
भागलपुर, 05 अगस्त 2026: जिला स्तर पर उद्योग एवं व्यापार को बढ़ावा देने तथा उद्यमियों के लिए सरकारी सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से जिला व्यवसाय सुधार एक्शन प्लान (District Business Reforms Action Plan – DBRAP) लागू किया जा रहा है। यह पहल भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा विकसित एक राज्य-नेतृत्व वाली जिला स्तरीय सुधार पहल है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य '
*ईज ऑफ डूइंग बिजनेस* *(Ease of Doing Business)* से जुड़े सुधारों को जिला स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करना है, ताकि व्यवसाय स्थापित करने, उद्योग संचालित करने तथा विभिन्न सरकारी अनुमतियां प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक निवेशक-अनुकूल, पारदर्शी और सुविधाजनक बन सके।
किसी भी उद्यमी या व्यवसायी का सबसे अधिक संपर्क जिला स्तर के कार्यालयों से होता है, जिनमें जिला उद्योग केंद्र (DIC), जिला प्रशासन, नगर निकाय, श्रम विभाग, बिजली वितरण कंपनियां तथा अन्य संबंधित विभाग शामिल हैं।
पूर्व में लागू बिजनेस रिफॉर्म्स एक्शन प्लान (BRAP) का मुख्य फोकस राज्य स्तर पर सुधारों पर था। हालांकि, जमीनी स्तर पर उद्यमियों को विभिन्न अनुमतियों और सरकारी प्रक्रियाओं में होने वाली कठिनाइयों तथा अनावश्यक देरी को देखते हुए DBRAP की शुरुआत की गई। इसके तहत जिला प्रशासन, जिला उद्योग केंद्र (DIC), नगर निकाय, श्रम, राजस्व, अग्निशमन, प्रदूषण नियंत्रण, बिजली तथा भवन निर्माण अनुमति से जुड़े विभागों की प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा रहा है।
DBRAP के प्रमुख उद्देश्य व्यवसाय स्थापित करने और संचालन की प्रक्रिया को सरल बनाना, ताकि उद्यमियों को विभिन्न कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।आवेदन, शुल्क भुगतान, प्रमाण-पत्र, अनुमति एवं स्वीकृतियों जैसी सेवाओं को डिजिटल एवं ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराना।
प्रत्येक सेवा के लिए निर्धारित समय-सीमा तय करना तथा आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग की सुविधा उपलब्ध कराना।जिले की निवेश क्षमता को बढ़ावा देना तथा नए उद्यमियों को पंजीकरण, ऋण और सरकारी सहायता योजनाओं तक आसान पहुंच प्रदान करना। जोखिम-आधारित एवं एकीकृत निरीक्षण प्रणाली विकसित करना तथा प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित करना। जिला उद्योग केंद्र (DIC) की महत्वपूर्ण भूमिका DBRAP के प्रभावी क्रियान्वयन में जिला उद्योग केंद्र (DIC) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। कई राज्यों में DIC के महाप्रबंधक को जिला स्तर पर नोडल अधिकारी अथवा समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह टीम जिलाधिकारी के नेतृत्व में नगर निगम, श्रम विभाग, राजस्व विभाग, बिजली वितरण कंपनियों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर जिले में निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करती है।
उद्यमियों को मिलने वाले प्रमुख लाभ आवेदन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल होगी तथा कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे।विभिन्न अनुमतियों एवं स्वीकृतियों में समय की बचत होगी तथा आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकेगी।निरीक्षण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
MSME एवं स्टार्टअप्स को बेहतर सहयोग मिलने से जिलों में नए उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
DBRAP के माध्यम से जिला स्तर पर प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इससे न केवल उद्यमियों को बेहतर व्यावसायिक वातावरण मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
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