
*विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बाधित रहने के मद्देनजर गंगा घाटों से नावों के सुरक्षित परिचालन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी*
भागलपुर, 23 अक्टूबर 2026। विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बाधित रहने के कारण भागलपुर जिले के विभिन्न घाटों से नावों एवं बोट के माध्यम से यात्रियों का आवागमन किया जा रहा है। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन द्वारा घाटों पर नावों के सुरक्षित परिचालन, यात्रियों की सुविधा तथा संभावित दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
जिलाधिकारी, भागलपुर द्वारा जारी आदेश से संबंधित अनुमंडल पदाधिकारियों, दंडाधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों, अग्निशमन कर्मियों, आपदा मित्रों एवं चिकित्सा दल को निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है।
नावों के परिचालन एवं यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रमुख निर्देश निम्नवत हैं—
1. घाटों पर सतत निगरानी एवं बैरिकेडिंग:
बियाडा घाट, जान्हवी चौक तथा जिले के अन्य संबंधित घाटों पर नावों एवं बोट पर यात्रियों के चढ़ने-उतरने के दौरान विशेष सतर्कता बरती जाएगी। निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को नाव पर सवार नहीं होने दिया जाएगा। ओवरलोडिंग रोकने तथा नावों के सुरक्षित परिचालन के लिए आवश्यक निगरानी एवं कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
2. प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों एवं कर्मियों की उपस्थिति:
घाटों पर प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी, होमगार्ड, अग्निशमन सेवा के कर्मी, आपदा मित्र, पुलिस बल एवं अन्य संबंधित कर्मी अपने निर्धारित स्थलों पर उपस्थित रहकर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे। सभी घाटों पर ब्रीफिंग के माध्यम से कर्मियों को उनके दायित्वों से अवगत कराया जाएगा।
3. यात्रियों को सुरक्षा संबंधी निर्देश:
नावों पर यात्रा के दौरान यात्रियों को सुरक्षित बैठने, अनावश्यक रूप से रेलिंग के निकट नहीं जाने तथा नाव में अनावश्यक रूप से इधर-उधर नहीं घूमने की सलाह दी जाएगी। यात्रियों को धक्का-मुक्की, भीड़भाड़ एवं किसी भी प्रकार की असावधानी से बचने के लिए जागरूक किया जाएगा।
4. रेलिंग, जाली एवं अन्य सुरक्षा उपकरणों का निरीक्षण:
प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी प्रतिदिन नावों एवं बोट का निरीक्षण करेंगे। रेलिंग, सुरक्षा जाली, प्रवेश एवं निकास मार्ग तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा संरचनाओं की स्थिति की जांच की जाएगी। किसी प्रकार की कमी या खराबी पाए जाने पर तत्काल आवश्यक मरम्मत कराई जाएगी। गंभीर सुरक्षा खामी होने पर संबंधित नाव का परिचालन तब तक बंद रहेगा, जब तक आवश्यक सुधार सुनिश्चित नहीं हो जाता।
5. लाइफ जैकेट एवं अन्य सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता:
प्रत्येक नाव एवं बोट पर निर्धारित मानकों के अनुरूप पर्याप्त संख्या में लाइफ जैकेट तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। यात्रियों को आवश्यकतानुसार लाइफ जैकेट उपलब्ध कराते हुए उनका समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। सुरक्षा उपकरणों के अभाव में किसी भी नाव का परिचालन नहीं किया जाएगा।
6. गंभीर रूप से बीमार एवं जोखिमग्रस्त व्यक्तियों के परिवहन पर विशेष सतर्कता:
गंभीर रूप से बीमार, अत्यधिक अस्वस्थ अथवा ऐसी स्थिति में मौजूद व्यक्तियों, जिनके लिए नाव से यात्रा करना जोखिमपूर्ण हो सकता है, के परिवहन में विशेष सावधानी बरती जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा सहायता एवं वैकल्पिक सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की जाएगी। गर्भवती महिलाओं, विशेषकर गर्भावस्था की अंतिम तिमाही में, तथा अन्य उच्च जोखिम वाले यात्रियों के संबंध में जारी निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
7. चिकित्सा दल की उपस्थिति एवं आपातकालीन व्यवस्था:
सभी संबंधित घाटों पर प्रतिनियुक्त चिकित्सक, चिकित्सा पदाधिकारी, मेडिकल टीम एवं एम्बुलेंस कर्मियों की दैनिक उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक संसाधन तैयार रखे जाएंगे।
8. नए नाव एवं बोट के परिचालन पर नियंत्रण:
किसी भी नए नाव अथवा बोट का परिचालन आवश्यक वैधानिक अनुमति, तकनीकी जांच एवं निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुपालन की पुष्टि के बाद ही किया जाएगा। बिना आवश्यक अनुमति एवं सुरक्षा मानकों की पुष्टि के किसी भी नाव या बोट का परिचालन नहीं किया जाएगा।
9. उपस्थिति पंजी एवं निरीक्षण अभिलेखों का संधारण:
प्रत्येक घाट पर प्रतिनियुक्त सभी कर्मियों की दैनिक उपस्थिति, निरीक्षण की तिथि एवं समय, पाई गई कमियों तथा उनके निराकरण का विवरण अभिलेखों में संधारित किया जाएगा।
10. फोटोग्राफी एवं साक्ष्य का संधारण:
घाटों पर उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्था, नावों की स्थिति, बोडिंग व्यवस्था, कर्मियों की उपस्थिति एवं निरीक्षण से संबंधित आवश्यक फोटोग्राफ प्राप्त कर निर्धारित आधिकारिक समूह में साझा किए जाएंगे। संबंधित अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाएगा।
11. सुरक्षा संबंधी कमियों का त्वरित निराकरण:
निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की सुरक्षा संबंधी कमी, तकनीकी समस्या, अव्यवस्था अथवा दुर्घटना की आशंका पाए जाने पर संबंधित नाव संचालक एवं सक्षम पदाधिकारी को तत्काल सूचित कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
12. घाटों पर साफ-सफाई एवं स्वच्छता:
सभी संबंधित घाटों पर नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए नाव संचालकों, स्थानीय निकायों एवं संबंधित कर्मियों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा, ताकि यात्रियों को स्वच्छ वातावरण एवं सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
जिलाधिकारी ने सभी प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों एवं कर्मियों को उपर्युक्त निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। निर्देशों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनुपस्थिति, सुरक्षा मानकों के उल्लंघन अथवा दुर्घटना की आशंका से संबंधित सूचना प्राप्त होने पर नियमानुसार जवाबदेही निर्धारित करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन, भागलपुर आम नागरिकों से अपील करता है कि वे नावों से यात्रा के दौरान निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करें, नाव की क्षमता से अधिक यात्रियों के सवार होने का विरोध करें तथा किसी भी असुरक्षित स्थिति की सूचना तत्काल संबंधित पदाधिकारी को दें।
जिला प्रशासन भागलपुर यात्रियों की सुरक्षा एवं सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जिला जनसंपर्क कार्यालय, भागलपुर