धार्मिक प्रसादी में नकली घी का संदेह, खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई से मचा हड़कंप
- धर्म और आस्था के नाम पर श्रद्धालुओं की सेहत से खिलवाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है। सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी क्षेत्र के वजीरपुर तहसील स्थित जीवली गांव में बाबा काले देव के मेले में श्रद्धालुओं के लिए तैयार की जाने वाली प्रसादी में इस्तेमाल हो रहे घी की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सरस घी के 21 पीपों की जांच की, जिनमें से 11 पीपे प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाए गए। विभाग ने घी के नमूने लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि जिस घी की शुद्धता पर संदेह है, क्या उसी घी से श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी तैयार की जाएगी?
दरअसल, वजीरपुर तहसील के जीवली गांव में हर वर्ष दशहरे पर बाबा काले देव का प्रसिद्ध मेला आयोजित होता है। इस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के लिए आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रम में भोजन प्रसादी तैयार की जा रही थी। इसी दौरान प्रसादी में इस्तेमाल किए जा रहे सरस घी के अमानक या नकली होने की सूचना खाद्य सुरक्षा विभाग को मिली। सूचना को गंभीरता से लेते हुए विभागीय टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। टीम की कार्रवाई से मौके पर हड़कंप मच गया।
:खाद्य सुरक्षा अधिकारी नीतेश गौतम के अनुसार, प्रमुख चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल जैमिनी के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई। जांच के दौरान टीम को मौके पर सरस घी के कुल 21 पीपे मिले। इनमें से 10 पीपे प्रथम दृष्टया सही पाए गए, जबकि 11 पीपों के घी की गुणवत्ता संदिग्ध नजर आई। इसके बाद विभाग ने दोनों श्रेणियों के घी के नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिए। बताया गया कि घी 15 अक्टूबर को खरीदा गया था। इसकी आपूर्ति करौली जिले के सेवा निवासी मनसुख मीणा की दुकान से हुई थी, जो उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुड़गांव सपोटरा क्षेत्र में स्थित है।
: हालांकि, अभी घी के नकली होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसकी वास्तविक गुणवत्ता का खुलासा प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही होगा। लेकिन धार्मिक आयोजन में प्रसादी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर सवाल उठना अपने आप में गंभीर मामला है। ऐसे में जांच रिपोर्ट आने तक संदिग्ध घी के इस्तेमाल को लेकर विभागीय निगरानी और आयोजकों की जिम्मेदारी बेहद अहम हो जाती है।
अब सवाल सिर्फ 11 पीपों में मिले संदिग्ध घी का नहीं, बल्कि उन श्रद्धालुओं की सेहत का भी है, जो आस्था के साथ प्रसादी ग्रहण करेंगे। क्या जांच रिपोर्ट आने तक इस घी का इस्तेमाल रोका जाएगा? क्या प्रसादी तैयार करने के लिए शुद्ध और सुरक्षित घी की व्यवस्था होगी? और यदि जांच में घी नकली या अमानक पाया जाता है, तो इसके आपूर्तिकर्ता के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी? इन सवालों के जवाब अब खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई से सामने आएंगे।
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