*बाढ़ राहत शिविरों में गूंज रही मंजूषा कला की रंगीन रेखाएँ, रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ रहे बाढ़ पीड़ित बच्चे*
भागलपुर, 13 सितंबर 2026। भागलपुर जिले में आई भयावह बाढ़ के बीच जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ पीड़ितों के लिए विभिन्न स्थानों पर राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में आश्रय, भोजन एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के साथ-साथ बच्चों और अन्य प्रभावित लोगों को शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का भी विशेष प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में जिला प्रशासन द्वारा कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से तीन बाढ़ राहत शिविरों—चर्चगेट मैदान, पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान तथा टीएनबी कॉलेजिएट—में बाढ़ पीड़ित बच्चों के लिए मंजूषा कला प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन के नेतृत्व में आयोजित इस पहल का उद्देश्य विपरीत परिस्थितियों के बीच बच्चों को रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करने के साथ-साथ अंग क्षेत्र की समृद्ध लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत से उनका परिचय कराना है। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को मंजूषा चित्रकला की मूलभूत तकनीकों के साथ-साथ बिहुला-विषहरी की लोकगाथा, मंजूषा कला की परंपरा तथा इसके सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी जा रही है।
चर्चगेट मैदान में प्रशिक्षक के रूप में विशुद्ध मिश्रा एवं हिना कुमारी, टीएनबी कॉलेजिएट में डॉ. उलूपी झा तथा पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में मंजूषा गुरु मनोज पंडित द्वारा बच्चों को प्रशिक्षण दिया गया। बच्चों ने पेंसिल एवं रंगों के माध्यम से मंजूषा कला की पारंपरिक आकृतियों और कथात्मक तत्वों को अपनी कल्पनाशीलता के साथ कागज पर उकेरा।
आज भागलपुर के प्रभारी मंत्री श्री नीतीश मिश्रा ने भी चर्चगेट मैदान एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान स्थित बाढ़ राहत शिविरों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने मंजूषा कला का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बाढ़ पीड़ित बच्चों की गतिविधियों का अवलोकन किया तथा बच्चों द्वारा बनाए जा रहे चित्रों में विशेष रुचि दिखाई।
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने कहा कि कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा वर्षभर विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं, लेकिन बाढ़ राहत शिविरों में आयोजित यह प्रशिक्षण अपने आप में विशेष और भावनात्मक महत्व रखता है। उन्होंने कहा, “जो बच्चे इस कार्यशाला से जुड़ रहे हैं, उनमें से बहुत से बच्चे सामान्य परिस्थितियों में आयोजित होने वाली मंजूषा प्रशिक्षण कार्यशालाओं तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे समय में कला को उनके बीच ले जाना केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उनके भीतर की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करना है। कला एवं संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन, भागलपुर का प्रयास है कि समाज के हर वर्ग और हर परिस्थिति में रहने वाले व्यक्ति तक कला एवं संस्कृति की पहुंच सुनिश्चित हो। जिला पदाधिकारी महोदया श्रीमती अलंकृता पाण्डेय के सकारात्मक निर्देश एवं मार्गदर्शन से इस सोच को धरातल पर उतारने का अवसर मिला है।”
मंजूषा गुरु मनोज पंडित ने कहा कि बाढ़ पीड़ित बच्चों से जुड़ना, उनकी सोच और संवेदनाओं को समझना तथा उनके माध्यम से बिहुला-विषहरी की लोकगाथा को आगे बढ़ाना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बीच बच्चों को अपनी संस्कृति और कला से जोड़ना बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रशिक्षक डॉ. उलूपी झा ने इस पहल को अतुलनीय और अद्भुत बताते हुए कहा कि बाढ़ जैसी कठिन परिस्थिति में बच्चों को कला से जोड़ना उन्हें मानसिक रूप से सकारात्मक वातावरण प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि रचनात्मक गतिविधियां बच्चों के मन को सहज बनाने और उनकी भावनाओं को अभिव्यक्ति देने में मदद करती हैं। यह अनुभव एक प्रकार की आर्ट थेरेपी की तरह भी कार्य कर सकता है।
चर्चगेट में प्रशिक्षक हिना कुमारी एवं विशुद्ध मिश्रा ने कहा कि कुछ ही घंटों के प्रशिक्षण में बच्चों ने जिस उत्साह और कौशल का परिचय दिया, वह उल्लेखनीय है। बच्चों ने पेंसिल और रंगों के माध्यम से अंग क्षेत्र की लोक कला को अपनी सहज और स्वाभाविक रेखाओं में जीवंत कर दिया। उनके चित्रों में दिखाई देने वाली सरल रेखाएं, रंगों का प्रयोग और आकृतियां उनके कोमल मन, कल्पनाशीलता और भीतर छिपी रचनात्मक ऊर्जा को दर्शाती हैं।
बाढ़ राहत शिविरों में चल रही यह पहल इस बात का उदाहरण है कि आपदा के कठिन समय में राहत केवल भोजन और आश्रय तक सीमित नहीं होती, बल्कि प्रभावित लोगों के मनोबल, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मंजूषा कला के माध्यम से बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने की यह पहल अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ संकट की घड़ी में रचनात्मकता और उम्मीद के रंग भरने का सार्थक प्रयास है।
ज़िला जनसंपर्क कार्यालय
भागलपुर
13 views | Bhagalpur, Bihar | Sep 13, 2026