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Bhagalpur District Administration

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भागलपुर, 06 अगस्त 2026: जिलाधिकारी श्रीमती अलंकृता पांडे की अध्यक्षता में बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी फेडरेशन (वेजफेड) तथा कॉम्फेड से संबंधित योजनाओं की प्रगति एवं क्रियान्वयन की समीक्षा हेतु बैठक आयोजित की गई। 
बैठक में जिले के विभिन्न प्रखंडों में सब्जी प्रसंस्करण इकाइयों तथा दुग्ध उत्पादों के रिटेल आउटलेट की स्थापना के लिए आधारभूत संरचना विकसित करने हेतु आवश्यक भूमि की उपलब्धता एवं अन्य तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई।बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय में वृद्धि, कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से सब्जी प्रसंस्करण एवं दुग्ध उत्पादों के विपणन से संबंधित आधारभूत संरचनाओं का तेजी से विकास कर रही है। इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए समय पर उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।
समीक्षा के क्रम में बताया गया कि वेजफेड द्वारा जिले के विभिन्न प्रखंडों, जिनमें नाथनगर, जगदीशपुर, सुल्तानगंज, गौराडीह सहित अन्य प्रखंड शामिल हैं, में सब्जी प्रसंस्करण से संबंधित आधारभूत संरचना का निर्माण प्रस्तावित है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया कि विभागीय मानकों के अनुरूप उपयुक्त सरकारी भूमि का शीघ्र चिन्हीकरण कर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, ताकि निर्माण कार्य बिना किसी विलंब के प्रारंभ किया जा सके।
बैठक में नाथनगर अंचल से संबंधित भूमि की भी समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान पाया गया कि उपलब्ध कराई गई भूमि विभागीय मापदंडों के अनुरूप नहीं है। इस पर जिलाधिकारी ने नाथनगर के अंचलाधिकारी को निर्देश दिया कि विभागीय मानकों के अनुरूप वैकल्पिक एवं उपयुक्त भूमि का शीघ्र चयन कर प्रस्ताव उपलब्ध कराएं, जिससे परियोजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
बैठक के दौरान कॉम्फेड द्वारा जिले में दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों के रिटेल आउटलेट की स्थापना के लिए भी उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करते हुए शीघ्र भूमि चिन्हित कर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि कॉम्फेड की योजनाओं का लाभ आम उपभोक्ताओं एवं दुग्ध उत्पादकों तक समयबद्ध रूप से पहुंचाया जा सके।जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि भूमि उपलब्धता से संबंधित सभी प्रक्रियाओं का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करें तथा विभागीय समन्वय के साथ लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करें। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से जिले के किसानों, सब्जी उत्पादकों एवं दुग्ध उत्पादकों को अपनी उपज के बेहतर भंडारण, प्रसंस्करण एवं विपणन की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
बैठक में संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं वेजफेड तथा कॉम्फेड के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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भागलपुर, 06 अगस्त 2026, जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला परिवहन पदाधिकारी सहित राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, पथ निर्माण विभाग, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक में जिले में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, यातायात व्यवस्था को सुरक्षित एवं सुगम बनाने तथा सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से सड़क दुर्घटना संभावित स्थलों (ब्लैक स्पॉट) की पहचान का दायरा बढ़ाने तथा नवीन ब्लैक स्पॉट का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर सूची तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति वाले स्थलों पर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों एवं प्रमुख सड़क जंक्शनों पर सड़क सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया। उन्होंने आवश्यकतानुसार चेतावनी संकेतक (Warning Signages), रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड, स्पीड लिमिट बोर्ड, कैट्स आई, रंबल स्ट्रिप, रोड मार्किंग, डिवाइडर, क्रैश बैरियर, स्ट्रीट लाइट तथा अन्य सुरक्षा अवसंरचना की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा।

बैठक में निर्देश दिया गया कि सभी प्रमुख चौराहों एवं दुर्घटना संभावित स्थानों का नियमित निरीक्षण किया जाए तथा जहां आवश्यकता हो वहां यातायात संकेतकों का नवीनीकरण एवं मरम्मत कराई जाए। सड़क निर्माण एवं अनुरक्षण से संबंधित एजेंसियों को सड़क पर गड्ढों, क्षतिग्रस्त सतह एवं अन्य खतरनाक बिंदुओं का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने जिला परिवहन पदाधिकारी एवं पुलिस विभाग को संयुक्त रूप से सड़क सुरक्षा अभियान चलाने, ओवरस्पीडिंग, नशे की हालत में वाहन चलाने, बिना हेलमेट एवं बिना सीट बेल्ट वाहन संचालन, गलत दिशा में वाहन चलाने तथा अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध नियमित एवं सघन प्रवर्तन अभियान चलाने का निर्देश दिया।

उन्होंने विद्यालयों, महाविद्यालयों, व्यावसायिक संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर सड़क सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने तथा लोगों को यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित करने पर बल दिया।

बैठक में दुर्घटना की स्थिति में गोल्डन ऑवर के दौरान त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, एम्बुलेंस की समयबद्ध उपलब्धता, ट्रॉमा केयर व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए समन्वित एवं परिणामोन्मुखी कार्य करने का निर्देश दिया।

बैठक में जिला परिवहन पदाधिकारी, पुलिस विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, पथ निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

