
*जेपी से डालमिया के हाथ में गया रीवा सीमेंट प्लांट, पर 40 करोड़ का बकाया आज भी अधर में: स्थानीय ठेकेदार, ट्रांसपोर्टर और श्रमिकों में उबाल, दो साल से चक्कर काट रहे कारोबारी*
*एग्रीमेंट में था सभी पुरानी देनदारी चुकाने का वादा, लेकिन जीएसटी-इनकम टैक्स भरने के बाद भी नहीं मिला भुगतान, नायब तहसीलदार को ज्ञापन देने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई*
रीवा। रीवा के नैबस्ता स्थित जेपी सीमेंट प्लांट के डालमिया भारत सीमेंट के हाथों में जाने के बाद स्थानीय लोगों की मुश्किलें कम होने की जगह और बढ़ गई हैं। प्लांट के लिए अपनी जमीनें देने वाले किसानों से लेकर दिन-रात काम करने वाले ठेकेदार, ट्रांसपोर्टर, सप्लायर और श्रमिक आज अपने ही हक के पैसों के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
*करोड़ों अटके, फूट रहा गुस्सा*
स्थानीय कारोबारियों का आरोप है कि जेपी प्रबंधन के समय का करीब 40 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान आज भी डालमिया प्रबंधन में अटका हुआ है। वर्षों से किए गए ठेकेदारी, मशीनरी, निर्माण कार्य, सामग्री आपूर्ति और परिवहन के बिलों का भुगतान नहीं हुआ है। इससे न सिर्फ उनका कारोबार ठप हो गया है, बल्कि बैंक का कर्ज, कर्मचारियों का वेतन और परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।
*सबसे बड़ी बेईमानी - जीएसटी तक भर दिया, पैसा नहीं मिला*
कारोबारियों का दर्द यह है कि उन्होंने इन बकाया बिलों पर अपनी जेब से जीएसटी और इनकम टैक्स तक का भुगतान सरकार को कर दिया है, लेकिन कंपनी से उन्हें एक रुपया नहीं मिला। अब वह दोहरी मार झेल रहे हैं।
*स्वामित्व बदला, वादा टूटा मीटिंग में दिया था भरोसा*
कारोबारियों ने बताया कि करीब दो साल पहले जब जेपी से डालमिया को स्वामित्व हस्तांतरण हो रहा था, तब दोनों कंपनियों के बड़े अधिकारियों ने क्षेत्रीय लोगों के साथ बैठक की थी। बैठक में साफ तौर पर आश्वासन दिया गया था कि किसी भी स्थानीय कर्मचारी का रोजगार नहीं जाएगा और सभी पुराने बकायों का भुगतान डालमिया ग्रुप द्वारा कर दिया जाएगा। एग्रीमेंट में भी यह बात लिखी गई थी, लेकिन अब प्रबंधन अपने ही वादे से मुकर रहा है।
*24 जुलाई को दिया था ज्ञापन, आज तक कोई सुनवाई नहीं आंदोलन की तैयारी में व्यापारी*
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय ठेकेदारों, परिवहनकर्ताओं, आपूर्तिकर्ताओं और श्रमिकों ने 24 जुलाई 2026 को हुजूर वृत्त के नायब तहसीलदार नैबस्ता को सामूहिक ज्ञापन सौंपकर जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की थी। लेकिन दो महीने से अधिक बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर अब स्थानीय लोग एक बार फिर बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
*जमीन हमारी, खदानें हमारी, फिर भी हम बेरोजगार*
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सीमेंट प्लांट और उसकी खदानें क्षेत्रीय लोगों की ही जमीन पर संचालित हैं। लोगों ने उद्योग के लिए अपनी जमीन देकर सहयोग किया था, ताकि क्षेत्र का विकास हो और रोजगार मिले। लेकिन आज उसी जमीन पर चल रहे प्लांट से उन्हें बेरोजगारी और कर्ज ही मिल रहा है। बताया जा रहा है कि बकाया राशि में श्रीराम ट्रांसपोर्ट, श्रीराम रोडवेज, राम राम गुड्स कैरियर, प्रकाश स्ट्रक्चरल, इंटरप्राइजेज, संजीव पांडेय, शुक्ला कंस्ट्रक्शन सहित जेपी कंपनी के कई अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हैं।
Mauganj, Rewa | Oct 8, 2026