भागलपुर 05 अगस्त 2026, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर का 17वाँ स्थापना दिवस आज बड़े ही हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर पूरे विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह एवं चहल-पहल का वातावरण रहा। स्थापना दिवस समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय के कर्पूरी सभागार में किया गया।
समारोह में बिहार के माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन आभासी माध्यम से मुख्य अतिथि के रूप में जुड़े। कार्यक्रम में बिहार सरकार के माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा भी आभासी माध्यम से शामिल हुए। वहीं सभागार में बिहार सरकार के माननीय ग्रामीण विकास एवं सूचना-जनसंपर्क मंत्री श्री श्रवण कुमार, भागलपुर के माननीय सांसद श्री अजय कुमार मंडल तथा कहलगाँव के माननीय विधायक श्री शुभानंद मुकेश विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुई। माननीय कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए *माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति* ने विश्वविद्यालय परिवार को 17वें स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि, "एक शताब्दी से भी अधिक गौरवशाली इतिहास वाला यह संस्थान भारत की कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान व्यवस्था में एक विशिष्ट स्थान रखता है। हाल ही में प्राप्त नैक (NAAC) की 'ए' (A) ग्रेड मान्यता तथा जलवायु-अनुकूल (Climate-Resilient) फसल किस्मों के विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान इस विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट कार्य-संस्कृति का परिचायक है, जो हम सभी की सराहना का पात्र है।" उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस केवल उपलब्धियों का उत्सव मनाने का अवसर नहीं होता, बल्कि यह उन दायित्वों पर भी गंभीरता से विचार करने का अवसर है, जो भविष्य में हमारा मार्गदर्शन करेंगे।
अपने उद्बोधन के उपरांत माननीय राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान से विकसित विभिन्न उत्पादों का विमोचन किया, जिनमें अपराजिता के फूलों से निर्मित ब्लू टी, कटहल के बीजों से निर्मित आटा तथा हनी स्पून प्रमुख हैं। इसके साथ ही उन्होंने एआई आधारित चैटबॉट "एग्री-ग्रंथ" का भी विमोचन किया।
*माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा* ने अपने संदेश में कृषि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने तथा बिहार की कृषि को अधिक समृद्ध एवं आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर पिछले 16 वर्षों से कृषि अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा किसानोन्मुखी तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्थान भविष्य में भी कृषि क्षेत्र में नवाचार और किसान कल्याण के नए आयाम स्थापित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि "समृद्ध किसान ही समृद्ध बिहार और विकसित भारत की सबसे मजबूत आधारशिला हैं।"
*माननीय ग्रामीण विकास एवं सूचना-जनसंपर्क मंत्री श्री श्रवण कुमार* ने विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि 16 वर्ष कोई बहुत लंबा समय नहीं होता, लेकिन संकल्प, निष्ठा और समर्पण के साथ अल्प अवधि में भी लंबी उपलब्धियों का सफर तय किया जा सकता है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय की उपलब्धियाँ उसकी आयु से कहीं अधिक बड़ी हैं।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में *माननीय कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह* ने कहा कि आज हम केवल सत्रहवाँ स्थापना दिवस नहीं मना रहे हैं, बल्कि उस संकल्प की समीक्षा भी कर रहे हैं, जो बिहार की धरती, उसके किसानों, उसके युवाओं तथा कृषि के भविष्य को विरासत में प्राप्त करने वाली आने वाली पीढ़ियों से किया गया था। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस केवल किसी संस्थान के इतिहास की एक तिथि नहीं होता, बल्कि यह आत्ममंथन का अवसर होता है कि हमने कितने लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया, कितने नए अवसरों का सृजन किया, कितने वैज्ञानिक नवाचारों को खेतों तक पहुँचाया तथा अपने विद्यार्थियों को समाज और कृषि की सेवा के लिए कितनी प्रभावी ढंग से तैयार किया।