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भागलपुर, 06 अगस्त 2026: जिलाधिकारी श्रीमती अलंकृता पांडे की अध्यक्षता में गुरुवार को पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत बैंक ऋण की प्रगति की समीक्षा हेतु बैठक आयोजित की गई।
 बैठक में लंबित एवं निरस्त ऋण आवेदनों की विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं बैंक प्रतिनिधियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
बैठक में बताया गया कि योजना के अंतर्गत लगभग 600 ऋण आवेदन विभिन्न कारणों से निरस्त किए गए हैं। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित बैंकों को निर्देश दिया कि प्रत्येक निरस्त आवेदन के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट 6 अगस्त की शाम 6 बजे तक उपलब्ध कराई जाए, ताकि वास्तविक समस्याओं का विश्लेषण कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।समीक्षा के दौरान यह भी पाया गया कि 110 ऋण आवेदन स्वीकृत (Sanction) होने के बावजूद अब तक वितरित (Disburse) नहीं किए गए हैं। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित बैंकों को निर्देश दिया कि ऐसे सभी लंबित मामलों का निष्पादन प्राथमिकता के आधार पर करते हुए 7 अगस्त तक हर हाल में ऋण वितरण सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि भविष्य में पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत प्राप्त होने वाले ऋण आवेदनों का त्वरित निष्पादन किया जाए तथा अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना है, इसलिए इसके क्रियान्वयन में सभी बैंक एवं संबंधित विभाग पूर्ण संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्य करें।
बैठक में जिला नोडल पदाधिकारी मीनाक्षी कुमारी, विद्युत विभाग के शहरी, पूर्वी एवं नवगछिया प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता, अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) तथा विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों के नोडल पदाधिकारी उपस्थित थे।

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भागलपुर, 06 अगस्त 2026:  जिला पदाधिकारी श्रीमती अलंकृता पांडे की अध्यक्षता में आज समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में वाहन मूल्यांकन समिति की बैठक आयोजित की गई। 
बैठक में समिति के सदस्य के रूप में जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला लेखा पदाधिकारी, सहायक आयुक्त, मद्य निषेध, भागलपुर तथा मोटर वाहन निरीक्षक (एमवीआई) उपस्थित थे।बैठक के दौरान मोटर वाहन निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत 55 वाहनों के मूल्यांकन प्रतिवेदन की बिंदुवार समीक्षा की गई।
 समीक्षा के क्रम में जिला पदाधिकारी ने सभी वाहनों के मूल्यांकन में पूर्ण पारदर्शिता, वस्तुनिष्ठता एवं निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।समीक्षोपरांत जिला पदाधिकारी ने जिला परिवहन पदाधिकारी को निर्देश दिया कि प्रस्तुत किए गए सभी 55 वाहनों के मूल्यांकन की पुनः विस्तृत समीक्षा कराई जाए।
 उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि प्रत्येक वाहन का भौतिक (फिजिकल) निरीक्षण पुनः सुनिश्चित किया जाए, ताकि वाहनों की वास्तविक स्थिति के अनुरूप सटीक एवं निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके।
जिला पदाधिकारी ने कहा कि पुनः निरीक्षण एवं समीक्षा के उपरांत विस्तृत प्रतिवेदन समिति के समक्ष समर्पित किया जाए, जिससे वाहनों के मूल्यांकन से संबंधित प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी एवं तथ्यपरक ढंग से संपन्न हो सके।

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प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत हो चुकी है, जिसके तहत लाखों की संख्या में शिव भक्त प्रतिदिन सुल्तानगंज पहुंच रहे हैं। यहाँ से श्रद्धालु उत्तर वाहिनी गंगा का जल लेकर पैदल देवघर बाबाधाम के लिए रवाना होते हैं और भगवान भोलेनाथ को जलार्पण करते हैं।
​मेले की व्यवस्थाओं पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जिला प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि काँवरियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसी क्रम में, सुल्तानगंज के विधायक प्रो. ललित नारायण मंडल ने क्षेत्र में लगाए गए विभिन्न कैंपों और स्वास्थ्य शिविरों का निरीक्षण किया।
​निरीक्षण के दौरान विधायक ने कहा कि व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाया जा रहा है और फिलहाल किसी भी काँवरिया को कोई कष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रशासन के अधिकारी और कर्मी सुबह 8:00 बजे से रात 8:00 बजे तक अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहते हैं और लगातार मॉनिटरिंग करते हैं ताकि किसी भी प्रकार की समस्या का त्वरित समाधान किया जा सके।
​वहीं, डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर चंदन कुमार ने कैंपों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देते हुए बताया कि वहाँ पेयजल और मेडिकल सुविधाओं के साथ-साथ विशेष प्रबंध किए गए हैं। यदि मेले के दौरान कोई बच्चा, बुजुर्ग या परिवारजन अपनों से बिछड़ जाते हैं, तो कंट्रोल रूम और सहायक थानों के माध्यम से तुरंत सूचना प्रसारित कर उन्हें उनके परिजनों से मिला दिया जाता है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के आपसी तालमेल से इस वर्ष मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं।
भागलपुर, 06 अगस्त 2026, प्रभारी पदाधिकारी, वन स्टॉप सेंटर एवं वरीय उपसमाहर्ता डॉ. मीनाक्षी द्वारा गुरुवार को वन स्टॉप सेंटर, मायागंज, भागलपुर का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, साफ-सफाई, अभिलेखों तथा महिलाओं को प्रदान की जा रही विभिन्न सेवाओं का जायजा लिया।

