
मजहब की दीवारें टूटीं, राखी ने जोड़ा भाई-बहन का रिश्ता
जिला अस्पताल में समाजसेवी यूसुफ अंसारी ने तीन हिंदू बहनों से बंधवाई राखी, सामाजिक सौहार्द की पेश की मिसाल
उरई (जालौन)। रक्षाबंधन सिर्फ कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान और रिश्तों की मजबूती का प्रतीक है। यह पर्व जब जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर मनाया जाता है, तो समाज में भाईचारे और इंसानियत का संदेश और भी मजबूत होता है। उरई जिला अस्पताल में रक्षाबंधन के अवसर पर ऐसा ही प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला।
समाजसेवी यूसुफ अंसारी ने जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुंचकर ड्यूटी पर तैनात अपनी तीन मुंहबोली हिंदू बहनों से राखी बंधवाई। इस दौरान अस्पताल परिसर में भाई-बहन के स्नेह के साथ हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली।
यूसुफ अंसारी ने सबसे पहले अपनी मुंहबोली बहन डा. गीतेश शास्त्री से राखी बंधवाई। बताया गया कि पिछले करीब 15 वर्षों से डा. गीतेश शास्त्री उन्हें रक्षाबंधन पर राखी बांधती आ रही हैं। इसके बाद जिला अस्पताल की नर्सिंग अधीक्षिका मिथलेश वर्मा और इमरजेंसी वार्ड इंचार्ज प्रतीक्षा शर्मा ने भी उन्हें राखी बांधी।
तीनों बहनों ने अपने भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं यूसुफ अंसारी ने भी बहनों की रक्षा, सम्मान और हर सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहने का संकल्प दोहराया। राखी बांधने के बाद भाई-बहनों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया और भविष्य में भी इसी तरह रक्षाबंधन का पर्व साथ मनाने की कामना की। इस अवसर पर यूसुफ अंसारी के साथ यामीन अंसारी, सिराज बाबा, अफसर, चुन्ना हुसैन रिजवी, बली मोहम्मद और सीनियर वार्ड ब्वॉय परवेज खान भी मौजूद रहे।
यूसुफ अंसारी ने कहा, “रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और रिश्तों को मजबूत करने का अवसर है। भाई-बहन का रिश्ता मजहब की दीवारों से नहीं, बल्कि प्रेम और विश्वास से बनता है।”
जिला अस्पताल में मनाया गया यह रक्षाबंधन संदेश दे गया कि रिश्तों की कोई जाति या मजहब नहीं होता। जहां प्रेम और विश्वास होता है, वहीं भाई-बहन का रिश्ता जन्म लेता है। ऐसे उदाहरण समाज में आपसी भाईचारे, सद्भाव और इंसानियत की भावना को मजबूत करते हैं।
Orai, Jalaun | Aug 28, 2026