के प्रति जागरूक करना, उन्हें सही जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा जरूरत के समय सहयोग उपलब्ध करवाना भी सेवा का महत्वपूर्ण स्वरूप है। ऐसे शिविरों के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन एवं आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास सराहनीय है। उन्होंने समाज के लोगों से भी आग्रह किया कि वे अपने परिवार के बुजुर्गों के स्वास्थ्य का ध्यान रखें तथा उनकी नियमित जांच एवं उचित देखभाल को प्राथमिकता दें।
शिविर के दौरान जैन श्वेतांबर पल्लीवाल मंदिर चैरिटेबल ट्रस्ट, नई मण्डी, मोहन नगर के अध्यक्ष महावीर प्रसाद जैन, कोषाध्यक्ष सुनील जैन सहित अन्य जैन साधर्मिक उपस्थित रहे। जैन अलर्ट ग्रुप ऑफ इण्डिया की ओर से डॉ. मनोज जैन एवं राजकुमार जैन ने भी सहभागिता निभाई।
रामाश्रय कैंप के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य परीक्षण एवं चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने के साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर समाज के वरिष्ठ सदस्यों की देखभाल, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और समय पर चिकित्सा सहायता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयोजन का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित करना रहा।