निरीक्षण के क्रम में डॉ. मीनाक्षी ने महिला हेल्पलाइन-181 के संचालन, शिकायत प्राप्त होने के उपरांत अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली तथा पीड़ित महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही सहायता के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने घरेलू हिंसा से पीड़ित एक महिला से संवाद कर उसकी समस्याओं को सुना तथा केंद्र द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सहायता एवं परामर्श सेवाओं की जानकारी ली।

उन्होंने केंद्र प्रशासक श्रीमती मोना कुमारी के साथ पीड़ित महिलाओं की काउंसलिंग, पुनर्वास, कानूनी सहायता एवं अन्य उपलब्ध सेवाओं पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. मीनाक्षी ने केंद्र के सभी कर्मियों को अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता एवं उत्तरदायित्व के साथ निर्वहन करने का निर्देश देते हुए कहा कि कार्य के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने प्रत्येक मामले में पीड़ित महिलाओं को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया।

निरीक्षण के दौरान जिला परियोजना प्रबंधक, जेंडर स्पेशलिस्ट एवं वन स्टॉप सेंटर के सभी कर्मी उपस्थित रहे।

निरीक्षण के अंत में डॉ. मीनाक्षी ने केंद्र की कार्यप्रणाली पर संतोष व्यक्त करते हुए सभी अधिकारियों एवं कर्मियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने तथा महिलाओं को त्वरित, सुरक्षित एवं प्रभावी सहायता उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का निर्देश दिया।

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श्रद्धालुओं की यात्रा और रूट:- सुल्तानगंज के नमामि गंगे घाट और अजगैबीनाथ घाट से हर पल कावरियों का जत्था गंगा जल लेकर देवघर के लिए रवाना हो रहा है। करीब 105 किलोमीटर की इस पैदल यात्रा को पूरा कर श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
​सुविधाएं और इंतजाम:- नंगे पांव चलने वाले कावरियों को राहत देने के लिए लगभग 85 किलोमीटर लंबे कच्चे मार्ग पर महीन बालू बिछाई गई है। इसके अलावा धूप और उमस से बचाव के लिए वाटर स्प्रिंकलर, हाई मास्ट लाइटें, एलईडी लाइटें और आकर्षक तोरण द्वार लगाए गए हैं।
​विश्राम स्थल:- नमामी गंगे घाट, सीढ़ी घाट और कावरिया पथ की शुरुआत में विशाल वॉटरप्रूफ जर्मन हैंगर टेंट सिटी बनाई गई है, जहां करीब 7,000 श्रद्धालु विश्राम कर सकते हैं। यहां मोबाइल चार्जिंग, पंखे, शुद्ध पेयजल, वस्त्र परिवर्तन कक्ष और बायो टॉयलेट जैसी सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध हैं।
​सुरक्षा व्यवस्था:- गंगा घाटों और कावरिया पथ पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन, एआई कैमरे और मेटल डिटेक्टर से निगरानी की जा रही है। इसके अलावा एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मोटर बोट और गोताखोरों के साथ 24 घंटे तैनात हैं।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर देश भर के 72 क्लस्टरों के बीच आयोजित प्रतियोगिता में भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखंड स्थित मीरनचक क्लस्टर ने डिजाइनिंग के क्षेत्र में प्रथम स्थान हासिल कर जिले और बिहार का गौरव बढ़ाया है। इस उपलब्धि से भागलपुर के सिल्क एवं खादी उद्योग को नई पहचान और नई उड़ान मिली है।
केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं तथा आर्थिक सहायता के माध्यम से बुनकरों को आधुनिक हथकरघा लगाने, उत्पादन बढ़ाने तथा नए-नए डिजाइन तैयार करने में बड़ी मदद मिली है। बुनकरों का कहना है कि सरकार द्वारा पहले ₹10,000 और बाद में ₹15,000 की आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने से उनके कारोबार को आगे बढ़ाने में काफी सहूलियत हुई है। आधुनिक तकनीक और सरकारी सहयोग के कारण उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है तथा बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
स्थानीय बुनकर अमन अंसारी, मोहम्मद फरीद अंसारी, मोहम्मद अब्दुल कयूम एवं शमशेर अली ने बताया कि आधुनिक उपकरणों और सरकारी सहायता मिलने से अब माल का उत्पादन भरपूर हो रहा है। इससे काम पहले की अपेक्षा आसान हुआ है और भागलपुर का प्रसिद्ध सिल्क देश-विदेश के बाजारों तक अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
बुनकर सेवा सदन के उपनिदेशक राजेश चटर्जी ने बताया कि देश भर के 72 चिन्हित क्लस्टरों में बिहार के मीरनचक क्लस्टर का डिजाइनिंग के क्षेत्र में प्रथम स्थान प्राप्त करना पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि स्थानीय बुनकरों की मेहनत, उनकी पारंपरिक कला और सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, भागलपुर में भी रंगोली एवं मंजूषा प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य के.के. पाठक ने कहा कि टेक्स्टाइल इंजीनियरिंग युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार का एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है तथा इस क्षेत्र में भविष्य की व्यापक संभावनाएं हैं।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में मीरनचक क्लस्टर को उसकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान भागलपुर के सिल्क एवं खादी उद्योग तथा यहां के बुनकरों के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
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भागलपुर, 05 अगस्त 2026: भारत सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (National TB Elimination Programme - NTEP) के अंतर्गत टीबी मरीजों को उपचार अवधि के दौरान समुचित पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग, भागलपुर द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।इसी क्रम में आज जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ, जिला कार्यक्रम प्रबंधक मणि भूषण झा, जिला लेखा प्रबंधक श्री सोमेश झा एवं श्री जितेंद्र प्रसाद ने पूर्वी बिहार चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव पुनीत चौधरी से मुलाकात की।बैठक के दौरान अधिकारियों ने टीबी मरीजों के बेहतर पोषण के लिए 100 यक्ष्मा मरीजों को फूड बास्केट उपलब्ध कराने का आग्रह किया। इस पर श्री पुनीत चौधरी ने सकारात्मक पहल करते हुए तत्काल 20 टीबी मरीजों को फूड बास्केट उपलब्ध कराने हेतु अपनी सहमति प्रदान की।स्वास्थ्य विभाग ने इस सहयोगात्मक पहल की सराहना करते हुए कहा कि सामाजिक संस्थाओं एवं उद्योग जगत के सहयोग से टीबी मरीजों को उपचार के साथ-साथ आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी, जिससे टीबी मुक्त भारत अभियान को और अधिक गति मिलेगी।

