*ड्रोन से फसल सुरक्षा की नई उड़ान, लखीसराय में आधुनिक पौधा संरक्षण को बढ़ावा*
पौधा संरक्षण विभाग की पहल से किसानों को आधुनिक तकनीक का लाभ धान सहित अन्य फसलों में कीटनाशी, रोगनाशी एवं तरल उर्वरकों के समान छिड़काव की सुविधा
खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा फसलों को कीट, व्याधि, खरपतवार से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कृषि विभाग, बिहार सरकार के पौधा संरक्षण संभाग द्वारा जिले में ड्रोन आधारित फसल छिड़काव को बढ़ावा दिया जा रहा है। विभाग ने जिले के लिए 3675 एकड़ का लक्ष्य निर्धारित किया है जिसके विरुद्ध अब तक किसानों द्वारा 1500 एकड़ के लिए आवेदन किया जा चुका है और वर्तमान खरीफ सीजन में धान के प्रमुख क्षेत्र जैसे हलसी, रामगढ़ चैक, लखीसराय प्रखंड में धान के फसल में कीट, व्याधि एवं खरपतवार प्रबंधन के साथ-साथ आवश्यकता के अनुसार तरल उर्वरकों हेतु चरण बध तरीके से छिड़काव कार्य प्रगति पर है।
आधुनिक तकनीक के प्रति जिले के लाभुक किसान मनीष कुमार, प्रदीप कुमार, राजादेव कुमार, सावित्री देवी, अशोक कुमार, शिववालक पासवान में उत्साह, हर्ष एवं संतोष भी देखा जा रहा है।
कृषि ड्रोन से छिड़काव के लिए सरकार को लागत 419 रुपए प्रति एकड़ आती है परंतु इसमें बड़ी राहत देते हुए किसानों को 50% अनुदानित दर से केवल 410 रुपए प्रति एकड़ का भुगतान करना होगा। शेष राशि अनुदान के रूप में सरकार द्वारा देय है।
*सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण, लखीसराय, श्री अंकित आनंद* ने बताया कि पारंपरिक विधि से हाथ अथवा मैनुअल स्प्रेयर द्वारा छिड़काव में अधिक श्रम एवं समय की आवश्यकता होती है। वहीं ड्रोन के माध्यम से मात्र 5 से 6 मिनटों में और केवल 10 लीटर पानी से एक एकड़ क्षेत्र में एक समान छिड़काव किया जा सकता है। इससे किसानों के समय, श्रम, कीटनाशी, पानी की बचत के साथ खेत में प्रवेश किए बिना फसल पर आवश्यक पौधा संरक्षण सामग्री का छिड़काव संभव होता है। यह किसान की आय दोगुनी करने ने अहम भूमिका निभा सकता है।
किसानों की फसल सुरक्षा, लागत में कमी तथा समय पर पौधा संरक्षण कार्य सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन एवं जागरूकता लगातार जारी रहेगी।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए रैयत अथवा गैर रैयत किसान, कृषि विभाग के आधिकारिक डीबीटी पोर्टल पर स्व घोषणा पत्र भर कर आवेदन कर सकते है।
पौधा संरक्षण विभाग की ओर से किसानों से अपील की गई है कि वे विभागीय योजनाओं का लाभ उठाते हुए आधुनिक तकनीक, समेकित कीट प्रबंधन (IPM), संतुलित उर्वरक उपयोग तथा वैज्ञानिक फसल प्रबंधन को अपनाएं।
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