उन्होंने कहा कि किसी कृषि विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का आकलन केवल उसके निर्मित भवनों, स्थापित प्रयोगशालाओं अथवा प्रकाशित शोध-पत्रों से नहीं किया जा सकता। उसकी वास्तविक प्रगति का मापदंड वे किसान हैं जिनके जोखिम कम हुए हैं, वे विद्यार्थी हैं जिनका भविष्य अधिक सुदृढ़ हुआ है, वे गाँव हैं जहाँ प्रौद्योगिकी ने आय के नए स्रोत उत्पन्न किए हैं तथा वे स्थानीय उत्पाद हैं जिन्हें नई पहचान, बेहतर गुणवत्ता और व्यापक बाजार मूल्य प्राप्त हुआ है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर माननीय कुलपति ने कहा कि वे बिहार कृषि विश्वविद्यालय के विगत सभी माननीय कुलाधिपतियों एवं कुलपतियों के प्रति अपनी गहन कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिनकी दूरदृष्टि, मार्गदर्शन और समर्पित नेतृत्व ने विश्वविद्यालय की प्रगति को नई दिशा प्रदान की है। प्रत्येक ने अपने-अपने कार्यकाल में शैक्षणिक एवं अनुसंधान कार्यक्रमों, आधारभूत संरचना, प्रसार सेवाओं तथा बिहार के कृषक समुदाय के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने बिहार कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों (एलुमनाइ) के प्रति भी अपनी हार्दिक सराहना व्यक्त की, जो देश-विदेश में अपनी उपलब्धियों के माध्यम से अपनी मातृसंस्था के ज्ञान, मूल्यों और गौरव को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में युवा शोधार्थियों को चार मिनट में शोध प्रस्तुतीकरण (4MRF) के लिए सम्मानित किया गया। वहीं उत्कृष्ट शोध प्रकाशन के लिए प्राध्यापकों को भी सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त श्रेष्ठ किसान तथा श्रेष्ठ स्टार्टअप को भी सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन उमा भारती ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ चंदा कुशवाहा ने किया।
*बिहार कृषि विश्वविद्यालय का सफर : एक नजर में*
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की जड़ें भारत में कृषि शिक्षा के प्रारंभिक इतिहास से जुड़ी हैं। सबौर स्थित कृषि महाविद्यालय की आधारशिला 17 अगस्त 1908 को तत्कालीन बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर एंड्रयू हेंडरसन लीथ फ्रेज़र द्वारा रखी गई थी। यह देश के सबसे पुराने कृषि महाविद्यालयों में से एक है। बंगाल विभाजन के बाद इसका नाम बिहार एग्रीकल्चरल कॉलेज (BAC), सबौर रखा गया।
वर्ष 1955 में यहाँ स्नातकोत्तर कृषि शिक्षा की शुरुआत हुई, जिसने कृषि अनुसंधान और उच्च शिक्षा को नई दिशा दी। बाद में वर्ष 1970 में यह महाविद्यालय राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा से संबद्ध हो गया।
बिहार में कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से 5 अगस्त 2010 को बिहार विधानमंडल के अधिनियम संख्या-20, 2010 के तहत बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की स्थापना एक स्वायत्त राज्य कृषि विश्वविद्यालय के रूप में की गई। इसका मुख्यालय ऐतिहासिक बिहार एग्रीकल्चरल कॉलेज परिसर, सबौर (भागलपुर) में स्थापित किया गया।
स्थापना के बाद विश्वविद्यालय ने शिक्षा, अनुसंधान तथा कृषि प्रसार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्तमान में विश्वविद्यालय के अंतर्गत 8 घटक महाविद्यालय, 12 अनुसंधान केंद्र तथा बिहार के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में कार्यरत 22 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) हैं। विश्वविद्यालय किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों के प्रसार, क्षमता निर्माण तथा कृषि नवाचारों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
JEEVIKA Bihar
Panchayati Raj Department, Government of Bihar
Bhagalpur District Administration
1 views | Bhagalpur, Bihar | Aug 5, 2026