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भागलपुर, 05 अगस्त 2026: भारत सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (National TB Elimination Programme - NTEP) के अंतर्गत टीबी मरीजों को उपचार अवधि के दौरान समुचित पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग, भागलपुर द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।इसी क्रम में आज जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ, जिला कार्यक्रम प्रबंधक मणि भूषण झा, जिला लेखा प्रबंधक श्री सोमेश झा एवं श्री जितेंद्र प्रसाद ने पूर्वी बिहार चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव पुनीत चौधरी से मुलाकात की।बैठक के दौरान अधिकारियों ने टीबी मरीजों के बेहतर पोषण के लिए 100 यक्ष्मा मरीजों को फूड बास्केट उपलब्ध कराने का आग्रह किया। इस पर श्री पुनीत चौधरी ने सकारात्मक पहल करते हुए तत्काल 20 टीबी मरीजों को फूड बास्केट उपलब्ध कराने हेतु अपनी सहमति प्रदान की।स्वास्थ्य विभाग ने इस सहयोगात्मक पहल की सराहना करते हुए कहा कि सामाजिक संस्थाओं एवं उद्योग जगत के सहयोग से टीबी मरीजों को उपचार के साथ-साथ आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी, जिससे टीबी मुक्त भारत अभियान को और अधिक गति मिलेगी।
भागलपुर, 05 अगस्त 2026:  जिला स्तर पर उद्योग एवं व्यापार को बढ़ावा देने तथा उद्यमियों के लिए सरकारी सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से जिला व्यवसाय सुधार एक्शन प्लान (District Business Reforms Action Plan – DBRAP) लागू किया जा रहा है। यह पहल भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा विकसित एक राज्य-नेतृत्व वाली जिला स्तरीय सुधार पहल है। 
इस योजना का मुख्य उद्देश्य '
*ईज ऑफ डूइंग बिजनेस* *(Ease of Doing Business)* से जुड़े सुधारों को जिला स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करना है, ताकि व्यवसाय स्थापित करने, उद्योग संचालित करने तथा विभिन्न सरकारी अनुमतियां प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक निवेशक-अनुकूल, पारदर्शी और सुविधाजनक बन सके।
किसी भी उद्यमी या व्यवसायी का सबसे अधिक संपर्क जिला स्तर के कार्यालयों से होता है, जिनमें जिला उद्योग केंद्र (DIC), जिला प्रशासन, नगर निकाय, श्रम विभाग, बिजली वितरण कंपनियां तथा अन्य संबंधित विभाग शामिल हैं।
पूर्व में लागू बिजनेस रिफॉर्म्स एक्शन प्लान (BRAP) का मुख्य फोकस राज्य स्तर पर सुधारों पर था। हालांकि, जमीनी स्तर पर उद्यमियों को विभिन्न अनुमतियों और सरकारी प्रक्रियाओं में होने वाली कठिनाइयों तथा अनावश्यक देरी को देखते हुए DBRAP की शुरुआत की गई। इसके तहत जिला प्रशासन, जिला उद्योग केंद्र (DIC), नगर निकाय, श्रम, राजस्व, अग्निशमन, प्रदूषण नियंत्रण, बिजली तथा भवन निर्माण अनुमति से जुड़े विभागों की प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा रहा है।
DBRAP के प्रमुख उद्देश्य व्यवसाय स्थापित करने और संचालन की प्रक्रिया को सरल बनाना, ताकि उद्यमियों को विभिन्न कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।आवेदन, शुल्क भुगतान, प्रमाण-पत्र, अनुमति एवं स्वीकृतियों जैसी सेवाओं को डिजिटल एवं ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराना।
प्रत्येक सेवा के लिए निर्धारित समय-सीमा तय करना तथा आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग की सुविधा उपलब्ध कराना।जिले की निवेश क्षमता को बढ़ावा देना तथा नए उद्यमियों को पंजीकरण, ऋण और सरकारी सहायता योजनाओं तक आसान पहुंच प्रदान करना। जोखिम-आधारित एवं एकीकृत निरीक्षण प्रणाली विकसित करना तथा प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित करना। जिला उद्योग केंद्र (DIC) की महत्वपूर्ण भूमिका DBRAP के प्रभावी क्रियान्वयन में जिला उद्योग केंद्र (DIC) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। कई राज्यों में DIC के महाप्रबंधक को जिला स्तर पर नोडल अधिकारी अथवा समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह टीम जिलाधिकारी के नेतृत्व में नगर निगम, श्रम विभाग, राजस्व विभाग, बिजली वितरण कंपनियों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर जिले में निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करती है।
उद्यमियों को मिलने वाले प्रमुख लाभ आवेदन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल होगी तथा कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे।विभिन्न अनुमतियों एवं स्वीकृतियों में समय की बचत होगी तथा आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकेगी।निरीक्षण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
MSME एवं स्टार्टअप्स को बेहतर सहयोग मिलने से जिलों में नए उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
DBRAP के माध्यम से जिला स्तर पर प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इससे न केवल उद्यमियों को बेहतर व्यावसायिक वातावरण मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

