
गांव में महिलाओं के भूमि अधिकारों को मिली नई ताकत! स्वयं सहायता समूहों ने उठाई आवाज, मौखिक बंटवारे को कुर्रा के जरिए मिलेगा कानूनी स्वरूप
तहसील के चक्कर लगाने से मिलेगी राहत, गांव में ही सुलझेंगे जमीन के विवाद; सीडीओ केके सिंह की मौजूदगी में डकोर के कुठौंद में हुई कार्रवाई
जालौन
ग्रामीण महिलाओं को जमीन और संपत्ति में उनका अधिकार दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने एक अभिनव पहल शुरू की है।
अब स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं गांव-गांव जाकर महिलाओं के भूमि अधिकारों की आवाज बनेंगी और लंबे समय से चले आ रहे मौखिक बंटवारे के मामलों को राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने में मदद करेंगी।
इस पहल से महिलाओं को अधिकार मिलने के साथ ही जमीन संबंधी विवादों पर भी लगाम लगाने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप ग्राम्य विकास विभाग और राजस्व प्रशासन के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई इस पहल के तहत स्वयं सहायता समूहों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
समूहों की महिलाएं गांवों में संवाद कर उन महिलाओं की समस्याएं चिह्नित करेंगी, जिन्हें पारिवारिक बंटवारे के बावजूद जमीन के राजस्व अभिलेखों में उनका अधिकार नहीं मिल पाया है।
इसी क्रम में विकासखंड डकोर की ग्राम पंचायत कुठौंद में मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह की मौजूदगी में मौखिक बंटवारे को कुर्रा के माध्यम से राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
इस दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह, उपायुक्त श्रम रोजगार रामेंद्र सिंह और उपायुक्त एनआरएलएम अखिलेश तिवारी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार आपसी सहमति से जमीन का बंटवारा तो कर लेते हैं, लेकिन राजस्व अभिलेखों में उसका विधिवत अंकन नहीं कराते। यही लापरवाही आगे चलकर पारिवारिक विवाद और मुकदमों की वजह बनती है।
अब ऐसे मामलों को चिह्नित कर निर्धारित राजस्व प्रक्रिया के तहत कुर्रा के माध्यम से अभिलेखों में दर्ज कराया जा रहा है।
महिलाएं सिर्फ आजीविका नहीं, अधिकारों की भी बनेंगी आवाज
इस पहल की खास बात यह है कि स्वयं सहायता समूहों को केवल रोजगार और आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें ग्रामीण महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई में भी भागीदार बनाया जा रहा है।
समूहों के माध्यम से महिलाओं को भूमि अधिकार, राजस्व प्रक्रिया और सरकारी सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी।
इससे महिलाओं को अपनी जमीन और संपत्ति से जुड़े मामलों में जागरूक होने का अवसर मिलेगा।
प्रशासन का मानना है कि मौखिक बंटवारे को राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने से जमीन की स्थिति स्पष्ट होगी, भविष्य में विवाद कम होंगे और परिवारों को अनावश्यक मुकदमेबाजी से राहत मिलेगी।
साथ ही महिलाओं को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए बार-बार तहसील और सरकारी कार्यालयों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे।
जिला प्रशासन की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण और राजस्व विवादों के स्थानीय स्तर पर समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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Kalpi, Jalaun | Oct 30, 2026