
संसाधनों की कमी भी नहीं रोक सकी रश्मि का रास्ता: 10 साल के संघर्ष और लगातार प्रयास के बाद मिली सरकारी नौकरी
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#हरदोई: मजबूत इरादों और कड़ी मेहनत के आगे संसाधनों की कमी आड़े नहीं आती। इस बात को पिहानी की रश्मि ने साबित कर दिखाया है। करीब 10 वर्षों के लंबे संघर्ष और बिना किसी कोचिंग के स्व-अध्ययन (Self-study) के बल पर रश्मि ने आखिरकार सफलता हासिल कर ली है। 9 सितंबर 2026 को आए परीक्षा परिणाम में उनका चयन हो गया।
रश्मि की यह राह आसान नहीं थी। उन्होंने 2016 में पहली बार UPSSSC कनिष्ठ सहायक की परीक्षा पास की थी, लेकिन पैसों की कमी के कारण टाइपिंग कोचिंग न ले पाने से अंतिम चयन रुक गया। इसके बाद भी वह तीन बार महज 0.5 और 0.2 जैसे मामूली अंकों के अंतर से अंतिम चयन से चूक गईं। 2025 में हाईकोर्ट कनिष्ठ सहायक परीक्षा में 100 में से 89 अंक पाने के बावजूद वह अंग्रेजी टाइपिंग में रह गई थीं।
दिनभर पढ़ाई और काम, रात में #तैयारी:
रश्मि का दिन बेहद व्यस्त रहता था। वह सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक अपने पिता के स्कूल में पढ़ाती थीं और शाम को बच्चों को ट्यूशन देती थीं। इसके बाद बची हुई रात में वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती थीं।
अपनों का मिला #सहयोग
टाइपिंग के अभ्यास के लिए उनके पास लैपटॉप नहीं था। उनकी लगन को देखते हुए कस्बे के शशि अवस्थी और कुलदीप अवस्थी ने उन्हें एक लैपटॉप उपलब्ध कराया, जिससे उन्होंने घर पर ही टाइपिंग का अभ्यास किया। बार-बार असफलता मिलने के बावजूद रश्मि ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार प्रयास करती रहीं। रश्मि की यह सफलता यह साबित करती है कि अगर इरादे पक्के हों, तो बिना कोचिंग और सीमित साधनों के भी मंज़िल पाई जा सकती है।
#TheTelecast
Hardoi, Hardoi | Sep 12, 2026