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भागलपुर, 05 अगस्त 2026:- जिलाधिकारी, भागलपुर की पहल पर संचालित टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी (यक्ष्मा) मरीजों को प्रोटीन युक्त भोजन सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा सामाजिक एवं चिकित्सकीय संस्थाओं को अभियान से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग, भागलपुर के जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ, जिला कार्यक्रम प्रबंधक मणि भूषण झा एवं जिला योजना समन्वयक (यक्ष्मा) श्री जितेंद्र प्रसाद ने मारवाड़ी सेवा समिति, भागलपुर के अध्यक्ष श्री राम गोपाल पोद्दार, संरक्षक श्री सज्जन कुमार किशोर, कोषाध्यक्ष श्री गोपाल राम चौधरी एवं महामंत्री श्री प्रभात केजरीवाल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने निश्चय पोषण योजना के तहत टीबी मरीजों को प्रोटीन युक्त भोजन सामग्री उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।मारवाड़ी सेवा समिति ने स्वास्थ्य विभाग के अनुरोध पर तत्काल सकारात्मक पहल करते हुए 5 टीबी मरीजों को अगले 6 माह तक नियमित रूप से प्रोटीन युक्त भोजन सामग्री उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। समिति की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया कि भविष्य में और अधिक संख्या में यक्ष्मा मरीजों को इस योजना के तहत प्रोटीन युक्त भोजन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), भागलपुर द्वारा भी 20 यक्ष्मा रोगियों को प्रोटीन युक्त भोजन सामग्री वितरित की गई। यह कार्यक्रम आईएमए, भागलपुर के कार्यालय में आयोजित किया गया। टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा समाज के विभिन्न संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं नागरिकों से आगे आकर 'निश्चय मित्र' बनकर टीबी मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध कराने की अपील की जा रही है, ताकि उन्हें बेहतर पोषण, नियमित उपचार एवं सामाजिक सहयोग प्राप्त हो सके और जिले को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को शीघ्र हासिल किया जा सके।
इस अवसर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, भागलपुर की अध्यक्ष डॉ. रोमा यादव, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ प्रसाद सहित अन्य चिकित्सक एवं स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी उपस्थित थे।

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भागलपुर 05 अगस्त 2026, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर का 17वाँ स्थापना दिवस आज बड़े ही हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर पूरे विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह एवं चहल-पहल का वातावरण रहा। स्थापना दिवस समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय के कर्पूरी सभागार में किया गया।

समारोह में बिहार के माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन आभासी माध्यम से मुख्य अतिथि के रूप में जुड़े। कार्यक्रम में बिहार सरकार के माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा भी आभासी माध्यम से शामिल हुए। वहीं सभागार में बिहार सरकार के माननीय ग्रामीण विकास एवं सूचना-जनसंपर्क मंत्री श्री श्रवण कुमार, भागलपुर के माननीय सांसद श्री अजय कुमार मंडल तथा कहलगाँव के माननीय विधायक श्री शुभानंद मुकेश विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुई। माननीय कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए *माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति* ने विश्वविद्यालय परिवार को 17वें स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि, "एक शताब्दी से भी अधिक गौरवशाली इतिहास वाला यह संस्थान भारत की कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान व्यवस्था में एक विशिष्ट स्थान रखता है। हाल ही में प्राप्त नैक (NAAC) की 'ए' (A) ग्रेड मान्यता तथा जलवायु-अनुकूल (Climate-Resilient) फसल किस्मों के विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान इस विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट कार्य-संस्कृति का परिचायक है, जो हम सभी की सराहना का पात्र है।" उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस केवल उपलब्धियों का उत्सव मनाने का अवसर नहीं होता, बल्कि यह उन दायित्वों पर भी गंभीरता से विचार करने का अवसर है, जो भविष्य में हमारा मार्गदर्शन करेंगे।

अपने उद्बोधन के उपरांत माननीय राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान से विकसित विभिन्न उत्पादों का विमोचन किया, जिनमें अपराजिता के फूलों से निर्मित ब्लू टी, कटहल के बीजों से निर्मित आटा तथा हनी स्पून प्रमुख हैं। इसके साथ ही उन्होंने एआई आधारित चैटबॉट "एग्री-ग्रंथ" का भी विमोचन किया।

 *माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा* ने अपने संदेश में कृषि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने तथा बिहार की कृषि को अधिक समृद्ध एवं आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर पिछले 16 वर्षों से कृषि अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा किसानोन्मुखी तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्थान भविष्य में भी कृषि क्षेत्र में नवाचार और किसान कल्याण के नए आयाम स्थापित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि "समृद्ध किसान ही समृद्ध बिहार और विकसित भारत की सबसे मजबूत आधारशिला हैं।"

 *माननीय ग्रामीण विकास एवं सूचना-जनसंपर्क मंत्री श्री श्रवण कुमार* ने विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि 16 वर्ष कोई बहुत लंबा समय नहीं होता, लेकिन संकल्प, निष्ठा और समर्पण के साथ अल्प अवधि में भी लंबी उपलब्धियों का सफर तय किया जा सकता है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय की उपलब्धियाँ उसकी आयु से कहीं अधिक बड़ी हैं।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में *माननीय कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह* ने कहा कि आज हम केवल सत्रहवाँ स्थापना दिवस नहीं मना रहे हैं, बल्कि उस संकल्प की समीक्षा भी कर रहे हैं, जो बिहार की धरती, उसके किसानों, उसके युवाओं तथा कृषि के भविष्य को विरासत में प्राप्त करने वाली आने वाली पीढ़ियों से किया गया था। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस केवल किसी संस्थान के इतिहास की एक तिथि नहीं होता, बल्कि यह आत्ममंथन का अवसर होता है कि हमने कितने लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया, कितने नए अवसरों का सृजन किया, कितने वैज्ञानिक नवाचारों को खेतों तक पहुँचाया तथा अपने विद्यार्थियों को समाज और कृषि की सेवा के लिए कितनी प्रभावी ढंग से तैयार किया।

उन्होंने कहा कि किसी कृषि विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का आकलन केवल उसके निर्मित भवनों, स्थापित प्रयोगशालाओं अथवा प्रकाशित शोध-पत्रों से नहीं किया जा सकता। उसकी वास्तविक प्रगति का मापदंड वे किसान हैं जिनके जोखिम कम हुए हैं, वे विद्यार्थी हैं जिनका भविष्य अधिक सुदृढ़ हुआ है, वे गाँव हैं जहाँ प्रौद्योगिकी ने आय के नए स्रोत उत्पन्न किए हैं तथा वे स्थानीय उत्पाद हैं जिन्हें नई पहचान, बेहतर गुणवत्ता और व्यापक बाजार मूल्य प्राप्त हुआ है।

इस ऐतिहासिक अवसर पर माननीय कुलपति ने कहा कि वे बिहार कृषि विश्वविद्यालय के विगत सभी माननीय कुलाधिपतियों एवं कुलपतियों के प्रति अपनी गहन कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिनकी दूरदृष्टि, मार्गदर्शन और समर्पित नेतृत्व ने विश्वविद्यालय की प्रगति को नई दिशा प्रदान की है। प्रत्येक ने अपने-अपने कार्यकाल में शैक्षणिक एवं अनुसंधान कार्यक्रमों, आधारभूत संरचना, प्रसार सेवाओं तथा बिहार के कृषक समुदाय के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने बिहार कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों (एलुमनाइ) के प्रति भी अपनी हार्दिक सराहना व्यक्त की, जो देश-विदेश में अपनी उपलब्धियों के माध्यम से अपनी मातृसंस्था के ज्ञान, मूल्यों और गौरव को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं।

कार्यक्रम के अंत में युवा शोधार्थियों को चार मिनट में शोध प्रस्तुतीकरण (4MRF) के लिए सम्मानित किया गया। वहीं उत्कृष्ट शोध प्रकाशन के लिए प्राध्यापकों को भी सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त श्रेष्ठ किसान तथा श्रेष्ठ स्टार्टअप को भी सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन उमा भारती ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ चंदा कुशवाहा ने किया।

 *बिहार कृषि विश्वविद्यालय का सफर : एक नजर में* 

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की जड़ें भारत में कृषि शिक्षा के प्रारंभिक इतिहास से जुड़ी हैं। सबौर स्थित कृषि महाविद्यालय की आधारशिला 17 अगस्त 1908 को तत्कालीन बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर एंड्रयू हेंडरसन लीथ फ्रेज़र द्वारा रखी गई थी। यह देश के सबसे पुराने कृषि महाविद्यालयों में से एक है। बंगाल विभाजन के बाद इसका नाम बिहार एग्रीकल्चरल कॉलेज (BAC), सबौर रखा गया।
वर्ष 1955 में यहाँ स्नातकोत्तर कृषि शिक्षा की शुरुआत हुई, जिसने कृषि अनुसंधान और उच्च शिक्षा को नई दिशा दी। बाद में वर्ष 1970 में यह महाविद्यालय राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा से संबद्ध हो गया।

बिहार में कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से 5 अगस्त 2010 को बिहार विधानमंडल के अधिनियम संख्या-20, 2010 के तहत बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की स्थापना एक स्वायत्त राज्य कृषि विश्वविद्यालय के रूप में की गई। इसका मुख्यालय ऐतिहासिक बिहार एग्रीकल्चरल कॉलेज परिसर, सबौर (भागलपुर) में स्थापित किया गया।
स्थापना के बाद विश्वविद्यालय ने शिक्षा, अनुसंधान तथा कृषि प्रसार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्तमान में विश्वविद्यालय के अंतर्गत 8 घटक महाविद्यालय, 12 अनुसंधान केंद्र तथा बिहार के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में कार्यरत 22 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) हैं। विश्वविद्यालय किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों के प्रसार, क्षमता निर्माण तथा कृषि नवाचारों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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भागलपुर, 05 अगस्त 2026। जिलाधिकारी श्रीमती अलंकृता पांडे की अध्यक्षता में समाहरणालय कार्यालय कक्ष में जिला स्तरीय बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में बच्चों के संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुनर्वास एवं अधिकारों से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से समीक्षा की गई तथा संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले प्रत्येक बच्चे के प्रति सभी हितधारकों को संवेदनशीलता, जवाबदेही एवं समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं तथा समुचित देखरेख उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

जिलाधिकारी ने बाल गृह, बालिका गृह, पर्यवेक्षण गृह एवं विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में आवासित बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि सभी संस्थानों में बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाए तथा आवश्यक दवाइयों एवं उपचार की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी न रहे। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सभी बाल देखरेख संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा बाधित न हो। साथ ही विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञ शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने भागलपुर एवं नवगछिया के डीएसपी (मुख्यालय) सह नोडल पदाधिकारी, विशेष किशोर पुलिस इकाई को निर्देश दिया कि पुलिस द्वारा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों का पूर्णतः अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से बाल तस्करी जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सतर्क निगरानी रखने तथा संबंधित मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई करने पर बल दिया।

बैठक में सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई को निर्देशित किया गया कि बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों के समन्वय से परवरिश योजना के पात्र लाभुकों की पहचान कर अधिकाधिक बच्चों एवं परिवारों को योजना से जोड़ा जाए। साथ ही जिले के सभी बाल देखरेख संस्थानों का नियमित निरीक्षण कर वहां उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के कार्यों एवं प्रकरणों की समीक्षा करते हुए कहा कि बच्चों से संबंधित मामलों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं संवेदनशील तरीके से निष्पादन किया जाए, ताकि प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे को समय पर संरक्षण एवं सहायता उपलब्ध हो सके।

बैठक में बाल संरक्षण एवं बाल अधिकारों से जुड़े विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारी, शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि तथा अन्य संबंधित हितधारक उपस्थित थे।

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भागलपुर, 05 अगस्त 2026। जिलाधिकारी श्रीमती अलंकृता पांडे ने आज समाहरणालय परिसर स्थित विभिन्न शाखाओं एवं कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यालयों में संचालित कार्यों, अभिलेखों के संधारण, साफ-सफाई, कर्मियों की उपस्थिति तथा आमजन को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं का जायजा लिया।

जिलाधिकारी ने सभी शाखा प्रभारियों एवं संबंधित अधिकारियों को कार्यालयों में अनुशासन, समयबद्ध कार्य निष्पादन एवं जन शिकायतों के त्वरित निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने तथा अभिलेखों का सुव्यवस्थित संधारण करने पर विशेष बल दिया।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कार्यालय परिसरों में स्वच्छता बनाए रखने, अभिलेखों के डिजिटलीकरण, कार्यालयीन कार्यों में पारदर्शिता एवं दक्षता सुनिश्चित करने तथा आम नागरिकों को बेहतर एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी शाखाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य करें तथा सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ पात्र लाभुकों तक समय पर पहुंचाना सुनिश्चित करें। निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों के अनुपालन की नियमित समीक्षा भी की जाएगी।

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भागलपुर दिनांक: 05/08/2026, भागलपुर के विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में हर वर्ष शिवभक्ति के अनेक प्रेरक और अनोखे स्वरूप देखने को मिलते हैं। इस वर्ष कच्ची कांवरिया पथ पर एक ऐसी भावनात्मक यात्रा श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रही है, जिसमें एक पिता अपनी मात्र दो माह की पुत्री को डोली में बैठाकर दंडवत यात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं।

मुजफ्फरपुर निवासी मिथिलेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2025 में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के दौरान उन्होंने पुत्री रत्न की प्राप्ति की मनोकामना की थी। उन्होंने संकल्प लिया था कि यदि उनके घर बेटी का जन्म होगा, तो अगली श्रावणी यात्रा में वे अपनी पुत्री को साथ लेकर दंडवत यात्रा करते हुए बाबा के दरबार पहुंचेंगे।

वर्ष 2026 में उनकी मनोकामना पूरी हुई और उनके घर बेटी का जन्म हुआ। अब वे अपने संकल्प को पूरा करने के लिए दो माह की नन्ही बेटी को डोली में बैठाकर कठिन दंडवत यात्रा कर रहे हैं। उनकी डोली को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यात्रा के दौरान बच्ची को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसमें पंखा, प्रकाश व्यवस्था तथा सोलर ऊर्जा से संचालित सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

मिथिलेश कुमार ने बताया कि उनके परिवार में पहले से एक पुत्र है, लेकिन बेटी के जन्म ने उनके परिवार को पूर्णता प्रदान की है। वे अपनी इस यात्रा के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि बेटियां परिवार का गौरव हैं और उनका सम्मान समाज की जिम्मेदारी है।

कच्ची कांवरिया पथ से गुजरते समय श्रद्धालु इस अनोखी डोली को देखने के लिए रुक जाते हैं। लोग पिता की अटूट आस्था के साथ-साथ अपनी बेटी के प्रति उनके स्नेह और समर्पण की सराहना कर रहे हैं।

यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि “बेटी सम्मान” और “बेटी है अनमोल” जैसे सामाजिक संदेश को भी सशक्त रूप से जन-जन तक पहुंचा रही है। श्रद्धा, संकल्प और बेटी के प्रति सम्मान का यह अनूठा उदाहरण श्रावणी मेले की प्रेरणादायक सफल कहानियों में शामिल हो गया है।

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भागलपुर दिनांक: 05/08/2026, भागलपुर के विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में हर वर्ष शिवभक्ति के अनेक प्रेरक और अनोखे स्वरूप देखने को मिलते हैं। इस वर्ष कच्ची कांवरिया पथ पर एक ऐसी भावनात्मक यात्रा श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रही है, जिसमें एक पिता अपनी मात्र दो माह की पुत्री को डोली में बैठाकर दंडवत यात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं।

मुजफ्फरपुर निवासी मिथिलेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2025 में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के दौरान उन्होंने पुत्री रत्न की प्राप्ति की मनोकामना की थी। उन्होंने संकल्प लिया था कि यदि उनके घर बेटी का जन्म होगा, तो अगली श्रावणी यात्रा में वे अपनी पुत्री को साथ लेकर दंडवत यात्रा करते हुए बाबा के दरबार पहुंचेंगे।

वर्ष 2026 में उनकी मनोकामना पूरी हुई और उनके घर बेटी का जन्म हुआ। अब वे अपने संकल्प को पूरा करने के लिए दो माह की नन्ही बेटी को डोली में बैठाकर कठिन दंडवत यात्रा कर रहे हैं। उनकी डोली को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यात्रा के दौरान बच्ची को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसमें पंखा, प्रकाश व्यवस्था तथा सोलर ऊर्जा से संचालित सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

मिथिलेश कुमार ने बताया कि उनके परिवार में पहले से एक पुत्र है, लेकिन बेटी के जन्म ने उनके परिवार को पूर्णता प्रदान की है। वे अपनी इस यात्रा के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि बेटियां परिवार का गौरव हैं और उनका सम्मान समाज की जिम्मेदारी है।

कच्ची कांवरिया पथ से गुजरते समय श्रद्धालु इस अनोखी डोली को देखने के लिए रुक जाते हैं। लोग पिता की अटूट आस्था के साथ-साथ अपनी बेटी के प्रति उनके स्नेह और समर्पण की सराहना कर रहे हैं।

यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि “बेटी सम्मान” और “बेटी है अनमोल” जैसे सामाजिक संदेश को भी सशक्त रूप से जन-जन तक पहुंचा रही है। श्रद्धा, संकल्प और बेटी के प्रति सम्मान का यह अनूठा उदाहरण श्रावणी मेले की प्रेरणादायक सफल कहानियों में शामिल हो गया है।

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भागलपुर दिनांक: 05/08/2026, भागलपुर के विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में हर वर्ष शिवभक्ति के अनेक प्रेरक और अनोखे स्वरूप देखने को मिलते हैं। इस वर्ष कच्ची कांवरिया पथ पर एक ऐसी भावनात्मक यात्रा श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रही है, जिसमें एक पिता अपनी मात्र दो माह की पुत्री को डोली में बैठाकर दंडवत यात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं।

मुजफ्फरपुर निवासी मिथिलेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2025 में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के दौरान उन्होंने पुत्री रत्न की प्राप्ति की मनोकामना की थी। उन्होंने संकल्प लिया था कि यदि उनके घर बेटी का जन्म होगा, तो अगली श्रावणी यात्रा में वे अपनी पुत्री को साथ लेकर दंडवत यात्रा करते हुए बाबा के दरबार पहुंचेंगे।

वर्ष 2026 में उनकी मनोकामना पूरी हुई और उनके घर बेटी का जन्म हुआ। अब वे अपने संकल्प को पूरा करने के लिए दो माह की नन्ही बेटी को डोली में बैठाकर कठिन दंडवत यात्रा कर रहे हैं। उनकी डोली को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यात्रा के दौरान बच्ची को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसमें पंखा, प्रकाश व्यवस्था तथा सोलर ऊर्जा से संचालित सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

मिथिलेश कुमार ने बताया कि उनके परिवार में पहले से एक पुत्र है, लेकिन बेटी के जन्म ने उनके परिवार को पूर्णता प्रदान की है। वे अपनी इस यात्रा के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि बेटियां परिवार का गौरव हैं और उनका सम्मान समाज की जिम्मेदारी है।

कच्ची कांवरिया पथ से गुजरते समय श्रद्धालु इस अनोखी डोली को देखने के लिए रुक जाते हैं। लोग पिता की अटूट आस्था के साथ-साथ अपनी बेटी के प्रति उनके स्नेह और समर्पण की सराहना कर रहे हैं।

यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि “बेटी सम्मान” और “बेटी है अनमोल” जैसे सामाजिक संदेश को भी सशक्त रूप से जन-जन तक पहुंचा रही है। श्रद्धा, संकल्प और बेटी के प्रति सम्मान का यह अनूठा उदाहरण श्रावणी मेले की प्रेरणादायक सफल कहानियों में शामिल हो गया है।

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